lovetangledsoul

Manu vishwakarma Dreamer�� I write what I've experienced and what I feel and think!��

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  • lovetangledsoul 64w

    I wish to be a child again....
    When I was been worshipped as a form of the goddess(9 devi) by folk around us. As in our Hindu culture, a girl child is being marked as a symbol of pure basic creative force.
    I wish to move back to those days when we used to roam in our streets in search of those houses where Devi pooja is being done and after that, some refreshments along with gifts we used to get...
    I still remember those gushing days when we had delightful gestures by old folk..
    Those days when ritualistic worshipping ish spiritual emotions is being done with our small feet by applying rose Bengal(mahawar or Alta) and a tilak of sandalwood paste on our forehead .
    I miss those days when on a banana leaf, we use to have a delicious meal with food items that are the favourite of the goddess( according to Hindu philosophy) kheer( a sweet made up of milk and rice) and poori( a type of fried Indian bread)
    And the most awaited one part...when old folk bestow us astonishing gifts like new clothes and accessories, toys, edible items like chocolates and fruits...
    The collection of bucks we used to have...!! Oh, heavenly...! I badly miss those days...!!
    -manu
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  • lovetangledsoul 64w

    Ye ankhe hain janab.!
    inhe padh ke toh dekho...!
    .
    Reh kar bhi khamosh aur gumsum,
    keh di the usne apne man ke baat,
    Lafzon se nhi par haan,
    ankhon se zaroor us raat..!!
    Ankhein! Ek gehra samandar,
    jiske gehrayi me bhot kch chipa hai..
    Dubi hui kashtiyon se leke
    tairte hue kashtiyan v hain,
    ek baar gehrayi ko
    mehsus kr ke toh dekho...!!
    Ye aankhein hain janab...
    inhe padh ke toh dekho...
    .
    Kitabon ka pustkalaya hai iske bheetar ,
    har panne ko palat kr toh dekho..!
    Bhot kuch keh jate hain inke shabdon ke teer,
    us teer ko apne nishane me lgne toh do...
    Ye ankhein hain janab..
    inhe padh kar toh dekho..
    .
    Saat rang bhi isme mil jayenge,
    khoye hue pal, beetein yadein bhi mil jayenge,
    aansu ke jharne me bhi
    Bhot sare sach dikh jayenge,
    ek baar bas ek baar
    isme jhank ke toh dekho...
    Ye aankhein hain janab..
    inhe padh kar toh dekho....
    .
    Wo barsatein, wo yadein,
    wo hawayein, wo badal, wo ehsas,
    wo dard ko mehsus kr ke toh dekho...!!
    Us tez ko, us chamak ko, us khushi ko,
    us sacchayi ko pdh kr toh dekho...
    Ye ankhein hain janab...
    inhe padh kar toh dekho...
    .

    Likhe jaaskti hain isme anginat kitabein,
    ek baar inhe padh kar toh dekho..
    Palko ke chaun ke neeche bethe,
    in ankhon ka haal bhi jaan lo...
    Un pani ke boondon ke thandak ka
    ehasaas ek baar mehsus krke toh dekho..
    Un kaale gheron ko jinhone
    in ankho ko gher ke rakha hai..
    unhe mita kar toh dekho.
    Ye ankhein hai janab..!
    Inhe padh kar toh dekho..!
    ~manu
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    Ankhein

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  • lovetangledsoul 64w

    उसने तो ये भी बताया कि कल उसका जन्मदिन हैं, और उसके माँ घर मे केक बनाएंगे , साथ मे नमकीन, बिस्कुट भी उसे खाने को मिलेगा, वो बहोत उत्साहित थी अपने जन्मदिन को लेके। फिर उसने एक बार और मुझसे फ़ोन मांगा , मैंने फिर माना कर दिया, तो वो चिढ़कर चली गई और पास बैठे दम्पत्ति के पास जाके भी कार्टून देखने के ज़िद करने लगी। थोड़ी देर बाद वह फिर वापस लौट के आई और बगल में मेरे फिर से बैठ गई ,अपने हाथ मे एक पेन के साथ, जो शायद उन्ही दम्पत्ति ने उसे दिया था। फिर मुझसे पूछने लगी कि "दीदी मुझे भी बहुत सारे पैसे कमाने है, ताकि मैं एक बड़ा सा टी.वी. ले सकूँ और जीभरकर कार्टून देख सकू" , उसके ये बात सुनकर मेरे चेहरे में मुस्कान आ गई! तभी उसने एक और सवाल किया "कि हम पैसे कैसे कमाते हैं?" मैंने कहा पढ़ाई और मेहनत करके आप बहोत पैसे कमा सकते हो, तभी उसके हाथ मे पेन देखकर एक ख्याल आया और उससे मैंने कहा "आपको पढ़ना है।?" वो बहोत खुश हो गई और तैयार होगई। फिर उसे अंग्रेज़ी वर्णमाला बनाना सिखाया, मैं ज़मीन पे पत्थर से अक्षर बनाती जा रही थी, वो अपनी कलम से अपने हाथों में नकल उतरती जा रही थी। मात्र पंद्रह से बीस मिनट में उसने सारे अक्षर बनाने सीख लिए, बड़ी ही होनहार बच्ची थी वो। जब उसके पूरे हाथ अक्षरों से भर गए तब बड़ी प्रसन्नता से चली गई।
    उसके साथ बीती हुई वार्तालाप से एक अलग अनुभव मिला। एक छोटी सी बच्ची जो पढ़लिखकर आगे बढ़ना चाहती हैं, उसे उसके हालात, दरिद्रता और गरीब एवं असमर्थ माँ बाप आगे बढ़ने से रोक लेते हैं। एक तरफ हम जैसे लोग जो मन कि शांति के लिए नदी किनारे जाते हैं, और एक तरफ ये गरीब मासूम बच्चे, जो अपनी ज़िंदगी का गुज़ारा करने के लिए अपने बचपन को छोड़ , इसी नदी तटों में काम करते हैं, कुछ तो भीख भी मांगते हैं! सच में नदी के दो किनारे एक दूसरे से बेहद ही अलग होते हैं
    - मनु
    ~manu
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    नदी के 2 किनारे

    Part 2
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  • lovetangledsoul 64w

    नदी, पावन उदगम से निकलर सभी जीवों को जीवन प्रदान करने वाली माँ। जो प्रभात की उषाकिरण से लेकर रात की चांदनी में भी आगे बढ़ते रहने के प्रेरणा देती हैं। जब भी कभी तनावपूर्ण दिन बीतता है, तब इसी नदी के तटों पर जाके बैठने मात्र से शान्ति का अनुभव मिलता हैं। बात कुछ महीने पहले की हैं, परीक्षाएं चल रही थीं, तनाव होना तो स्वाभाविक था। इसे के चलते घर लौटने से पहले नदी के तट पे शांति का अनुभव करने के लिए बैठने का निर्णय लिया। घाट के ऊपर वाले सीढ़ियों के किनारे गाड़ी पार्क करी, और नीचे जाकर पेड़ के छांव के नीचे वाली सीढ़ियों में जाकी बैठ गई और नदी तो निहारने लगी औऱ सोचने लगी कि "कितना कठिन होता है ना एक नदी होना? लोगो कि प्यास बुझाना , उनके काम आना, अनेक प्राणियों को जीवन देना, सभी चट्टाने, खतरनाक मोड़ से होकर गुजरना और साथ में लोगो के द्वारा विसर्जित की हुई गंदगी को किनारे छोड़ कर आगे बढ़ते चलना।" यही बातें विचार कर रही थी कि तभी करीब 7-8 वर्ष की एक छोटी सी लड़की आई, भद्दा सा पहनावा, बाल बिखरे हुए पर मासूमियत से परिपूर्ण चेहरा, आंखों में तेज चमकन। पहले ये प्रतीत हुआ कि यह बच्ची भीख मांगने आई हैं, पर तभी उसने बड़ी मासूमियत से कहा " दीदी आपके पास तो फ़ोन होगा ना, आप प्लीज मुझे मोटू पतलू कार्टून दिखा दो आपके फ़ोन में" चूंकि मेरे फ़ोन फ़ोन में ज़्यादा बैटरी नही थीं तो उसे फ़ोन देने से मना कर दिया , और उससे उसके बारे में बातें करने लगी, उस बच्ची ने बताया के उसके माँ और बाप दोनो इन्ही तटों में भीख मांगते हैं, और वो भी दिनभर ऐसे ही घूमते रहते है घाटों में, कभी कभी उसे भी भीख मांगने के लिए विवश किया जाता है। जब उससे उसकी शिक्षा के बारे में पूछा, तो उसने बताया कि उसके माँ और बाप दोनो उसे पढ़ने के लिए शासकीय शाला में भी जाने नही देते।,,,,,,,to be continued.....
    ~मनु

    -manu
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    नदी के 2 किनारे।

    Part 1
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  • lovetangledsoul 65w

    ये ज़िन्दगी एक पावन नदी की तरह है,
    लोग आएंगे थूकने तुम पर,
    विशेलित करने भी,
    कोशिश उनकी जारी रहेगी ,
    तुम्हे गंदा करने की,
    पर याद रखना!
    नदी की तरह उन्हें किनारे पे छोड़,
    तुम्हे आगे बढ़ना है।

    रास्ते मे कई बाधाएं आएंगी,
    जैसे पहाड़, चट्टाने होंगे,
    कई खतरनाक मोड़ भी,
    लेकिन, तुम्हे घबराना नही हैं।
    बस स्वयं का रास्ता बनाकर
    आगे बढ़ते चलना हैं

    झरने के स्वरूप में तुम गिरोगे भी,
    पर याद रखना! गिर कर भी तुम्हे,
    एक नया रास्ता मिलेगा,
    आगे बढ़ने का..
    वनों से, सुंदर प्रकृति से,
    फूलों कि महकती कलियों से हो कर,
    गुज़रने का अनुभव मिलेगा तुम्हे याद रखना!

    लोगो कि प्यास बुझाने का,
    उनके काम आने का मौका ना गवाना,
    दुआएं मिलेंगी तुम्हे याद रखना।
    जब कड़ी धूप में तुम सूख जाओगे,
    तब वही दुआएं तुम पर
    बदल स्वरूप बरसेंगी।
    कभी कभी तुम भी,
    बाढ़ स्वरूप दुसरो के लिए त्राहि बन जाओगे।
    पर निराश मत होना,
    अपने अस्तित्व को याद रखकर शांत हो जाना।

    प्रभात कि उषाकिरण से लेकर,
    रात्रि कि चांदनी में भी तुमको,
    आगे बढ़ना हैं याद रखना।
    पावन उदगम से निकलकर,
    तुम्हे बहते चलना हैं।
    देवताओं के चरणों के आशीर्वाद लेकर
    आगे बढ़ते चलना है।
    याद रखना! इन सब के बाद,
    तुम्हे महासागर में जा कर,
    सम्मिलित होना हैं।
    फिर हमेशा के लिए शांति मिल जाएगी तुम्हे
    याद रखना।
    -मनु
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    याद रखना

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  • lovetangledsoul 65w

    Tu hi

    Tu hi ab bas meri rawani hai..!
    sirf tu hi mere zindagani hai..

    Mere Marmik rooh se likhe har chitti,
    khuda se mange har dua,
    bas tere daman pe hi jane hai,
    kyuki tu hi bas meri kahani hai.

    Tujhse shuru mere adatein,
    tujhpe khatam mere har chahtein,
    katra katra ke bas,
    teri chehre pe muskan lane hai,
    Kyuki tujh sang poori zindagi bitani hai..

    Dil ke bagiya me,
    tere naam ke hi kaliyan khilani hai,
    kyuki tu hi bas meri prem kahani hai..

    Us sukhe nadiya me,
    tere naam ke varsha hi lane hai,
    kyuki bas tu hi meri khushnumani hai..

    Tere ghazal jese zuban pe
    maine ta umr jeene ke thani hai,
    Mere dil ke banjar zameen par
    bas tere he naam ke hi bagiya khilani hai,
    kyuki bas tu hi mere
    har dhadan ke rawani hai...
    -manu
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  • lovetangledsoul 65w

    Khwahishein

    Dari si sehmi se hun mai,
    Apne khayalon me hi khoyi hun mai;
    Sabhi bandisho ko todkar
    aage badh rahi hun mai;
    Gir ke fir se uth kar chalne ke
    koshish kar rahin hun mai!!

    Dar hai is baat ka ke
    Na jane wo ghadi kab
    apne kanto ko fir badal de;
    Na jane kab wo raste
    apna rukh fir badal de;
    Na jane kab meri kashti
    sukhe hui samandar me fir doob jaye;
    Na jane kab mere kitabon ke
    panne fir palatjaye.!!

    Par fir bhi koshish kar rahi hun mai;
    Aayine me khudko dekhkar
    apna astitv talash rahi hun mai;
    Chehre par ek jhooti hi sahi
    par muskan liye aage badh rahi hun mai;
    Marmik rooh ke kalam ke syahi ko
    panne mein bahakar ye likh rahi hun mai;
    Anginat tammannayon ke sath,
    umeedon ke darwaze pe
    dastak dene jaa rahi hun mai..!!
    ~manu
    ©lovetangledsoul

  • lovetangledsoul 65w

    Wrote this 2 years ago.
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    Oh my darling

    I wish to listen to your euphonious voice
    along with the song of rain...
    I wish to see your grin in these spotlights...
    I wish to dance with you under this sky...
    just you and me and music of rain
    playing behind us...
    I wish... To grasp your hands tightly
    and listen to your appeasing song of love...
    Leaves are whispering yours and mines story...
    Thunderstorm lightning just cuz you're missing,
    These raindrops are wetting street around me...
    Every drop of water whispers your name...
    Every drop bounces my heart
    reminding me of your presence...
    Every aroma has your fragrance.
    Oh, my darling...!!
    Can u please calm them up..?❤
    ©lovetangledsoul

  • lovetangledsoul 65w

    A person died after eating the fruit of the poisonous plant of the garden, some people were blaming him that he shouldn't have eaten that fruit of which he was completely unaware of. Some were blaming that deadly plant. Some were saying he should have asked someone before eating that fruit, But nobody blamed the planter, who had planted the seed of poison and who was the real murderer of the victim .!
    Sounds absurd right? If this incident sounds ridiculous then what about the most considerable thing i.e. depression, isn't it the same story applies to depression and anxiety as well. We've been always advised that you should move on from this depression, you should move on from this breakup, you should move on from this betrayal, people should move on from everything that had brought a big disaster in their life, everything will be fine in future and what not.! A murder in which the actual criminal didn't get punishment about what they had done with the victim just cause they hadn't physically but emotionally and mentally killed them.!
    -manu
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    #depression #anxiety #pod
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    Depression

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  • lovetangledsoul 65w

    Sitting in front of my study table,
    Guessing what to do now
    Though I'm supposed to study at this moment
    But still, can't concentrate.
    Thought an option to watch movie or series
    But, not in the mood to see something mythical,
    Perhaps I always believe in being practical.

    Thought an option to call my friend or anyone,
    But not in the mood to talk with anyone else.
    I don't want to overhear or see something,
    I want to converse with someone,
    someone who can give attention to me.

    Thought About visiting social networking sites,
    But not in the mood as it deep down depresses me,
    Emphasizing me to live in a virtual world,
    which is far away from my physical reach.

    The only thing which I can do right now
    is to write cuz of my notepad,
    As it never raises a question from me,
    It never thought differently with me,
    It always pays attention to me and
    I can always obtrude my all sorrows
    and happiness in it through my words.

    When there is no one around me,
    who can physically or
    mentally make me calm
    Here is my notepad,
    Spreading its arms for letting in me,
    Hugging me through the words,
    Eavesdropping to me silently,
    without even doubting or disputing.!
    Making me feel being overheard
    by someone in this desirous world.!
    -manu
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    Notepad

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