happy_rupana

Kuch de Udhaare Pal Ae Zindgi, Kuch Ehsaan Kar!

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  • happy_rupana 2w

    उधारे पल मांग कर मौत से आ रहा हूं, मैं पूछने तुझसे मेरी खता जिंदगी,
    मैंने तो तेरे संग की थी ना वफाएं, फिर क्यों निकली तू बेवफा जिंदगी!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 5w

    वो जिंदगी जी रही है, और मैं काट रहा हूं!
    बस फर्क इतना सा है........
    वो दिन सी हसीन और मैं तन्हा रात सा हूं!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 6w

    ....!

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    ना कुछ सुनता, ना कुछ कहता हूं,
    बस खामोश सा अब मैं रहता हूं....

    किसी को फर्क ही क्या पड़ता है,
    मेरे होने या ना होने से,
    कोई खुश नहीं कोई उदास नहीं,
    मुझे पाने या मुझे खोने से,
    वो पराया मुझे समझते हैं,
    जिन्हें मैं अपना कहता रहता हूं!
    ना कुछ सुनता, ना कुछ कहता हूं,
    बस खामोश सा अब मैं रहता हूं....

    यूं दोस्त दोस्त सब चिल्लाते हैं,
    लेकिन समझता यहां कोई नहीं,
    मतलबी से सभी रिश्ते हैं,
    हकीकत में अपना कोई नहीं,
    यूं उनका तो गुजारा हो जाता,
    और एक मैं हूं! जो तड़पता रहता हूं!
    ना कुछ सुनता, ना कुछ कहता हूं,
    बस खामोश सा अब मैं रहता हूं....

    मेरी गजलें तन्हा रहती हैं,
    अब उनको ना कोई पढ़ता है,
    कोई पानी तक भी पूछे ना,
    और इक शायर बेजुबान सा मरता है,
    मिटा दी गजलें खुद मिट गया मैं,
    अब बस धुआं उठता रहता यूं,
    ना कुछ सुनता, ना कुछ कहता हूं,
    बस खामोश सा अब मैं रहता हूं....
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 8w

    ए जिंदगी तुझसे इक शिकायत है,
    तू पास है फिर भी जीना ख्वाहिश है!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 9w

    #Punjabi_poem
    Anyone can easily translate it! From Google translator!

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    ਉਹ ਗੁੰਮ-ਸੁੰਮ ਬੈਠੀ ਕੋਲ ਮੇਰੇ,
    ਉਹਨੂੰ ਸੁਣਦੇ ਨਹੀਂਓ ਬੋਲ ਮੇਰੇ,
    ਕਈ ਰਾਜ ਉਹਦੇ ਅਣਖੋਲੇ ਨੇ,
    ਕਈ ਵਰਕੇ ਅਜੇ ਅਣਫਰੋਲੇ ਨੇ,
    ਉਹਦੀਆਂ ਮੁਸਕਰਾਹਟਾਂ ਕਿਤੇ ਖੋ ਗਈਆਂ,
    ਜੋ ਦੂਰ ਚੀਕਾਂ ਮਾਰ-ਮਾਰ ਰੋ ਰਹੀਆਂ,
    ਉਹਦੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਜੋ ਪੁੱਛਦੀਆਂ ਸਵਾਲ ਨੇ,
    ਉਹ ਅੱਜ ਖੁਦ ਹੀ ਬੇਜਵਾਬ ਨੇ,
    ਉਹ ਕਿਤੇ ਦੂਰ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਲੱਭ ਰਹੀ,
    ਉਹ ਮੈਨੂੰ ਵੀ ਨਹੀਂ ਦਸ ਰਹੀ,
    ਉਹਦੀ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਰੋਣਾ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹੈ,
    ਤੇ ਉਹ ਝੂਠਾ-ਮੂਠਾ ਹੱਸ ਰਹੀ,
    ਇਹ ਕੈਸਾ ਮੌਸਮ ਹੈ ਪਤਝੜ ਦਾ,
    ਹਵਾ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਕਤਲ ਕਰਾ ਰਹੀ ਏ,
    ਇਹਨਾਂ ਗੂੰਗਿਆਂ ਦੇ ਸ਼ਹਿਰ ਚੋਂ ਮੈਨੂੰ,
    ਕਿਤੋਂ ਅਵਾਜ਼ ਚੀਕਾਂ ਦੀ ਆ ਰਹੀ ਏ,
    ਜੋ ਆਇਆ ਉਹਨੇ ਚਲੇ ਜਾਣਾ ਹੈ,
    ਮੰਨਿਆਂ ਇਹ ਰੀਤ ਅਜੀਬ ਹੈ,
    ਪਰ ਕਿਸੇ ਦਾ ਜਾਇਆ ਜਿੰਦਗੀ ਰੁਕਦੀ ਨਹੀਂ,
    ਚਾਹੇ ਉਹ ਕਿੰਨਾ ਮਰਜ਼ੀ ਕਿਸੇ ਦੇ ਕਰੀਬ ਹੈ,
    ਉਹਦੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਜੋ ਨਮ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਨੇ,
    ਲੱਗਦਾ ਉਹਨਾ ਆਪਣਾ ਕੋਈ ਗੁਆਇਆ ਏ,
    ਉਹਦਾ ਆਪਣਾ ਕੋਈ ਉਸ ਦੇਸ਼ ਗਿਆ,
    ਜਿਥੋਂ ਕੋਈ ਮੁੜ੍ਹ ਕੇ ਨਾ ਆਇਆ ਏ,
    ਉਹਦੀਆਂ ਪਲਕਾਂ ਜਦ ਵੀ ਝਪਕਦੀਆਂ,
    ਨਾ ਜਾਣੇ ਕਿੰਨੇ ਹੰਝੂ ਰੋਕ ਰਹੀਆਂ,
    ਕੋਲ ਬੈਠੀਆਂ ਚਿੜੀਆਂ ਵੀ,
    ਉਹਦੀ ਉਦਾਸੀ ਬਾਰੇ ਸੋਚ ਰਹੀਆਂ,
    ਉਹਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ ਜੋ ਫੁੱਲ ਕਦੇ ਖਿਲਦੇ ਸੀ,
    ਉਹ ਅੱਜ ਮੁਰਝਾ ਮੁਰਝਾ ਕੇ ਸੁੱਕ ਗਏ,
    ਕੁਝ ਖੁਆਬ ਕੱਚੀ ਨੀਂਦ ਵਾਂਗ,
    ਪੂਰੇ ਹੋਏ ਬਿਨਾ ਹੀ ਟੁੱਟ ਗਏ,
    ਇਹ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਹੈ, ਜਿਉਣਾ ਪੈਣਾ ਹੀ ਏ,
    ਮੈਂ ਉਹਨੂੰ ਵਾਰ-ਵਾਰ ਇਹ ਸਮਝਾਉਂਦਾ ਹਾਂ,
    ਪਰ ਉਹਨੂੰ ਸਮਝਾਉਂਦਿਆਂ,
    ਮੈਂ ਨਾ ਜਾਣੇ ਕਿੰਨੇ ਹੰਝੂ ਲੁਕਾਉਂਦਾ ਹਾਂ,
    ਮੈਂ ਕਿੰਝ ਉਹਨੂੰ ਦਿਲਾਸਾ ਦੇਵਾਂ,
    ਜਦ ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਹੀ ਪੈ ਰਹੇ ਹੋਲ ਮੇਰੇ,
    ਉਹ ਗੁੰਮ-ਸੁੰਮ ਬੈਠੀ ਕੋਲ ਮੇਰੇ,
    ਉਹਨੂੰ ਸੁਣਦੇ ਨਹੀਂਓ ਬੋਲ ਮੇਰੇ।
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 9w

    अक्सर ढूंढता हूं उन्हें......

    कुछ सपने जो अधूरे ही रहे,
    कुछ लफ्ज़ जो अनकहे ही रहे,
    कुछ मुस्कुराहटें जो मैं मुस्कुराना भूल गया,
    कुछ आंसू जो आंखों में ही खो गए!

    जाग जाग कर थी काटी कुछ वो रातें,
    जो करनी ही रह गई कुछ वो बातें,
    फुर्सत मिली तो फुर्सत से करेंगे याद,
    वो लम्हे जो अब बन चुके हैं यादें!

    वो चांद जो अब है किसी और का,
    वह संगीत जो अब लगता है शोर सा,
    वो बरसाते, वो गलियां तेरे शहर की,
    वो शामें जिनसे अब लगता है खौफ सा,

    कुछ दिन जो मैं जीना भूल गया,
    इक जाम जो मैं पीना भूल गया,
    एक डायरी जो कहीं दफन सी ही रही,
    और! एक मैं शायर, जो बन अब धूल गया!
    अक्सर ढूंढता हूं उन्हें......!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 9w

    समझदारों की दुनिया में, मैं पागलों सा जुनून ढूंढ रहा हूं,
    दिल भर चुका अब झूठी खुशियों से, मैं सुकून ढूंढ रहा हूं।
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 10w

    Ae Zindgi, mujhe teri talash hai,
    Ae Zindgi, tu kyu mujhse naraz hai,
    Ae Zindgi, iss andhera bhare waqt mei,
    Ae Zindgi, Tu ik jugnu sii aas hai!
    Ae Zindgi!

    Ae Zindgi, K Main To ik awara Sa hoon,
    Ae Zindgi, Tere Bin besahara Sa hoon,
    Ae Zindgi, tu behti Nadiya Si Hai,
    Ae Zindgi, Mai Sookha kinara Sa hoon!
    Ae Zindgi!

    Ae Zindgi, mujh par thodi dya tu kar,
    Ae Zindgi, bnna le mujhe humsafar, ,
    Ae Zindgi, jo dooriya hain tere mere Darmiya,
    Ae Zindgi, unhe Tu kar de khatam!
    Ae Zindgi!

    Ae Zindgi, titliyo se wo pal,
    Ae Zindgi, wo fullo sa bachpan,
    Ae Zindgi, mujhe aaj ko jeena seekha,
    Ae Zindgi, kisne dekha Hain kal!
    Ae Zindgi!

    Ae Zindgi, mujhe mere khaab louta de,
    Ae Zindgi, the dekhe jo khule aasma mei,
    Ae Zindgi, sooraj ko aane de zara,
    Ae Zindgi, ye kaale andhere hta de!
    Ae Zindgi!

    Ae Zindgi, tu kyu itni khudgaraz hai,
    Ae Zindgi, Tu kyu de rhi dard hai,
    Ae Zindgi, iski dwa to bta de,
    Ae Zindgi, jo tune diya marz hai!
    Ae Zindgi!

    Ae Zindgi, Tu chupkar baithi kaha re,
    Ae Zindgi, mujhe apna pta to bta de,
    Ae Zindgi, jo chaahe wo saja de,
    Ae Zindgi, lekin pehle gunaah to bta de!
    Ae Zindgi!

    Ae Zindgi, tu milja kisi moud par,
    Ae Zindgi, phir se baa'he khol kar,
    Ae Zindgi, tu mujhko le apna,
    Ae Zindgi, do lafz pyaar k bol kar!
    Ae Zindgi!

    Ae Zindgi, ik masum parinda hoon Mai,
    Ae Zindgi, bnn chuka ab darinda hoon mai,
    Ae Zindgi, k jeena chahta hoon Mai,
    Ae Zindgi, ye kaafi nahi k zinda hoon Mai!
    Ae Zindgi.....!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 10w

    मैं खुद को ढूंढने निकला हूं, कुछ चिराग लेकर हाथों में,
    मिलावट सी दिखने लगी है आजकल मेरी मुस्कुराहटों में,

    सांसे चलती है पर मैं जिंदा नहीं, घर तो है पर बाशिंदा नहीं,
    जिंदगी गुजर गई जब ढूंढने निकला जिंदगी को मैं किताबों में,

    मेरे अपनों की वफाओं की तारीफ करूं तो क्या करूं
    सब गुलाब गुलाब कहते रहे, थमाकर कांटे हाथों में,

    कुछ इस तरह से "बेजुबान" मैं बेजान सा हो गया,
    के अकेले रहना सीख लिया, मैंने भी तन्हा रातों से,

    मेरे दर्द को लिखते लिखते अब कलम भी यह टूट चुकी,
    पन्नों ने भी जहर खा लिया, जब मैंने ग़ज़ल लिखी जजबातों से।
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 11w

    एक शायर की मुझे लाश मिली,
    ............मिली है इक दरिया से,
    पानी में डूब कर मर गया वो,
    या वो तड़प कर मरा प्यास से।

    एक मकान मिला मुझे टूटा सा,
    इसकी दीवारें थी आज चीख रही,
    कभी यह मकान भी घर हुआ करता था,
    खैर! यह वो बात थी जो अब बीत गई।

    एक मिला मुझे फकीर ऐसा,
    जो खुदा को था तलाश रहा,
    कोई उसके भी इंतजार में होगा,
    कमबख्त! उसे यह तक ना याद रहा।

    उस शायर को ना कफन मिला,
    ना मिली चिता की आग,
    शायद वो भी कर रहा होगा,
    किसी का एक तरफा इंतजार!

    उस मकान में एक खिड़की थी,
    जो झुलस रही है अब तलक आग में,
    शायद वह मकान भी कभी घर बनेगा,
    ............ जो खुली है इस इंतजार में!

    उस फकीर का भी एक घर होगा,
    उसका भी एक संसार होगा,
    जो एक तरफा इंतजार में,
    उस फकीर का भी देखता राह होगा!

    "तेरे एक तरफा इंतजार में,
    मेरी गजलें उन पन्नों पर, दम घुट घुट कर मर गई,
    अगर कभी गलती से मैं याद आया,
    तो मेरी कब्र पर आना, और उन गजलों को मुकम्मल कर दी!"
    ©happy_rupana