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  • ishq_allahabadi 1d

    फ़राहम = उपलब्ध कराना
    #mirakee #ghazal #writersnote #hindinama #lekhni #urdupoetry #urdu #sadshairi #mirakeewriters

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    शेर/شعر

    دبا کر ہونٹھ میرا اس نے اپنے ہونٹھ سے اکثر،
    مجھے جنت کا ساماں کچھ فراہم یوں کیا اس نے۔

    दबाकर होंठ मेरा उसने अपने होंठ से अक्सर,
    मुझे जन्नत का सामां कुछ फ़राहम यूँ किया उसने ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 1d

    शेर/شعر

    جانے دل کو تلاش کس کی ہے،
    سانس چلتی ہے بے سکونی میں ۔

    जाने दिल को तलाश किसकी है,
    साँस चलती है बे सकूनी में ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 2w

    गज़ल

    मुझको तिरे वजूद से उल्फ़त नहीं रही,
    क़िस्सा है मुख़्तसर के मुहब्बत नहीं रही ।

    ख़ुद को निकाल लाया हूँ माज़ी की याद से,
    अब हाल में मुझे तिरि आदत नहीं रही ।

    बिगड़ा हूँ इस क़दर के शहर भर में अब मिरा,
    चर्चा है मुझमें वैसी शराफ़त नहीं रही ।

    अच्छा हुआ जो ख़त्म हुआ जो भी बीच था,
    अब रन्ज-ओ-ग़म की कोई अज़ीयत नहीं रही ।

    ख़ुद का हूँ अब मैं सर्द हुआ दिल का रास्ता,
    अब इश्क़ की कोई भी हरारत नहीं रही ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 2w

    शेर/شعر

    کوئی تو روۓگا اس حال پر مرے آکر،
    میں سوچ کر کے یہی روز روز مرتا ہوں

    कोई तो रोएगा इस हाल पर मिरे आकर,
    मैं सोच कर के यही रोज़ रोज़ मरता हूँ ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 3w

    पशेमान = शर्मिंदा होना

    #mirakee #ghazal #writersnote

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    वादा

    वादा वफ़ा-ओ-क़समें निभाने की बात पर,
    वो आज कुछ ज़रा सा परेशान हो गए ।

    क्योंकर ये चेहरा आपका ऐसे बदल गया
    क्यों तयोंरियों पे बल ये मिरी जान हो गए ।

    हमने तो दिल की बात कही आपसे मगर,
    हम ख़ुद ही कहके इसको पशेमान हो गए ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 3w

    कई क़िस्से पुराने हैं,
    कई गुज़रे ज़माने हैं,
    मिरे दिल की न पूछो तुम,
    कई सारे फ़साने हैं ।

    मिरी आवाज़ है तन्हा,
    लुटा के सब हूँ मैं बैठा,
    मिरे अब सिम्त देखो तो,
    है तपता रेत का सहरा ।

    हूँ बस उम्मीद पर क़ायम,
    अलम ये दिल का है दायम,
    मुहब्बत में जो शिद्दत हो,
    मुहब्बत फ़ातह-ए-आलम।

    मिरी यादों के दरिया में,
    समूम-ए-हिज्र सहरा में,
    बिना-ए-मौत क्या ही था,
    बचा कुछ क्या तमन्ना में ।

    सभी कुछ है यहाँ फ़ानी,
    लहू बनता है अब पानी,
    दहर में बाद धोके के,
    मुहब्बत क्यों ही हो सानी।

    इन अश्क़ों की रवानी में,
    मिरी उजड़ी कहानी में,
    सफ़र मेरा ही तन्हा था,
    वो कश्ती बादबानी में ।

    तसलसुल मेरी साँसों में,
    मशाकिल मेरी राहों में,
    तिरा ही ज़िक्र होता है,
    मिरी इन सर्द आहों में ।

    नज़ारे "इश्क़" क्या देखे,
    सितारे "इश्क़" क्या देखे,
    वीरानी सी मिरी रातें,
    ये रातें "इश्क़" क्या देखे

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    नज़्म

    एक कोशिश नज़्म की।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 4w

    शेर/شعر

    دل تو اسکا بھی نہ تھا مجھسے کہے جاتی ہوں،
    ہاۓ یہ شام مگر ظلم بڑا کرتی ہے -

    दिल तो उसका भी न था मुझसे कहे जाती हूँ,
    हाय ये शाम मगर ज़ुल्म बड़ा करती है ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 4w

    Thought

    When you start to love or like what others do means you have started being disloyal to your own uniqueness
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 4w

    ज़र्फ़ = हिम्मत ,हौसला
    यकसां = एक जैसा
    ता इख़तिताम = आख़िर तक

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    शेर/ شعر

    وہ بار بار مرے ظرف کو پرکھتا گیا،
    میں اس کو یکساں شروع سے تا اختتام ملا-

    वो बार बार मिरे ज़र्फ़ को परखता गया,
    मैं उसको यकसां शूरू से ता इख़तिताम मिला ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 4w

    शेर/شعر

    سادگی حسن کی اسکی نہ یہ پوچھو ہم سے،
    خود ہی حیرا ہے وہ زیور کی ضرورت کیا ہے-

    सादगी हुस्न की उसकी न ये पूछो हमसे,
    ख़ुद ही हीरा है वो ज़ेवर की ज़रूरत क्या है ।
    ©ishq_allahabadi