krishn_ratii

शब्दों से सजी हुई है धरा

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  • krishn_ratii 29w

    रोशनी

    जगमग नये सवेरे सी
    आती है जो फेरे सी
    जिसके बाद ना रहता अंध
    गगन को जो घेरे सी
    एक दीप या हों सौ दीप
    सब दीपों में है सम सी
    हदय मध्य स्थान है जिसका
    रोशनी वो है सवेरे सी।।
    ©krishn_ratii

  • krishn_ratii 44w

    भ्रम

    छद्म आवरण ओड़े सत्यता का,
    व्यर्थ का ही दुःख बनाऐ,
    जान ना पाऐ सत्यता को,
    एक पंछी बिन पिजड़े ही फड़फडाऐ,
    लय करे विलय करे पर,
    मार्ग पथ से भटक जाऐ,
    ज्ञान दीप प्रकाश बिन,
    चौरासी के चक्र को घुमाऐ।।
    ©krishn_ratii

  • krishn_ratii 47w

    कर कंज से थामती हो जिसको ,उस वृक्ष कदम्ब का मूल बना दे।
    पद पकंज तेरे छुऐंगे कभी, बृजरानी हमें बृज धूल बना दे।।
    #mirakee

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    दिन हो या रात हो नाम तेरा मेरे साथ हो
    चंचल मन की रति गति तुम
    श्री राधे कृष्ण प्रेम में,
    तुम ही तो विश्वास हो।।
    ©krishn_ratii

  • krishn_ratii 48w

    कृष्ण से सुंदर कृष्ण से प्यारा,
    नहीं है दूजा सखा सहारा,
    प्रीत से रीझे अंह से खीजे,
    भवसिंध में बने खेवनहारा,
    लहर लहर जब कश्ती डोले,
    बन मांझी दिखलाऐ किनारा।।
    ©krishn_ratii

  • krishn_ratii 49w

    शब्दों की श्रृंखला,
    एक रोज़ बेअसर होगी,
    स्याही को भी खुद में,
    सिमटने की जद्दोजहद होगी
    पर चलेगी फिर भी,
    कविताओं की रफ्तार
    आज मेरी कलम तो,
    कल तेरी कलम मे धार होगी।।
    ©krishn_ratii

  • krishn_ratii 50w

    बंसी

    हर छंद है जिसके छिद्रों में
    कृष्ण अधर पर साजे जो
    प्रीत की महिमा में लिपटी
    सकल धरा पर गूंजे जो
    कृष्ण की महिमा कृष्ण का गान
    निशदिन करती रहती जो
    दिखती है बनी हुई बांस से
    पर प्राण फूंक से बजती जो
    राधे राधे रटती रहती
    चित्त आलौकित करती जो
    अधर पे बैठी श्याम जू के
    प्यारी बंसी बाजे यूं
    साज नया नित्य छेड़ती
    श्याम के मन को भाती वो।
    Jsk
    ©krishn_ratii

  • krishn_ratii 50w

    राधे

    मनमोहन की प्राणप्रिया तुम,
    महाशक्ति श्रृंगार क्रिया तुम,
    प्रेमरस का उद्गम स्थान,
    जय राधे जय राधे श्याम।।
    Jsk
    ©krishn_ratii

  • krishn_ratii 50w

    प्रेम का अर्थ तेरे चरणों का चिरकाल आश्रय
    सतत और अंनतकाल तक तेरा ही स्मरण
    जिसमें धूमिल हो जाऐं अनंत यातनाएं
    देह के परित्याग की पीड़ा
    पुनः देह धारण का कष्ट
    और स्मस्त निर्मम इच्छाऐ़
    शेष और विशेष जिसमें कुछ ना हो
    जीवित हो तो मात्र तेरे रुप की माधुरी का ऐश्वर्य
    जिसमें बहता है सतत प्रेम का झरना
    जो तृप्त करता है विकल होती अनेक इच्छाओं को
    और विलीन कर लेता है स्वयं में आनादिकाल के लिऐ

    JSK❤️
    ©krishn_ratii

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    प्रेम

    प्रेम का अर्थ तेरे चरणों का चिरकाल आश्रय
    सतत और अंनतकाल तक तेरा ही स्मरण
    जिसमें धूमिल हो जाऐं अनंत यातनाएं
    देह के परित्याग की पीड़ा
    पुनः देह धारण का कष्ट
    और स्मस्त निर्मम इच्छाऐ़
    शेष और विशेष जिसमें कुछ ना हो
    जीवित हो तो मात्र तेरे रुप की माधुरी का ऐश्वर्य
    जिसमें बहता है सतत प्रेम का झरना
    जो तृप्त करता है विकल होती अनेक इच्छाओं को
    और विलीन कर लेता है स्वयं में आनादिकाल के लिऐ

    JSK❤️
    ©krishn_ratii

  • krishn_ratii 50w

    नंद किशोर

    मन दर्पण पर एक छटा निराली,
    छाया उसकी काली काली,
    कर साजे मुरली मतवाली,
    रखता बाहर भीतर की ठौर,
    नाम है उसका नंद किशोर।।
    ©krishn_ratii

  • krishn_ratii 60w

    धुव्र तारा

    ऊर्जा का छोर जिसमें
    शांति का शोर जिसमें
    अटल अपने पथ पर जो
    तपस्या का ओज जिसमें
    लक्ष्य जिसका एक निश्चित
    नहीं दिशाओं की भीड़ जिसमें
    रात्रि का निखार है जो
    आकाश की उपमा है जिसमें
    धुव्र है वो समय की सीमा ना जिसमें।
    ©krishn_ratii