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  • hindinama 9w

    बहुत लम्बे समय के बाद, आज वापस आप लोगों के बीच उपस्थित है!


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    मुश्किल था ये वक़्त,
    मग़र! वक़्त ही तो था!
    ©hindinama

  • hindinama 28w

    श्री कृष्ण की मुरली के तान सुनकर,
    हम विजयी होंगे, विजय गान सुनकर।
    ©hindinama

  • hindinama 29w

    @deovrat जी की रचनाएं पढ़ें,
    हिन्दी लेखनी को बढावा दें,

    बहुत अच्छी वंदना लिखी है देव जी ने,
    इस विकट घड़ी में प्रभु ही है जो समस्त समस्या का समाधान कर सकते है,

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    वंदना

    घट घट वासी हे अविनाशी...चमत्कार दिखलाओ।
    बहुत व्यथित हैं भक्त तुम्हारे कृपा वृष्टि बरसाओ।।
    घट घट वासी हे अविनाशी ....

    मायातीत हे लीलाधारी कण कण तू ही समाया।
    माया का सब खेल रचाया, उसमें मन भरमाया।।
    सब अंधियारे दूर करो प्रभु कोटि सूर्य बन जाओ।
    बहुत व्यथित हैं भक्त तुम्हारे कृपा वृष्टि बरसाओ।।
    घट घट वासी हे अविनाशी ....

    जबसे जन्म लिया धरती पर बस तेरा ही सहारा।
    गिनती की जो सांसें दी, हर सांस पे नाम तिहारा।।
    भाग्य विधाता जीवन दाता, प्राणवायु बन जाओ।
    बहुत व्यथित हैं भक्त तुम्हारे कृपा वृष्टि बरसाओ।।
    घट घट वासी हे अविनाशी ....

    अश्रुधार के निर्मल जल से निसदिन चरण पखारुं।
    "अयन" तुम्हीं हो मेरे अपने.. कातर तुम्हें पुकारूं।।
    हे अभ्यंकर अभयदान दो, ज्ञान चक्षु बन जाओ।
    बहुत व्यथित हैं भक्त तुम्हारे कृपा वृष्टि बरसाओ।।
    घट घट वासी हे अविनाशी ....
    ©Deovrat

  • hindinama 29w

    @happy81( हर्षिता) जी की रचनाएं पढ़ें

    हिन्दी लेखनी को बढावा दें,

    समाज की छवि को दर्शाती एक रचना) :
    बहुत अच्छा लिखा है) :

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    अनचाही बिटिया

    माँ खोज रही थी सिरहाने,, जिस लाडले को,,
    अपने परिवार के चराग अपने वंशज को,,
    उसी दौरान गूंज उठी कुन कुन कर बिटिया,,,
    आह....... अनचाही बिटिया......
    तैयारी चल रही थी 26 जनवरी को भारत के आने की...
    उस दिन गोद में आगयी भारती बिटिया...
    आह अनचाही बिटिया.....
    गुड्डे ,,खिलौने सब मुन्ने के हिसाब के,,
    आगये थे कपड़े सब मुन्ने के नाप के,,
    बेटी के बाद अब तो ना आएगी दोबारा बिटिया...
    यहीं सोच कर जन्मी तो ना थी मासूम बिटिया...
    परिवार,, घऱ मोहोल्ले में खबर जा चुकी थी,,
    सब सांत्वना से ख़ुशी को ओढ़े थे,,
    अनचाही बिटिया यूँ धरती पर आ चुकी थी,,
    आधी बेहोशी में थी मेरी माँ,,
    विलाप करने लगी,,
    बेटी दे कर बेटा बदल लू कुछ ऐसा विचार करने लगी,,
    डर गयी सांस के मातम से,, योजना बेहिसाब करने लगी,,
    तभी डॉ ने जय माँ भारती की जय जय कार करी,,
    समझाया रुदन की पीणा को,,
    माँ ने अनचाही बेटी स्वीकार करी !!!....
    डर ,,डर कर बढ़ती गयी बेटी आज घऱ का गौरव है,,
    मेरी छोटी ही बहन है मेरे लिए वो मेरा गौरव है !!!..
    सादगी,, समझदारी,, करुणा की कोई मूरत है,,
    प्यारी,, छोटी,, लक्ष्मी वीरांगना जैसी सूरत है..
    लिखते लिखते आँखों में पानी आ गया...,,
    कहानी कुछ और लिखनी थी मैं ठहरा निक्कमा शायर..
    कहाँ से कहाँ आ गया...
    सोच समझ कर मैं लिखता कहां था,,
    जो दिल पर निकला.. वहीं कागज़ पर आ गया !!..

    ©happy81

  • hindinama 30w

    डॉ कुँअर बेचैन जी द्वारा लिखित कविता,
    माँ,
    वैसे तो माँ शब्द खुद में एक विशालतम साहित्य रखता है,
    माँ शब्द पर कुछ भी लिखना बहुत आसान बात नहीं है,
    फिर भी अनेकों प्रयास से, बहुत कवियों ने अच्छा अच्छा लिखा है,
    एक रचना यह भी) :

    आप सभी mirakee परिवार को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं


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    माँ!
    तुम्हारे सज़ल आँचल ने
    धूप से हमको बचाया है।
    चाँदनी का घर बनाया है।

    तुम अमृत की धार प्यासों को
    ज्योति-रेखा सूरदासों को
    संधि को आशीष की कविता
    अस्मिता, मन के समासों को

    माँ!
    तुम्हारे तरल दृगजल ने
    तीर्थ-जल का मान पाया है
    सो गए मन को जगाया है।

    तुम थके मन को अथक लोरी
    प्यार से मनुहार की चोरी
    नित्य ढुलकाती रहीं हम पर
    दूध की दो गागरें कोरी

    माँ!
    तुम्हारे प्रीति के पल ने
    आँसुओं को भी हँसाया है
    बोलना मन को सिखाया है।
    ~कुँअर बेचैन

  • hindinama 30w

    हमारी कम अपेक्षाएँ,
    मजबूती का साधन है।
    ©hindinama

  • hindinama 30w

    #Hindinama

    कुछ भी तो बेवजह नहीं होता ना?
    हम अनजान बने रहे, वो बात अलग है!

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    कुछ बेरुखी'यां तो मौसम की है,
    कुछ हमारे भी पाप शामिल है,
    प्रकृति ने भी हमे बद्दुआऐं दी है,
    पेड़ों पौधों के भी श्राप शामिल है।
    ©hindinama

  • hindinama 31w

    @_anshuman_ji जी की रचनाएं पढ़ें,

    हिन्दी लेखनी को बढावा दें,

    यह  मृत्यु  मात्र  विश्राम  सखे..)) ::
    बहुत अच्छी रचना की है अंशुमन जी ने,


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    इस  धरती  पर  यूं  आकर के,
    इस मनुज योनि को पाकर के,
    अपना   कर्तव्य  निभाकर  के,
    बस चलना  है  अविराम  सखे!
    यह  मृत्यु  मात्र  विश्राम  सखे..


    इस  मोह  पाश के  बंधन  से,
    इस  जनम मरण आबंधन से,
    अविराम  हृदय की धड़कन  से,
    करना   है  चिर  आराम  सखे!
    यह  मृत्यु  मात्र  विश्राम  सखे..


    यह  नयन  दीप बुझ जाएगा,
    जब   काल  बुलावा  लाएगा,
    उसको निज  गले लगाकर तब,
    जाना  होगा  पर - धाम  सखे!
    यह  मृत्यु  मात्र  विश्राम  सखे..


    यह  मृत्यु  मात्र  विश्राम  सखे..
    ~अंशुमन

  • hindinama 31w

    @sparkling_ जी की रचनाएं पढ़ें,

    बहुत ही सटीक एंव मार्मिक वर्णन किया है,
    संस्कृत भाषा वाकई में विलुप्त हो रहीं है!
    सायद यह रचना या इससे संबंधित और रचनाएं
    नयी पीढ़ी को याद दिलाए, कि यह एक सिर्फ भाषा
    न होकर, एक संस्कृति है, सभ्यता में संस्कारों की परिपूर्ण छवि है,


    सानिया जी आभार आपका) ::

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    मैं संस्कृत हूं

    अब कहां कोई अस्तित्व मेरा,
    कहां लोगों में वाह-वाही है,
    अब कहां मेरी बोली रही,
    कहां मेरी हल्की सी भी परछाईं है?

    तुम्हे जब नही आता था बोलना,
    तब से थी मैं इस जहां की,
    अब बदला जब से युग ये,
    तब से बताओ ज़रा,हूं मैं कहां की?

    मैं भाषा हूं,वही भाषा,
    जिसे लोग पसंद नही करते है,
    हां मैं संस्कृत हूं,
    जिसे लोग लिखने में भी डरते हैं।

    क्यों हो गई मैं लुप्त,
    इक नही वजह इसकी हज़ार हैं,
    खैर तुम्हे बता कर क्या करूं मैं,
    तुम्हारे सामने तो सब बेकार है।

    मैं भाषा पहली थी,
    पहली ही "गर्व" की निशानी,
    पर अब तो आखिरी भी नही हूं,
    क्यों हुई मेरे साथ इतनी बेईमानी?

    मैं,मैं तो हूं
    पर मेरी पहचान खो सी गई,
    अब बस परिक्षाओं में याद आती हूं मैं,
    क्यों ये नई पीढ़ी जागते ही सो सी गई?
    - सानिया

  • hindinama 31w

    #Hindinama
    संगीत सुनने से मन शांत होता है,

    स्वास्थ्य रहे, संगीत सुने,
    घर पर रहे, सुरक्षित रहे!

    वक़्त ही तो है, गूजर जाएगा!

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    मन के हारे हार है,
    मन के जीते जीत!
    ~~
    मन व्यथित हो जब,
    सुन लिया कर संगीत!
    ©hindinama