kermech21

#obstinate #optimistic #omnific thoda sa dil mera bura hai thoda bhala hai seene mein...

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  • kermech21 1w

    #878 #muntazir
    12.05.2022 23:10

    रंज ओ ग़म = दुःख, दर्द, शोक, पीड़ा
    चैन ओ सूकून = राहत, आराम
    अहद = युग, काल
    मजनू = प्रेमी (प्रतिकात्मक)
    संग = पत्थर
    साहिल = किनारा
    मुंतज़िर = राह देखने वाला

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    ग़ज़ल

    मिलते हैं और बिछड़ जाते हैं लोग
    फिर किस्सों में याद आते हैं लोग

    इश्क़ की बात कर रहे थे तुम मियां
    इतनी अफवाहें कहाँ से लाते हैं लोग

    किसी को दफनाकर रंज ओ ग़म में
    चैन ओ सूकून किस तरह पाते हैं लोग

    बात बस इतनी ही होती है इश्क़ में
    हर अहद मजनू पर संग उठाते हैं लोग

    कोई शख्स डूब गया वाँ इन्तिज़ार में
    याँ साहिल को मुंतज़िर बताते हैं लोग

    ©kermech21

  • kermech21 14w

    #877 #muntazir
    26.11.2021 (posted on 13.02.2022)

    शनाशाई = Relationship
    पजीराई = Acceptable
    लम्स = Touch
    फ़राज़ = High
    अना-दराज़ = Highest Ego

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    ग़ज़ल

    अजीब शख़्स था अजीब शनाशाई भी
    अलग थलग अकेला और पजीराई भी

    ख़ामोश लब लिए बैठा रहता है यूं ही
    बातें मगर करती है उसकी अंगड़ाई भी

    मैं न चाहते हुए भी डूबता चला गया
    उन आँखों में कशिश थी गहराई भी

    लम्स हल्का हल्का यूं फ़राज़ होता गया
    साँसें मिरी उसकी साँसों से टकराई भी

    मुंतज़िर यां इन्तिज़ार करता रहा मगर
    हुश्न अना-दराज़ था और हरजाई भी
    ©kermech21

  • kermech21 16w

    #876 #muntazir
    20.01.2022

    ग़म -ए- फ़ुर्क़त = Grief of Separation
    ख़ला = Emptiness
    आबला = Blister
    अना = Ego

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    ग़ज़ल

    ग़म -ए- फ़ुर्क़त बुरा है, बला है
    दूर तलक ख़ला ही ख़ला है

    रातभर धुंआँ धुंआँ सा रहा है
    वाँ शायद कोई ख़्वाब जला है

    आता नहीं है क्यों तू पास मिरे
    पाँवों में क्या तिरे आबला है

    और एक बार फिर से हुआ है
    तिरा हर वादा झूठा निकला है

    तू अपनी अना को रख लें मगर
    इंतज़ार मुंतजिर का फैसला है

    ©kermech21

  • kermech21 48w

    મળશે

    શોધી શોધીને જો ને હવે કોની ખબર મળશે
    તારાં જ ઘર માં ક્યાંક તને તારી કબર મળશે

    કરગરી લે કે પછી કર કોશિશ છીનવવા ની
    તારાં મરણ પછી જ તને સાચી કદર મળશે

    રણ બની ને જીવવું કંઈ આસાન નથી મિત્રો
    મારી અંદર તમને મૃગજળ ની અસર મળશે

    બધે બધું મેળવી લીધાં પછી હિસાબ કરજે
    જીવન ના ગણિત માં ચોક્કસ કસર મળશે

    શીખ્યો છું સફરમાં સતત ચાલતાં રહેવાનું
    કે "મુંતઝીર" ને ક્યારેક તો હમસફર મળશે

    ©kermech21

  • kermech21 50w

    #874 #muntazir 04.06.2021

    हिजाबों = veil
    सहरा = desert
    कैफियत = condition, situation
    सराबों = mirage
    मुंतजिर = the one who waits, pen name
    सान-ए-अज़ल = creator of eternity, God

    Just a Try...

    मुस-तफ़-इ-लुन(2212) मुसतफ़इलुन
    २२१२ २२१२ २२१२ २

    चेह/रा/ छु/पा/ लों/ तुम/ हि/जा/बों/ की/ तो/ मा/नो/
    तुम/सा/ न/हीं/ को/ई/ गु/ला/बों/ की/ तो/ मा/नो/

    को/ई/ ब/ता/एं/ क्या/ सह/रा/ की/ कै/फि/यत/ को/
    उस/ने/ न/हीं/ कहा/ पर/ स/रा/बों/ की/ तो/ मा/नो/

    आँ/खें/ न/शी/ली/ तुम/ लि/ए/ फिर/ती/ हो/ याँ/ क्यों/
    मे/री/ न/ मा/नो/ पर/ श/रा/बों/ की/ तो/ मा/नो/

    ये/ बा/त/ सच/ है/ इश्/क़/ धो/खा/ है/ स/ही/ है/
    मैं/ दिल/ज/ला/ हूं/ गर/ कि/ता/बों/ की/ तो/ मा/नो/

    सौ/ सौ/ स/दि/यों/ से/ ति/रा/ ही/ मुं/त/जिर/ हूं/
    सा/न-ए/-अ/ज़ल/ के/ इन/ हि/सा/बों/ की/ तो/ मा/नो/

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    ग़ज़ल

    चेहरा छुपा लों तुम हिजाबों की तो मानो
    तुमसा नहीं कोई गुलाबों की तो मानो

    कोई बताएं क्या सहरा की कैफियत को
    उसने नहीं कहा पर सराबों की तो मानो

    आँखें नशीली तुम लिए फिरती हो याँ क्यों
    मेरी न मानो पर शराबों की तो मानो

    ये बात सच है इश्क़ धोखा है सही है
    मैं दिलजला हूं गर किताबों की तो मानो

    सौ सौ सदियों से तिरा ही मुंतजिर हूं
    सान-ए-अज़ल के इन हिसाबों की तो मानो

    ©kermech21

  • kermech21 51w

    #873 #muntazir ��

    मिसरा-ए-उला = first line of ghazal
    मिसरा-ऐ-सानी = second line of ghazal
    जाम = reply of wine
    सागर = cup of wine
    हर्फ दर हर्फ = word by word
    सरापा = from head to leg
    रफ़्ता रफ़्ता = slowly slowly
    सू-ए-अज़ल = towards eternity
    लाफ़ानी = immortal
    बाद-ए-सबा = breeze of morning
    काफ़िया = rhythmic word of ghazal
    मध्धम = moderate
    बादबानी = sail or related to that, a kind of wave
    रदीफ = the word which repeated in every line of ghazal
    पेच-ओ-ख़म = difficulties
    रवानी = speed
    मुंतज़िर = the one who waits, pen name
    मुक़म्मिल = to make complete
    मक़्ता = last couplet of ghazal
    बोसा = kiss
    इशरत-ए-फ़ानी = mortal pleasure

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    ग़ज़ल

    आँखें मिसरा-ए-उला है और होंठ मिसरा-ए-सानी है
    जाम नहीं सागर भी नहीं एक ग़ज़ल उसकी जवानी है

    हर्फ दर हर्फ सरापा पढ़ रहा हूँ उसे मैं यूं रफ़्ता रफ़्ता
    सू-ए-अज़ल है जैसे ये सफर और बंदा भी लाफ़ानी है

    बाद-ए-सबा महक रही है खूब काफ़िया बना हो जैसे
    साँसों से उनकी टकराकर मध्धम बिखरी बादबानी है

    खुली झुल्फों को बांध लो ग़ज़ल की रदीफ की तरह
    पेच-ओ-ख़म न हो ग़र तो हाथों में बढ़ जाती रवानी है

    "मुंतज़िर" हूँ कबसे मुक़म्मिल कर ही दूं तुझे ए ग़ज़ल
    मक़्ता है पाँव तिरे और मिरा बोसा इशरत-ए-फ़ानी है
    ©kermech21

  • kermech21 51w

    #872 #muntazir ��
    28.05.2021

    हुश्न-ए-खास = one with special beauty
    शबाबों = youth (here beauty)
    रौनक-ए-गुलज़ार = proud of garden
    तसव्वुर = imagination
    खयालात = thought
    लफ़्ज़-गरी = creation of word
    इन्तिज़ार = wait
    मुंतज़िर = the one who waits (pen name)
    हिजाबों = veil

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    ग़ज़ल

    हुश्न-ए-खास हो तुम जो शबाबों में नहीं है
    रौनक-ए-गुलज़ार हो जो गुलाबों में नहीं है

    तसव्वुर करूं मैं क्या, क्या खयालात करूं
    तिरे जलवों का बयां तो ख़्वाबों में नहीं है

    एक बार डूबा था मैं उन मस्त निगाहों में
    लज्जत-ए- जिंदगी वो शराबों में नहीं है

    तारीफ़-ए-यार में लिखूं तो लिखूं भी क्या
    लफ़्ज़-गरी मगर कोई किताबों में नहीं है

    इन्तिज़ार मुंतज़िर का यूं खत्म हुआ जैसे
    वो आएं हैं आज और हिजाबों में नहीं है

    ©kermech21

  • kermech21 89w

    હવે...

    હદથી પણ વધારે આગળ વિસ્તરી જવું છે હવે
    દરિયો છું તો પણ નદીને જઈ મળી જવું છે હવે

    હમણાં વરસી જશે તું વાદળ બનીને મુજ પર
    હું પણ તો તપ્યો છું ખૂબ કે પલળી જવું છે હવે

    અમસ્તાંજ એમ થોડી હવા કહી દીધી હતી તને
    પાલવ પકડીને તારો મારે પણ વહી જવું છે હવે

    વાત તો એ પણ સાચી કે મારાં માં હું નથી હવે
    આ આયખું આખું તારા માં રહી જવું છે હવે

    બની ગયો "મુંતઝીર" ક્યારે રાહ જોતાં જોતાં
    નહીં મળે જો તું તો અહીં જ મરી જવું છે હવે

    ©kermech21

  • kermech21 90w

    #870 #muntazir
    29.08.2020 21.55

    ब-जाहिर = disclose to all
    कू- ए -यार = street of beloved
    बाद- ए -सब़ा = morning breeze
    मुख़्तलिफ़ = different
    मुंतज़िर = the one who waits (pet name)

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    बात

    बात उस बात की है जो मैंने कभी कही ही नहीं
    बात उस बात की है जो तूने कभी सुनी ही नहीं

    बात तो बात थी ब-जाहिर तो होनी ही थी मगर
    अफसोस कि बयां होते होते हमारी रही ही नहीं

    कू- ए -यार से चली फिर शहर शहर गली गली
    बाद- ए -सब़ा बन उडी यहाँ वहाँ रुकी ही नहीं

    मुख़्तलिफ़ थी शायद पर बेमतलब तो नहीं थी
    फिर भी जमाने ने कभी मिरी बात सुनी ही नहीं

    कहीं वो भी न बैठ जाए साथ "मुंतज़िर" के यहीं
    यही सोच हमनें कभी अपनी बात कही ही नहीं

    ©kermech21

  • kermech21 90w

    એમાં શું?

    તું આમ જો મને મળી પણ જાય તો એમાં શું?
    દિવસ પછી રાત ઢળી પણ જાય તો એમાં શું?

    જીંદગી વિતી ગઈ છે અહીં મૃગજળની શોધમાં,
    બીજું એક રણ છળી પણ જાય તો એમાં શું?

    આખરી નિશાની સમો તેના પત્ર હતો હાથમાં,
    મારી જ આગમાં તે બળી પણ જાય તો એમાં શું?

    હું અંધારું ઓઢીને બેઠો છું તને શું ખબર મિત્ર,
    આ રાત મને હવે ગળી પણ જાય તો એમાં શું?

    ચાલાકીની તો તેને પહેલેથી જ આવડત હતી,
    થોડી મક્કારી જો ભળી પણ જાય તો એમાં શું?

    મુકદ્દર "મુંતઝીર"નું રાહ જોવા સિવાય બીજું શું?
    મંઝિલે આવી રસ્તા વળી પણ જાય તો એમાં શું?

    ©kermech21