jayraj_singh_jhala

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7804904671 नक़्क़ालों से सावधान

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  • jayraj_singh_jhala 109w

    एक "मुक्तक"

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  • jayraj_singh_jhala 112w

    किसी के
    अंत:सागर में पनपती लहरों से
    लहलहा सकती है
    सम्पूर्ण प्रकृति की मुरझाई हुई फसलें
    किसी के
    तीक्ष्ण-उज्जलव-दिव्य चक्षुओं से
    जगमगा सकती है
    अंधकार मलिन सृष्टि की सभी दिशाएँ
    कोई तो
    संसार का कोना-कोना
    रंगों से भर सकता है
    अपनी रंगीन उँगलियों से
    कोई तो
    अनन्त विहंगम ब्रह्मांड की
    परिक्रमा कर सकता है
    अपने तीव्र गतिमान कदमों से
    लेकिन तभी बीच में आ जाते है बंधन
    बंधन असंगत रीतियों के
    बंधन अतार्किक तथ्यों के
    विषाक्त रूढ़िवादिताओं के
    शिथिल मानसिकताओं के
    परिणाम स्वरूप
    समाप्त हो जाती है तमाम संभावनाएँ
    और इंसान
    पुनः अग्रसर हो जाता है
    असाधारण से साधारण मानव की ओर
    ©झाला
    #jhala

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    "बंधन"
    { अनुशीर्षक में पढ़िए)

  • jayraj_singh_jhala 113w

    ज़ुल्म करते हुए वो शख़्स लरज़ता ही नहीं
    जैसे क़हहार के मअ'नी वो समझता ही नहीं
    ©शारिब मौरनवी

    एतिमाद / भरोसा
    साद / जाँच पड़ताल
    इनाद/ इनकार करना
    तज़ाद/विरोध करना
    इज्तिहाद/innovation, renewal
    संग-जाद/heartless
    इंइक़ाद/विमोचन,आयोजन

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    ग़ज़ल

    अगर किसी पे भी अब एतिमाद कीजिएगा
    अजीब दौर है ये पहले साद कीजिएगा

    नया तरीका चलन में है बे-वफाई का
    कि ज़िक्र कर वफ़ा का फिर इनाद कीजिएगा

    बदलता वक़्त भी क्या क्या दिखा रहा है हमें
    सिखाते हैं हमें वा'इज़ तज़ाद कीजिएगा

    नहीं गर आप में क़ुव्वत शिकस्त देने की
    हमारी हार के ख़ातिर मुराद कीजिएगा

    है ऐब-दारों का कहना गर ऐब ढाँकने हो
    ग़लत मगर नए तर्क़ इज्तिहाद कीजिएगा

    हर इक ने सीख लिया है जलील करना यहाँ
    अब आप अपना बदन संग-ज़ाद कीजिएगा

    किसी किताब में लिक्खा हुआ नहीं होगा
    ख़ुदा-ओ-राम के ख़ातिर जिहाद कीजिएगा

    सलाह दे रहे है अक़्लवाले चंद इंसान
    सुकून चाहिए गर तो फ़साद कीजिएगा

    निभा रहा है सदाक़त का साथ "झाला" भी
    ख़िलाफ़ उसके भी बज़्म इंइक़ाद कीजिएगा
    ©झाला

  • jayraj_singh_jhala 115w

    बड़े वसूक़ से दुनिया फ़रेब देती रही
    बड़े ख़ुलूस से हम ए'तिबार करते रहे
    ©शौकत वास्ती
    #jhala

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    रुबाई

    उम्मीदों का आसमान झूटा निकला
    "झाला" तेरा हम-ज़बान झूटा निकला
    मैं जिसको घरौंदा मान बैठा था वो
    मिट्टी का बना मकान झूटा निकला
    ©झाला

  • jayraj_singh_jhala 116w

    घबराओ मत दोस्तों ये app डिलीट कीजिए और
    गूगल से पुराना से पुराना मतलब 2018-19 का version
    Download कर लीजिए।
    हमें कोई नई सुविधाएँ नहीं चाहिए ��
    हो सके तो किसी भी माध्यम से{mention friend,repost या खुद कोई नया पोस्ट डालकर}जानकारी अधिक से अधिक share
    कर दें , ताकि लोग miraakee छोड़कर जाए नहीं


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    बधाई दे दो सब ��
    #jhala

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    ग़ज़ल

    ज़मीं से भूल के रिश्ता अब आसमान की ओर
    जो मौन थे अभी तक चल दिए ज़बान की ओर

    ये कह रहे है ये जो भी करेंगे जायज़ है
    मगर इशारा करेंगे ये संविधान की ओर

    मियाँ तुम्हारे इरादें मुझे पता है सब
    तभी नज़र लगा कर बैठा हूँ कमान की ओर

    किया ना-पाक हवाओं ने सब तबाह मगर
    बयाबाँ खींचता है तेग बागबान की ओर

    गुमान से कभी उठ के भी देख लेते आप
    किसी ग़रीब के ढहते हुए मकान की ओर

    बयान और किसी के मायने नहीं रखते
    सभी के कान गढ़े है मेरे बयान की ओर

    अभी समय नहीं मज़हब-परस्ती का "झाला"
    धियान दीजिए फ़िलहाल देश गान की ओर
    ©झाला

  • jayraj_singh_jhala 117w

    समस्त मिराकी परिवार को नव वर्ष एवं नव रात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं��

    साल की पहली ग़ज़ल देखिए
    _____________________________________
    यूज़ कीजिए सेनेटाइजर पहनिए मास्क
    घर में बैठिए और रोग-ए-अजीब से बचिए
    ©झाला
    _____________________________________
    मुहीब/dreadful, formidable
    दहर/दुनिया
    रक़ीब/प्रतिद्वंदी,दुश्मन
    हबीब/दोस्त
    ख़याबाँ/उद्यान
    अंदलीब/nightingale
    तबीब / डॉक्टर
    #jhala

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    ग़ज़ल

    वहशत-ओ-बेकली हाल-ए-मुहीब से बचिए
    इस से भी अच्छा है दहर-ए-अजीब से बचिए

    सूरतें कैसी ये दरपेश आ रही मेरे
    कह रहा ज़ेहन मेरा अब हबीब से बचिए

    उम्र सारी बे-क़रारी में ही गुज़ारिए फिर
    बागबाँ कह रहा है अंदलीब से बचिए

    इश्क़ रोग ऐसा कि दिल फ़ाख़्ता हो जाता है
    चाहता है यही फिर भी तबीब से बचिए

    हो न जाओ कहीं फिर से शिकार धोके का
    अब के यूँ कीजिए "झाला" नसीब से बचिए
    ©झाला

  • jayraj_singh_jhala 122w

    कुछ खेल नहीं है इश्क़ करना
    ये ज़िंदगी भर का रत-जगा है
    ©अहमद नदीम क़ासमी
    #jhala

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    वक़्त शायद इस भरम में यूँ ही कट जाएगा
    वो करीब आएगा और मुझसे लिपट जाएगा

    देखिए मेरी नज़र से इस जहाँ को इक बार
    कहकशाँ इक शख़्स में सारा सिमट जाएगा
    ©झाला

  • jayraj_singh_jhala 123w

    नज़र की मौत इक ताज़ा अलमिया
    और इतने में नज़ारा मर रहा है
    ©अब्दुल अहद साज़
    #jhala

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    ग़ज़ल

    दूर तक फैला है सहरा का नज़ारा
    ढूँढते है चश्म दर्या का नज़ारा

    किस तरह गुलदान पर नज़रें टिकी है
    देखिए शैतान हव्वा का नज़ारा

    ख़स्तगी में ही गुज़रता है हर इक दिन
    ख़्वाब में आता है फ़र्दा का नज़ारा

    है तहम्मुल कितना मेरा देखना है ?
    देखिए ज़ख़्म-ए-सुवैदा का नज़ारा

    मुश्किलात-ए-राह-ए-मंज़िल की बयानी
    दे रहा नक़्श-ए-कफ़-ए-पा का नज़ारा

    हाए! क़ातिल की शराफ़त का नज़ारा
    क़त्ल कर चेहरे पे तौबा का नज़ारा

    देख तुझको सारे अंधे हो गए हैं
    देख "झाला" अहल-ए-दुनिया का नज़ारा
    ©झाला

  • jayraj_singh_jhala 124w

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    आपको गर देखना हो सहरा का मंज़र
    झाँकिएगा मेरी आँखों के समंदर में
    ©झाला

  • jayraj_singh_jhala 126w

    कहाँ तक शैख़ को समझाइएगा
    बुरी आदत कभी जाती नहीं है
    ©बिस्मिल अज़ीमाबादी

    हबाब / bubble
    सराब / mirage, illusion
    ग़ुराब / arrogance
    सवाब / पुण्य
    इंतिसाब / dedication
    इर्तिक़ाब / पाप करना

    #jhala

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    ग़ज़ल

    फिर किसी रात के दिलकश शबाब में गिरकर
    रिन्द मारे गए सारे शराब में गिरकर

    रोज़ ही इक नए चेहरे के साथ आता है
    अस्ल सूरत भुला बैठा नक़ाब में गिरकर

    बह गए साथ में जो वक़्त के तक़ाज़े के
    हो गए क़ैद वो दरिया हबाब में गिरकर

    बस यही हो रहा है अब आफ़ताब घर घर के
    बुझ रहे नूर-ए-रुख-ए-माहताब में गिरकर

    था सफ़र प्यास का और थी तमन्ना पानी की
    ख़ाक होना ही था फिर तो सराब में गिरकर

    वक़्त को ज़ाया न करिए क़निश्त-ओ-क़ाबे में
    कुछ नहीं मिलना है "झाला" सवाब में गिरकर
    ©झाला