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  • keet_pro 17w

    एक ही मोड मैं खड़े दो अजनबी जिनकी पता और रिश्ता एक लेकिन रंगे अनेक... न खुलती है न ढलती है,.... शायद इनके रंगे हैं अजनबी.....
    ©keet_pro

  • keet_pro 28w

    Silencing my inner talks and silencing my inner peace I am silently listening to your inner being...
    Not waiting for my answers but waiting for the unfurnished talks which your eyes in silence left unfinished ...
    ©keet_pro

  • keet_pro 28w

    Ignoring the winter evening's she floats like a stringless kite between the book stalls in her lose fitted pyjamas ,adjusting her glasses, hushing to her messy falling hair and Pushing herself away from the assembled world.......
    And there she goes like warrior finding her copies in one hand and feeling her happiness in every single sip of hot steaming cofee on the other hand.........
    ©keet_pro

  • keet_pro 36w

    साथ होकर भी हाथ छोड़ने का डर क्यों बनी रहती है
    दिल की बातें क्यों दिल में ही रह जाती हैं....

    ©keet_pro

  • keet_pro 39w

    मद्धम सी हवा ओढ रही है एक नही लहर...
    दिल में उठी लहर गूंज रही है कानों पर.. फिर भी क्यों नैनों ने रोकी है उन बुदो कों........फिर भी क्यों नैनो ने रोकी है उन बुदो को....

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    ©keet_pro

  • keet_pro 41w

    The band on the ring finger

    ©keet_pro
    The wedding band on the ring finger looks prodigious and ravishing with herculean expectancy and subservient values embedded on it......
    The infallible band on ring finger gibe on frisky rhythm of my heart to beat slow with oders and illusory bliss....

  • keet_pro 42w

    खयालों से उनका हाल पूछूं या अपने हाल का पता भेजूं....

    ...
    ©keet_pro

  • keet_pro 77w

    पलके पूरी तरह से खुली नहीं थी और आंखों से नींद अभी भी तेहार रही थी.
    सूरज भी सुबह आलस भरी निगाहों से देख ही रही थी की एकदम सी बेपरवाह झिलमिलाती वह अ उतरी थी. मेरी खिड़की के पास मुझे दस्तक देने के लिए... उसके आते ही सूरज मुंह बनाकर मेघों के पीछे छुप गए थे और यह देखकर कलियां आपस मैं हंस रही थी... मैं एकदम उसे नजरअंदाज करके अपनी चादर खींच रही ही थी की खिड़की के बाहर से ठंडी ठंडी मोती जैसे पानी के छींटे चेहरे पर बरसा दी... उसकी इस मासूमियत देखकर हंसी पड़ी में और चुपचाप उठ कर छज्ज पर चल आई एक कप चाय के साथ और तब तक तो वह पूरी तरह से बरस पड़ी थी यहां पर, वहां पर
    बड़ी ही बेपरवाही और शरारतपण से....
    ©keet_pro

  • keet_pro 83w

    बिन मौसम बारिश!!!!!

    ©keet_pro

    ऐसा क्यों लगती है कि बिन मौसम बारिश और पुरानी यादों का बहुत गहरा ताल्लुक है!!!
    ना किसी से कुछ पूछती और ना किसी को कुछ बताती /
    जब भी आती है पुरानी यादों को फिर से ताजा करके चली जाती है/
    नखरे तो नूरजहां से भी कम नहीं इनकी !!!!लेकिन जब भी आती है यादों पर जान और चार चांद डाल ही लेती है /

  • keet_pro 92w

    ©keet_pro


    चांदनी रात से मुंह मोड़ लो या चांद से रूठ ही लो और तारों से दिल भरके तेरी शिकायतें करो ताकि
    कोयलिया तेरे खिड़की के बाहर पूरी रात बैठकर गाती रहे... और तुम्हें समझाए कि किसी घूमती फिरती भोली भाली सी बादल को कोई ऐसे सताते हैं क्या????