jigna___

अब कोई ड़र नहीं।

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  • jigna___ 49w

    कृष्ण लिंगभेद से परे,
    कृष्णत्व सर्वोच्च,
    मेरे हरि,
    गोपियों के स्वामी,
    हे मनुज,
    तू अपने करम देख,
    प्रथम योगी मेरे प्रभु,
    शिव शंभु के इष्ट देव,
    काम और प्रेम में,
    अंतर सूक्ष्म है,
    कान्हा ले प्रेम का भेख,
    नारी के वस्त्र,
    मन से उतरे वहीं,
    जहाँ मन नग्न वो करती,
    स्वयं के कर्म दिखे ना जिसे,
    बानी उसकी कान ना धर,
    मेरे हरि की गति अकल।
    ©jigna___

  • jigna___ 49w

    अधूरे ज्ञान से ज़्यादा घातक कुछ है ही नहीं,
    अधूरा घड़ा छलकता ज़्यादा है।
    शायद इसी को आसुरी वृत्ति कहते हैं।
    कथा का आकलन करना अपने अनुसार, कोई बड़ी बात नहीं, परंतु वो ही सत्य और तथ्य है यह मानना आसुरी वृत्ति है, ज्ञान ही अमृत और ज्ञान ही विष।



    ज्ञात होना और ज्ञान में होना,
    सूक्ष्म अंतर निहित तथ्यों में,
    कच्चे घड़े सा ज्ञान क्षणभंगुर,
    फूट जाएगा बीच भँवर में।

    ज्ञान दधि है और अमूल्य,
    बन जाता कभी विष तुल्य,
    मन का मंथन करना निरंतर,
    कच्चे घड़े सा ज्ञान क्षणभंगुर,
    फूट जाएगा बीच भँवर में।

    ज्ञान ही बनाता अभ्यंकर,
    परंतु गति रखना तू मंथर,
    ज्ञान विशाल गहरा समंदर,
    कच्चे घड़े सा ज्ञान क्षणभंगुर,
    फूट जाएगा बीच भँवर में।

    बुद्ध को जान बुद्धत्व पाने,
    अति का ना ममत्व पाले,
    गति कर स्थूल से सूक्ष्म की,
    कच्चे घड़े सा ज्ञान क्षणभंगुर,
    फूट जाएगा बीच भँवर में।

    योगी गिरता, ज्ञानी गिरता,
    बन भक्त सा परम समर्पित,
    अर्जुन,मीरा,गोपी,बन यशोदा,
    कच्चे घड़े सा ज्ञान क्षणभंगुर,
    फूट जाएगा बीच भँवर में।

    ज्ञात होना------------------------
    Jignaa
    ©jignaa___

  • jigna___ 49w

    वसंतोत्सव की शुभकामनाएं।

    हे माँ,
    विणा धारिणी, आसनस्थ पंकज मध्य,
    प्रतीक मयूर मन समान,माँ परम ज्ञान,
    ज्ञान रूपी संयम से मन नियंत्रित कर,
    माँ श्वेतांबरी, माँ ज्ञान प्रदायिनी,
    माँ सौम्या, माँ है परम मानुषी,
    हे माँ,
    माँ आशिष दे अपने शिशु को,
    करें ज्ञान प्राप्त तो वो यीशु हो,
    अहंकार युक्त ज्ञान छलना सा,
    प्रहलाद, ध्रुव और हनुमंत हो,
    माँ करुणामयी, माँ वर दायिनी,
    माँ कलाकार मैं शरण तेरे,
    माँ आशिष दो माँ आशिष दो,
    हे माँ।।
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    Jignaa
    ©jignaa___

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    ©jigna___

  • jigna___ 49w

    जब छोड़ा तो पता चला,
    मैंने "ही" पकडकर रखा था!

    Jignaa
    ©jigna___

  • jigna___ 49w

    212 212 212 212

    मोड़ दो भी कभी तुम कदम साथिया,
    चल पड़े बेख़बर है सितम साथिया।

    ख़्वाब के रोग की क्या दवा मिल सकें,
    कर सका जो हजम तो रहम साथिया।

    आज जो कह दिया वो सुना ही नहीं,
    कल कहेंगे अधूरा वहम साथिया।

    वो कलम क्या करें जो समझते नहीं,
    पालते जो ज़हन में भरम साथिया।

    कह रहें अजनबी क्यूँ हमें बोल दो,
    क्या दिखे वो तुम्हें भी करम साथिया।

    Jignaa
    ©jigna___

  • jigna___ 49w

    उन्हें लगता है हमें दिलचस्पी मशहूर होने में है,
    कैसे कहें मशहूरी की वजह उनके दूर होने में है।

    Jignaa
    ©jigna___

  • jigna___ 49w

    तेरा, मेरे पास होने या ना होने से,
    मेरा, तेरा होने में कोई फर्क नहीं,
    तेरे साथ की लौ जल रही भीतर,
    हिज्र का मौसम है पर सर्द नहीं।
    ©jigna___

  • jigna___ 49w

    Haiku chain

    मनोहर सी
    दृश्यावली निहित
    कुदरत के

    प्रत्येक रंग
    करता समाहित
    सुंदरता को

    मनभावन
    शांत एवं सौम्य सा
    भाव समाए

    परंतु कवि
    अनुभूति करते
    छिपे भावों की

    यह दृश्य है
    प्रतीक है सत्ता का
    ईश्वरीय जो

    समर्पित हो
    अद्भुत शक्ति को तू
    दिव्यता को भी

    प्रत्येक रंग
    उदाहरण होता
    विविधता का

    प्राप्त करना
    उस एकात्मता को
    जो छिपी होती

    सुंदर चित्र
    बनाना जीवन को
    संतुलन से।
    ©jigna___

  • jigna___ 49w

    When do you think
    our life
    becomes serene and picturesque?

    When we become
    a steady seer and a brave being
    life fills with vibrant colours.

    Jignaa
    ©jignaa___

  • jigna___ 49w

    वो कहता रहता है तन्हा है वो,
    मेरे दिल की कब्र पे बैठा है जो।
    ©jigna___