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  • loveneetm 1d

    पीड़

    रार करें सब गोप कृष्ण से,
    क्यूँ ऐसा मतभेद,
    प्रेम करें गर गोप जगत,
    तो जग को होता खेद।

    सब ग्वालन तोहे घेर बांध कर,
    करें प्रेम की बात,
    और हम ग्वाले मन प्रेम छिपा,
    कुछ कह ना पाएँ बात ।

    कहें कृष्ण तू रार ना कर,
    मै भेद ना करूँ विचार,
    गोप गोपियां दोनो मेंरे,
    सब संग मुझको प्यार
    ©loveneetm

  • loveneetm 2d

    घर्षण

    जब हृदय गति प्रेमी मन का,
    एक दूजे को ले संग चले,
    तब नियम बनाकर यह दुनिया,
    विपरीत दिशा अवरोध करे।

    यह रोके तन मन बल देकर,
    हर मोड़ पे भीषण द्वंद करे,
    पर प्रेमी मन साहस रखकर,
    घर्षण बल का प्रतिरोध करे।

    कुछ घर्षण जग नियमित चालू,
    कुछ स्थायी जग अवरोध करे,
    हो चाहे भिन्न भिन्न फिर भी,
    यह केवल प्रेम विरोध करे।

    इस कारण प्रेमी संयम रख,
    एक साथ चले इस दुनिया मे,
    जग लाख लगा दे पाबंदी,
    पर प्रेमी सदा विरोध करे।
    @लवनीत

  • loveneetm 2d

    संभव

    सब संभव मन साहस कर,
    मत हो तनिक हताश,
    हर दिन हर पल नव नवीनतम,
    रखों हरि पर आस।

    रोग शोक तन की पीड़ा,
    सबका जग उपचार,
    मन उत्साह आनंद रहें तो,
    मिलें जगत का प्यार।

    अपना भाग्य जग स्वयं लिखो,
    मन रख शुद्ध विचार,
    जीवन सुखद सरल बनें,
    सरल बनें व्यवहार।

    अपनों का आशिष रहे,
    रहें ईश पर आस,
    सब संभव मन साहस कर,
    मत हो तनिक हताश।
    @लवनीत

  • loveneetm 2d

    चार धाम

    चार धाम की इच्छा मन मे,
    लिए चला ब्रज धाम,
    वृंदावन ही सार जगत का,
    सत्य हरि का नाम।

    यहीं पुरी के जगन्नाथ है,
    यहीं द्वारिकाधिश,
    यहीं बसे बद्री विशाल संग,
    रामेश्वरम जगदीश।

    अति प्रिय यह नगर हरि को,
    वृंदावन वैकुण्ठ,
    यहीं कृष्ण का प्रेम समर्पण,
    यहीं आदि और अंत।

    इस कारण मन भज गोविंदम,
    भज राधा नित नाम,
    उनकी सेवा से ही मानव,
    पूर्ण हो सारे काम।
    @लवनीत

  • loveneetm 3d

    गुरुत्वाकर्षण

    ब्रह्मांड का अपना अलग नियम,
    जो दो वस्तु को जोड़े है,
    गर हृदय हो उसके प्रेम छिपा,
    वो शक्ति गुरुत्वाकर्षण है।

    प्रेमी मन तो बस दिल देखे,
    उसका आकर्षण प्रेम सदा,
    जो होते मोहित काया पर,
    वो केवल एक आकर्षण है।

    इच्छा शक्ति का बल उनमे,
    प्राथमिकता है एक दूजे की,
    कि हृदय हो जिसमे प्रेम भरा,
    वो भाव ही आत्म समर्पण है।

    हर भौतिक सुख नश्वर जग मे,
    बस भाव हृदय का सत्य यहाँ,
    सुख दुख दोनो सुख से बीते,
    गर पूर्ण भाव समर्थन है।
    @लवनीत

  • loveneetm 4d

    प्रेम संश्लेषण

    तुम उर्जा शक्ति सूरज की,
    मै वटवृक्ष की भांति हूँ,
    मेरे भीतर की शक्ति का,
    तुम एक मात्र ही स्रोत प्रिय,
    तेरी किरणे मन की लहरे,
    जो जोड़े मन के भाव सदा,
    समावेश उन दोनो का,
    मन शुद्ध करे हर भाव प्रिय,
    अंतर्मन की प्राण वायु,
    जो भीतर बाहर शुद्ध करे,
    भीतर भरकर वो भाव सरल,
    मन को हरषाए रोज प्रिय,
    यह जीवन का संश्लेषण है,
    जो सृष्टि पर आधारित है,
    यह प्रकाश रूपी संश्लेषण,
    जीवन को भाए रोज प्रिय,
    तुम उर्जा शक्ति सूरज की,
    मै वटवृक्ष की भांति हूँ,
    मेरे भीतर की शक्ति का,
    तुम एक मात्र ही स्रोत प्रिय।
    @लवनीत

  • loveneetm 4d

    फसाना

    बात करतें हो तुम रोज मोहब्बत वाली,
    सच कहों क्या यह दिल सच में हमे चाहता है।

    या फसाना है कोई गुजरे वक्त की तरह हमदम,
    जिन्हे ख्यालो मे है बस रहना आता।
    @लवनीत

  • loveneetm 4d

    तेरे पास ना सही,तेरे दिल में हमीं रहते है,
    याद करते है तुम्हे,मोहब्बत भी तुम्हे करतें है।
    @लवनीत

  • loveneetm 4d

    तू हमें गैर और ओरो को अपना कहता है,
    भूल बैठा है की तन्हाई में साथ थे दोनों।
    ©loveneetm

  • loveneetm 4d

    प्रेम तरंग

    पाषाण हृदय जग का प्रियतम,
    ना समझे प्रेम तरंगो को,
    जितनी भी उर्जा से बोलो,
    यह टकराकर लौट आती है,
    ना तनिक दया ना परिवर्तन,
    ना लेंष मात्र की मानवता,
    इस अपरिवर्तित प्रेम तरंगो को,
    फिर से मन हृदय समाती है,
    दोषारोपण किसके माथे,
    सब मुक बधिर जमाने मे,
    कोई लाख मनाए फिर भी यह,
    दूरी खुद उचित बनाती है,
    ना समझी की लाँगी सीमा,
    कुछ का कुछ अर्थ बताते है,
    हृदय तरंगो से टकरा,
    यह दिशाहीन हो जाती है,
    अपवर्तन की यह परिक्रिया,
    निजी जीवन का प्रारूप है,
    पाषाण हृदय जग का प्रियतम,
    यह क्रिया रोज दोहराती है।
    @लवनीत