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  • hindipoetry 1w

    ─━⊱✿✿⊰━─

    क्या बेचकर खरीदे हम फुर्सत - ए - ज़िन्दगी

    सब कुछ तो "गिरवी" पड़ा है,जिम्मेदारी के बाज़ार मे..!!

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  • hindipoetry 1w

    ─━⊱✿✿⊰━─

    “तो कुछ इस तरह से आज़माइश हुई मेरी,

    कि तुझे छीन के सब्र सिखाया गया मुझे।”


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  • hindipoetry 1w

    ─━⊱✿✿⊰━─

    क्या ! मैं ही सदा उसका वफ़ादार रहूंगा..??

    क्या ! सिर्फ़ मेरे ही निवाले मै नमक था..???


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  • hindipoetry 1w

    ─━⊱✿✿⊰━─

    मिलेंगे एक रोज़ तसल्ली से हम दोनों..

    दरमियान से बस यह ज़िन्दगी गुज़र जाने दो।


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  • hindipoetry 1w

    ─━⊱✿✿⊰━─

    काफी करीब आके लोगों को दूर जाते देखा है..
    इसीलिए अब किसी की नजदीकी असर नही करती..!!

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  • hindipoetry 1w

    ─━⊱✿✿⊰━─

    जोर जबरदस्ती से चलता नहीं ताल्लुक किसी से...

    परिंदे को कभी...पिंजरे से मोहब्बत नहीं होती〽️

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  • hindipoetry 2w

    ─━⊱✿✿⊰━─

    कभी कभी उस दौर से भी गुजरना पड़ता है , जहां उम्मीदें टूटती नजर आती हैं, ख़्वाब बिखरते हुए लगते हैं और मौत जिंदगी से अच्छी लगने लगती है ,फिर भी जीना पड़ता है कभी अपनों के लिए तो कभी उस दौर की घुटन को महसूस करने के लिए...

    ना जाने क्यों?
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  • hindipoetry 2w

    ─━⊱✿✿⊰━─

    ह्रदय में पीर इतनी थी मैं चंदन गा नही पाया
    उमर बीती ग़रीबी में मैं तोहफ़ा ला नही पाया
    अधूरा प्यार मेरा है मेरा महबूब चंदा था
    ज़मीं तक वो नही आई गगन मैं जा नही पाया

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  • hindipoetry 2w

    ─━⊱✿✿⊰━─

    *उस ताल्लुक़ात को क्या कहोगे तुम,*

    *जो नही था कभी फिर भी निभाया है हमने।*

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  • hindipoetry 2w

    ─━⊱✿✿⊰━─

    *मजाक भी अब किससे किया जाए साहिब..!*

    *पुराने दोस्त भी अब इज्ज़त चाहते हैं..!*

    .... ❤️
    ©hindipoetry