malay_28

wandering with words.

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  • malay_28 5d

    17/01/2022

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    अधरों पर राग स्वच्छंद लिये
    नयनों में रस मकरंद लिये
    भावों के सुर शब्दों में तू ढल
    मलय पवन तू धीरे धीरे चल

    अशेष अभी यह जीवन यज्ञ
    दूर खड़ा अभी तेरा गंतव्य
    बेचैनी के भंवर से निकल
    मलय पवन तू धीरे धीरे चल

    भावों का, शब्दों का खेल है ये
    अभिव्यक्ति की अमर बेल है ये
    निर्झर सा झरता जा अविरल
    मलय पवन तू धीरे धीरे चल

    अपनी कलम को तू मंदार बना
    रत्नाकर मंथन को उद्गार बना
    कर क़बूल अमृत मिले या गरल
    मलय पवन तू धीरे धीरे चल

    तेरे पंखों पर साँसों की सरगम
    नव किसलय पर जैसे शबनम
    हर कोई मिलने तुझसे विह्वल
    मलय पवन तू धीरे धीरे चल

    सूर तुलसी मीरा को जी ले तू
    कभी पूरी मधुशाला पी ले तू
    महादेवी के मधुर दीपक सा जल
    मलय पवन तू धीरे धीरे चल

    सफ़र साहित्य का आसाँ नहीं
    है कौन यहाँ जो परेशां नहीं
    तू बन हर मुश्किल का हल
    मलय पवन तू धीरे धीरे चल

    जयघोष नहीं कोई तेरे पथ में
    कोई दिव्य अश्व नहीं तेरे रथ में
    हो अभिव्यक्त तू अडिग अचल
    मलय पवन तू धीरे धीरे चल.

    ©malay_28

  • malay_28 5d

    17/01/2022

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    ज़माने की हवा से यक़ीनन दूर हो तुम
    ख़ामोश हो मग़र नहीं मग़रूर हो तुम !

    सजना संवरना तुमने सीखा ही नहीं
    सादगी में भी मुकम्मल एक हूर हो तुम !

    होता नहीं असर वक़्त का जिस पर
    हर मौसम में ज़िन्दगी का सुरूर हो तुम !

    लाखों हसीं हैं ज़माने के बाग़ में मग़र
    फ़िरदौस-ए-क़ायनात का ग़ुरूर हो तुम !

    देखकर जिसे सज़दा करना चाहे दिल
    सच कहूँ मलय ख़ुदा का नूर हो तुम !

    ©malay_28

  • malay_28 5d

    17/01/2022

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    अवसादग्रस्त बीता वर्ष
    जब जीवन था बना संघर्ष
    आख़िर अवसान हो ही गया
    क्षितिज पर नया विहान हो ही गया.

    अब नयी बेलें फैलेंगी
    धरा से गगन ले लेंगी
    नयी उमंगें नया उत्कर्ष
    नव वर्ष सृजित नव हर्ष.

    संयम स्वास्थ्य सरल जीवन
    सजग सबल सहज हो जीवन
    भयमुक्त ज़िन्दगी करे विमर्श
    नव वर्ष नव हर्ष नव उत्कर्ष.

    ©malay_28

  • malay_28 2w

    07/01/2022

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    ये साँसों का सफ़र तो वक़्त की रवानी है
    ग़ुरूर-ए-हुस्न कैसा पल भर की जवानी है !

    कब कोई रहता यहाँ साथ उम्र भर के लिये
    ज़िन्दगी फ़क़त कुछ लम्हों की कहानी है !

    हँसी की धूप ग़मों की बारिश में भीगते हैं
    किसको क्या मिला रब की मेहरबानी है !

    दर्द-ए-इश्क ना सहा तो फ़िर दिल कैसा
    मुहब्बत सनम थोड़ी आग थोड़ा पानी है !

    हर किसी से मुहब्बत का इज़हार करो ना
    ये ज़िस्म शाश्वत नहीं मलय बस फ़ानी है !

    ©malay_28

  • malay_28 2w

    06/01/2022

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    दिल कह रहा है दिल की लगी सुन लो ना
    साँसों से उठ रही मेरी बंदगी सुन लो ना !

    रहता नहीं वक़्त कभी हमारा ही बनकर
    कुछ कह रही है अब ज़िन्दगी सुन लो ना !

    मत उठाना हर्फ़ों पे अँगुलियाँ कभी तुम
    मेरे लफ़्ज़ों की पाक सादगी सुन लो ना !

    ना जाने कितने ज़ख़्म मिले तन्हाइयों में
    कह रही ज़ख़्मों की ताज़गी सुन लो ना !

    दूरियाँ दरम्यां हमारे ख़ुदा को मंज़ूर नहीं
    मलय फ़िज़ाओं की शर्मिंदगी सुन लो ना !

    ©malay_28

  • malay_28 2w

    04/01/2022

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    आज ही जी भरके सितम कर लेना सनम
    तेरे और सितम सहने मैं कल रहूँ ना रहूँ !

    कह दो आज जो कुछ भी कहना है तुम्हें
    दिल की बात सुनने मैं कल रहूँ ना रहूँ !

    काँधे पे मेरे सर रखकर रो लेना जी भरके
    अश्क़ों के फूल चुनने मैं कल रहूँ ना रहूँ !

    किसको ख़बर ज़िन्दगी ले जाएगी किधर
    साथ तेरे रोने हँसने मैं कल रहूँ ना रहूँ !

    अब मुस्कुराके कह दो अलविदा मलय
    ख़ुदा हाफ़िज़ कहने मैं कल रहूँ ना रहूँ !

    ©malay_28

  • malay_28 3w

    02/01/2022

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    रेशा रेशा अपनी शख़्शीयत, अपना वज़ूद
    कर चुका था समर्पण मैं तेरी दहलीज़ पर
    फ़िर भी मुट्ठी भर शून्य के सिवा कुछ न मिला
    अश्वत्थामा के ज़ख़्म सी मग़र आशा बनी रही !

    टूटा था दिल ज्यों टूटे शीशा टुकड़े टुकड़े में
    खुली जब आँखें तो वो सपनों सा विलीन था
    न जाने दिल का कौन सा कोना था अनदेखा
    लौट आएगा वो उसे इस बात का यक़ीन था !

    मंदिर नहीं फ़क़त खँडहर है अब दिल मेरा
    मैंने मग़र रक्खी है जला ज्योति आशा की
    या तो रोशन होगा दिल का मकाँ अँधेरा
    या क़ब्र पे मेरे मलय अब जलेगा चराग़ ही !

    ©malay_28

  • malay_28 4w

    26/12/2021

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    समंदर-सी चाह लिये चलता हूँ
    होठों पे इक आह लिये चलता हूँ !

    रंजिशों से भरी इस दुनियाँ में
    सबकी परवाह लिये चलता हूँ !

    भावनाओं की दरिया है गहरी
    हर क़दम थाह लिये चलता हूँ !

    चोट लगी है दिल पर कई बार
    दर्द खामखाह लिये चलता हूँ !

    मंज़िल मुझे मिले न मिले मलय
    मुहब्बत की राह लिये चलता हूँ !

    ©malay_28

  • malay_28 4w

    23/12/2021

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    ग़ुलाबी ठंड देखो तो अब लाल हो गयी
    हवा चेहरे से लगकर गुलाल हो गयी !

    सिहरने लगी हैं शाख़ें दरख्तों की अब
    ओस बूँदों से घास मालामाल हो गयी !

    चाय ठंडी होती रही तुम तो आये नहीं
    इंतज़ार में ख़्वाहिशें भी कंगाल हो गयी !

    कोहरे की रजाई में कंपकंपाता है सूरज
    शब की बर्फ़ीली जवानी बेमिसाल हो गयी !

    गिर रहा पारा कहीं कहीं गर्मी चुनाव की
    मलय सर्दी गर्मी में जनता बेहाल हो गयी !

    ©malay_28

  • malay_28 5w

    16/12/2021

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    लब-ए-ज़मीं पर था झुका आसमाँ बेसुध
    रुक गया था वक़्त याद आते हैं वो लम्हें !

    किसी की मुस्कुराहटों ने थी बदल डाली
    पूरी की पूरी क़ायनात बताते हैं वो लम्हें !

    धड़कनों की दहलीज़ पर उतरा था कोई
    उमड़े थे कैसे जज़्बात सुनाते हैं वो लम्हें !

    निग़ाहों की हद में था नज़ारा ख़ुशनुमा
    वस्ल की हसीं रात दिखाते हैं वो लम्हें !

    गुज़र चुका है वक़्त का काफ़िला सनम
    भीगे भीगे अहसासात जगाते हैं वो लम्हें !

    कभी जब देखता हूँ मुड़कर वो रहगुज़र
    भूली बातों की याद दिलाते हैं वो लम्हें !

    अभी सफ़र रुका नहीं क़दम हैं चल रहे
    हर क़दम पर याद बहुत आते हैं वो लम्हें !

    किसी राह पे हम मिले थे नदी समुद्र सा
    टूटे साहिल की बात सुनाते हैं वो लम्हें !

    ज़माना हो गया वो ज़माना गुज़रे मलय
    हुई यादों की बरसात भिगाते हैं वो लम्हें !

    ©malay_28