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Reposts
  • kumardeependra 3d

    हां बैठे है अकेले ही,
    खुद से बातें करते करते सोच रहे है,
    की मिले एक रोज,
    एक खूबसूरत ढलती शाम,
    तुम,मैं और हम ❤️
    ©kumardeependra

  • kumardeependra 4d

    तुम्हारे हिस्से के वक्त का मत पूछो मुझसे,
    मैं अभी भी संभाल कर रखता हूं उसे ❤️
    ©kumardeependra

  • kumardeependra 1w

    By unknown writer

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    कहां से लाऊं सुबूत की तुम्हे कितना चाहता हूं,
    "दिल" "दिमाग" "नजर" सब तुम्हारी कैद में ही तो है।

  • kumardeependra 1w

    आशिकी लिखे या दीवानगी लिखें..
    या अपनी खामोशी लिखें..
    दिल के जज़्बात अब अल्फाज़ नही बनते,
    आखिर लिखे तो अब क्या लिखें?

  • kumardeependra 1w

    सारी सुध बुध खो दी है मैने,
    मुझे नींद से जगाओगे क्या..
    हां प्यार में हूं मैं,
    मुझे गले से लगाओगे क्या..
    कितना बेचैन करती हो,
    आज ख्वाब में आओगे क्या,
    हां कुछ सोच रहा था मैं,
    नजर से नजर मिलाओगे क्या..
    तुम्हारे साथ जीने की ख्वाहिश है,
    अपना भी सर हां में हिलाओगे क्या।
    ©kumardeependra

  • kumardeependra 2w

    इत्र से खुद को महकाना बड़ी बात नहीं,
    मुझे तलब तो तेरे "बदन" की खुशबू की है।
    ©kumardeependra

  • kumardeependra 2w

    बोला था पहनूंगी कुर्ती सफेद रंग की,
    भला ये खबर इन बादलों को किसने दी
    ©kumardeependra

  • kumardeependra 2w

    हम तो कर लेंगे सब्र,
    पर इन ख्वाबों को कौन समझाएगा
    ©kumardeependra

  • kumardeependra 2w

    इन ख्वाबों को हकीकत बना दो,
    अब तेरी यादों में जीना मुश्किल सा लगता है।
    ©kumardeependra

  • kumardeependra 2w

    रात में चांद के दरमियां
    मैं सपनों में तुझसे बातें करता हूं,
    बस तेरी इठलाती हसीं को
    एकटक देखता रहता हूं,
    एक ही डर रहता है हमेशा
    कही ये रात खत्म ना हो जाए,
    कहीं ख्वाबों का ये आईना टूट न जाए,
    और ये सपने सपने बनकर ही न रह जाए।
    ©kumardeependra