manuhere

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Reposts
  • manuhere 5d

    पीतल का खिलौना

    न राधेय की कला न उसका क्रोध
    न उर्वशी के सौन्दर्य का बोध
    भौतिकता का कोई लोभ नहीं
    चंचलता का सर्वस्व क्षोभ नहीं
    मिट्टी पर स्वर्ण शय्या का भार
    बिछिया अपरिणीता का शृंगार
    किस किस का धिक्कार सहूँ
    मौन धरूँ या सब कुछ कहूँ
    तृष्णा है लेश मात्र नहीं
    मैं सूत्रधार ?कुत्सित पात्र नहीं
    क्या कुछ पाना है अभी
    ऋण मात्र चुकाना है अभी
    वक्ष प्रेम लालसा सब त्याग चुका
    क्या सौभाग्य का सूर्य जाग चुका?
    इतनी पीड़ा इतने अश्रु
    बैकुंठ बांधना चाहता हूं
    सब समर्पण ले,धिक्कार दिया
    मैं काल साधना चाहता हूं।।

    मनु मिश्रा

  • manuhere 6w

    As you can see,I'm not dead ��

    Do tell me how this anti writers block feels to you as a reader
    Cheers

    @riyashi
    @rangkarmi_anuj
    @shrihari_nandini
    @writerstolli
    @shriradhey_apt

    #mirakee #poetry #hindi #thoughts #musings #flow #soar

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    समन्वय

    पीसा जाता इक्षु दंड प्रतिक्षण वर्तिका के गर्भ में
    क्या विष क्या अमृत नीलकंठ के संदर्भ में।
    क्या काल से जीत सकता है नर
    भावक नहीं ,पोषक है उदर।
    मैं सर्वस्व हूं जैसे देव का क्रोध
    मैं ही संतान ,तात भी ,न्याय भी
    मैं ही सूर्य ,जीवन का अभिप्राय भी l
    वनस्पति का संतत सुख भी हूं
    मैं मृत्यु का संताप हूं,जीवन का दुख भी हूं।
    मुझमें प्राण बहुत ,पर पात्र कितना है
    क्या घृत में जल लेश मात्र जितना है।
    तृष्णा से व्याकुल हलाहल के बाद
    धर्म यह कि जल पीना चाहता हूं।
    मैं विलक्षण ब्रह्मा की सृष्टि का अणु भाग
    दो पहर सुमित्रा की कृति में जीना चाहता हूं।

    मनु मिश्रा
    ©manuhere

  • manuhere 19w

    मुझे मेरे हालात का फिर ख्याल यूं आया
    जो कायदे का ज़ख्म था,बेतरतीब हो गया।

    मनु मिश्रा
    ©manuhere

  • manuhere 22w

    न रुकिए ज़रा हादसे की बयार से
    दूर ही सही , मुंताजिर हैं रास्ते बहार से।

    #mirakee #writerstolli #poetryworld #hindipoetry #musings
    #thoughts #relentless #god #belief
    @riyashi
    @deepajoshidhawan
    @shrihari_nandini
    @writerstolli
    @hindiwriters

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    "कायदे का इल्म आज अगर हकीकत से बड़ा होना है
    मैं संगमरमर हूं,मुझे एक दिन फिर भी खड़ा होना है"


    मनु मिश्रा।
    ©manuhere

  • manuhere 22w

    किंचित

    जब अंकों में जीता हूं
    क्यों प्राणहीन हूं प्रतिशत में
    क्या चक्रव्यूह लांघ सकता
    हूं इस खंडित रथ में
    सत्य असत्य सब सुंदर है
    मेरे शत पर संशय क्यों
    अक्षर क्यों हैं निर्वीय कुंठित
    मेरे पौरुष को भय क्यों
    जीवन का संबल है उषा
    कालिमा का अस्तित्व क्यों है
    जो भरा है भाव ,समर्पण से
    उसके भीतर ही रिक्त क्यों है
    वन्दना का स्वर क्यों है
    उनके प्रण,इनके व्रत में
    जब अंकों में जीता हूं
    क्यों प्राणहीन हूं प्रतिशत में


    मनु मिश्रा

  • manuhere 23w

    हुस्न ने किया है हर हर्फ पे सितम
    कौन क्या लिखा गया,बस खुदा जाने

    मनु मिश्रा

  • manuhere 23w

    जनरल रावत मां भारती के अतुल्य सुत


    "उनके जीवन का सार मां है भारती
    सुत ऐसा जना,उपकार है मां भारती।"


    #mirakee #condoloscence #prayers #tribute

    @rangkarmi_anuj
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    @writerstolli
    @deepajoshidhawan

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    मै उस रुधिर के ऋण का कृतज्ञ
    मैं तेरे वंदन में अर्पित यज्ञ
    मैं नियति के वश में लीन आया हूं
    मुझको अंचल का सानिध्य दे मातृ
    मैं पंचतत्व में विलीन आया हूं।।


    मनु मिश्रा
    ©manuhere

  • manuhere 26w

    वीरांगना बिठुर की मणिकर्णिका
    झांसी की लक्ष्मीबाई

    नमन ✨��



    #hindi #poetry #ranilaxmibai #tribute #gratitude #pride #
    #honour #mirakee #hindiwriter #writerstolli #poetryworld

    @hindiwriters
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    https://youtube.com/shorts/0KGdoqZhmM8?feature=share

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    वीरगति जब रही हो तर्पण की विधि पुरानी
    दोहराई जाती है गूचे गलियारों में वो काहनी
    सिंधु का सीना लांघ आए चंड मुंड व्यभाचारी
    काल बनकर लील गई उन्हें वो अमर भवानी


    मनु मिश्रा
    ©manuhere

  • manuhere 28w

    पुरुष हो तो क्रोध करो, हुंकार भरो
    एक बार जियो,एक बार मरो।।


    #mirakeeworld #writerstolli #poetryworld #hindiwriters
    #poetryworld #poetry of #dawn #dusk #musings
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    @deepajoshidhawan

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    विध्वंस और वैराग्य

    नारायण को कब बांध सका सुयोधन
    कैसे गौरव पर कुटार करता धन
    वैभव की परिभाषा में संलिप्त है जो
    देह से विशाल,हृदय से रिक्त है जो
    उस कुटिल का घर लक्ष्मी क्यों भरती है
    आघात पर सिर्फ आत्मा क्यों मरती है
    मैं उस कालचक्र पर भी प्रश्न उठाता हूं
    पर उस अविरल ममता से छल सा लजाता हूं
    मुझे सिर्फ उस भाग्य की बस कला से हानि है
    वरना रक्त से पिपासा को कब ग्लानि है
    मैं फिर कहता हूं ,इन्द्र का दरबार भी लज्जित कर सकता हूं
    उस गौरव के लिए मार या मर भी सकता हूं
    मुझे लीलने आई है धार तो मुझे ये तो बता दे
    कितना संबल है इन भुजाओं में जता दे
    क्रीड़ा में जीता जाता है रण ,
    संबल पर आघात ये क्षण
    फिर भी काल पर भारी यौवन
    गौरव पर न कुटार कर सकता धन
    निशा के आलिंगन में काल सा जागूंगा
    मैं नर व्याघ्र ,क्रोध नहीं त्यागूंगा।।

    मनु मिश्रा
    ©manuhere

  • manuhere 30w

    सब कुछ वैसा है , हममें क्या नया है
    बयां वहीं है,बेहतर अंदाज़ ए बयां है।


    मनु मिश्रा।
    ©manuhere