maakinidhi

august5�� spread love....u will get it doubled in the end❣️

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  • maakinidhi 1w

    आजादी

    मन विश्लेषण करता है,पाई कैसी है आजादी?
    मन के बंधक सभी हुए,आई कैसी है आजादी?

    तुष्टिकरण सत्ता दल का यूं लेकर हमको डूबा है!
    इतनी दूषित राजनीति से, हर भारतवासी ऊबा है!!

    शासन और प्रशासन पर ही कब तक दोष मढ़ेगें हम!
    कब देशप्रेम की हृदय-पताका ले जयस्तंभ चढ़ेंगे हम?

    जब त्रुटियों का निराकरण स्वयं मानव करना सीखेगा!
    तमस छंटेगा उस दिन,सूर्य भी चिरप्रकाशित दीखेगा!!

    आशा है वह शुभ दिन जीवन में सबके ही आएगा!
    देवभूमि भारत का हर बच्चा अंतर्मन से हर्षाएगा!!
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 1w

    मैं कहां?

    मैं कहां तुम सी मधुर हूं?
    घोर कलियुग,सत्य स्वर हूं!!

    दृश्य जो अब देखती हूं!
    तो ये मन में सोचती हूं!!

    मधु भी फीका वार्ता से!
    लक्ष्यप्रेरित जो रही है!!
    मेरे हिय की प्रीति तो!
    स्पष्टता मेरी रही है!!

    मैं न तुम सी प्रिय रहूंगी!!
    किंतु छल मैं ना सहूंगी!

    मैं कहां तुम सी मधुर हूं?
    घोर कलियुग सत्य स्वर हूं!!

  • maakinidhi 6w

    ��❤️��

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    वादियां

    प्यार की कोई कहानी वादियां!
    खुशनुमा मौसम, सुहानी वादियां!!

    लम्हे जिनमें जिंदगी जीते हैं हम!
    रखती उनको हैं सजाकर वादियां!!

    यादें कितनी दिलनशीं होतीं सनम!
    महसूस ये हमको करातीं वादियां!!

    आसमां को छूने को बेताब हैं ये!
    इश्क की शिद्दत दिखाती वादियां!!

    देखा है जितनी दफा नजदीक से!
    हमको उतना ही सुहाती वादियां!!
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 9w

    शत शत नमन������

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    पन्ना धाय

    निज मातृभूमि हित त्याग स्वार्थ!
    लिख दी एक अमर कहानी है!!
    इतिहास सदैव ऋणी उनका!
    वह मां जो अमर बलिदानी है!!

    अपनी ममता के चंदन को!
    जिसने राणा हित मिटा दिया!
    रखकर पाषाण हृदय पर यूं!
    निज लाल भेंट में चढ़ा दिया!!

    है धन्य धरा राजस्थानी!
    यशगाथा बहुत सुहानी है!!

    शिशु चोटिल हो जाए तो मां!
    पीड़ा से विह्वल रोती है!
    सोचो बेटा अर्पित करते!
    उस मां की गति क्या होती है!!

    है पराकाष्ठा साहस की!!
    समर्पण की अमिट निशानी है!!
    इतिहास सदैव ऋणी उनका!
    वह मां जो अमर बलिदानी है!!
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 9w

    ����

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    रिवाज

    रिवाज एक दिन ये भी तो पुराना होगा!
    तुम्हें भी तो कभी मुझको मनाना होगा!!


    रखे रह जायेंगे सब खजाने अमीरों के!
    और फकीरों की ठोकर में जमाना होगा!!

    ये नयी नस्ल है,इसे बात ना बताना तुम!
    जो सिखाना है इसे,करके दिखाना होगा!!

    उसके ग़म की संजीदगी को क्या कहूं मैं!
    आंखों से जो बहता है क्या फ़साना होगा!!

    कभी तो मिल जाएगा वो शख्स लाखों में!
    आसान जिसको हाल-ए-दिल सुनाना होगा!!

    पूछती है सालों से सूनी पड़ी दहलीज वो!
    कब बेटे का मां बाप से मिलने आना होगा!!

    मुझे ये ग़म नहीं इस दुनिया को मैं रास नहीं!
    मुझे तसल्ली है खुदा के घर में ठिकाना होगा!!

    मैं चाहती हूं मुकम्मल सा एक जहां मेरा!!
    मैं जानती हूं मुझे खुद ही बनाना होगा!!
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 11w

    मेरे सारे प्यारे-प्यारे बच्चों को बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ��❤️��

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    बच्चे!

    मन के सच्चे,ये बच्चे!
    बड़ों से अच्छे,ये बच्चे!!

    बात कोई हो दिल से लगाते नहीं हैं!
    मान जाते हैं ज्यादा रूठ पाते नहीं हैं!!

    फलसफा जिंदगी का सिखाते हैं बच्चे!
    हमें बचपन से फिर हैं मिलाते ये बच्चे!!

    दिल है आईने सा साफ दिखता यहां!
    प्यारा सच्चा सा इनका है कोई जहां!!

    दूर रहकर भी यादें भुलाते नहीं हैं!
    क्यूं इनसे भी कुछ सीख पाते नहीं हैं?

    मन के सच्चे, ये बच्चे!
    बड़ों से अच्छे, ये बच्चे!!


    ©maakinidhi

  • maakinidhi 11w

    शख्स

    जिंदगी कुछ यूं खफा थी यार उससे!
    सच कहूं तो कायदों में वो नहीं था!!

    बोलना सच यूं उसे भारी पड़ा है!
    यूं कभी भी फायदों में वो नहीं था!!

    सांच से जीता रहे वो शान से अब!
    हां हुजूरी वायदों में वो नहीं था!!

    जिंदगी भर फक्र बस ये ही रहा है!
    झूठी उन रिवायतों में वो नहीं था!!


    है जुदा अंदाज उसका... खुशमिजाजी!
    साजिशों की आदतों में वो नहीं था!!
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 11w

    वेदना!

    अश्रु धारा हिय प्रवाहित!
    दृग सजल,रूदन मना है!!
    रक्तरंजित वेदना है!!

    थे जो वो,अपने ही तो थे!!
    खंडित हुए,सपने ही तो थे!!
    आज कुछ ना कह सकेगा!
    आज तो मन अनमना है!!

    जो न मन को हैं समझते!
    रिश्ते वह कैसे पनपते?
    जिनकी वाणी घाव देती!
    शब्द बाणों सा तना है!!

    बेधकर जो पुष्प सा मन!
    रौंदकर चलता बना है!!

    अश्रु धारा हिय प्रवाहित!
    दृग सजल,रूदन मना है!!
    रक्तरंजित वेदना है!!

  • maakinidhi 12w

    आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ����������❤️����

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    दीपावली

    है दीवाली तब ही सार्थक!
    जब दीप भीतर का जलेगा!!
    होगा ये जग भी प्रकाशित!
    तिमिर जब मन का मिटेगा!!

    आओ अब दीपक जलाएं!
    यह धरा हो चिर-प्रकाशित!!
    दीप मन की उज्जवलता का!
    हो सहज ही हिय-प्रज्ज्वलित!!

    तब ही अंधियारा मिटेगा!
    मन सकेगी तब दीवाली!!
    आह्लादित मन भी होगा!
    मन सकेगी तब दीवाली!!

  • maakinidhi 15w

    परिवर्तन

    कुछ शूल-पंथ, कुछ पुष्प गुच्छ!
    जीवन परिवर्तनशाला है!!
    यह गौरवगाथा उन जन की!
    अमृत सम जिनको हाला है!!

    कभी मन भावों का सागर है!
    कभी मौन रिक्तता पसरी है!!
    सम्पूर्ण सृष्टि की चाह कभी!
    कभी जीवन से भी विरक्ति है!!

    है शिलालेख पर स्वर्णाक्षर से!
    अंकित उनके नाम यहां!!
    नि: स्वार्थ भाव परहित अर्पित!
    करते जो प्रतिक्षण काम यहां!!

    सुख में या दु:ख की वेला में!
    खुद को जिसने संभाला है!!
    यह गौरवगाथा उन जन की!
    अमृत सम जिनको हाला है!!

    जीवन की अनुभवशाला से!
    कुछ मोती हमको चुनने हैं!!
    दैदीप्यमान व्यक्तित्व लिए!
    सपने स्वर्णिम ही बुनने हैं!!

    रखता स्मरण जगत उसको!
    जो हृदयांचल की माला है!!

    यह गौरवगाथा उन जन की!
    अमृत सम जिनको हाला है!!
    ©maakinidhi