masoom_bachchi

bachchi�� LBSNAA_LOVER�� ����...14TH APRIL

Grid View
List View
Reposts
  • masoom_bachchi 17w

    चलते रहना

    हजारों कांटें मिलेंगे राहों में
    पर डरना मत
    मौके मिलेंगे बहुत
    पर एक भी तू खोना मत
    तेरे पैर पीछे खींचने वाले होंगे बहुत
    पर वो एक जो आगे ले जाए
    उस हाथ को तू छोड़ना मत

    तू रुकना मत ...चलते रहना
    चलने की ज़िद करते रहना।।

    अगर जकड़ ले पैरों में बेड़ियां
    तो बेड़ियों को पिघला कांटों से गुजरते रहना
    होंगी खड़ी कई चट्टानें मंज़िल से पहले तेरे
    चट्टानों को तोड़ तू नदियों सा आगे बढ़ते रहना
    ’सफर को तू मोड़ ले अब’ जैसे मशवरे देंगे बहुत
    तू अपनी मंजिल को पाने की ज़िद करते रहना

    तू रुकना मत ...चलते रहना
    चलने की ज़िद करते रहना।।


    खामियां निकलने वाले होंगे बहुत
    खूबियां तू खुद ढूंढते रहना
    सफर में थक जाए गर कदम तेरे
    तू थम जाना , पर अगले ही पल खुद से कहना
    अब मुझे है बस चलते रहना..
    चलने की ज़िद करते रहना

    तू रुकना मत ...चलते रहना
    चलने की ज़िद करते रहना।।


    ©₹श्मि
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 32w

    Happy new year everyone ������

    #happynewyear22 #newyearresolution

    Read More

    2022

    नया साल आया है...


    इसमें जो हमें याद करेगा ,
    उसे हम भी दिल से धन्यवाद करेंगे!

    जो नहीं याद करेगा ,
    उसे ना याद ,ना ही फरियाद करेंगे!

    कुछ इस तरह से हम ,
    वक्त को बिल्कुल भी ना बर्बाद करेंगे!
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 34w

    ज़िंदगी के सरगम पर
    कुछ इस तरह गुनगुनाते रहो,
    गिरो , उठो, संभलो
    पर चलते चले जाते रहो।

    तेज़ रौशनी में दिखता नहीं कुछ
    अंधेरे से भी यारी निभाते रहो,
    स्याह रातों से डरते हो क्यों तुम भला
    खुद ज़ुगनू बन ज़गमगाते रहो।

    याद रख सफलता के तालियों को
    उससे उत्साह अपना बढ़ाते रहो,
    ना घबराओ असफलता के तानों से तुम
    उससे भी लेे सबक पग बढ़ाते रहो।
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 34w

    दिल दुखे जिन बातों से
    उन्हें हंसकर टाल देना चाहिए,
    मनाना भूल चुके है लोग
    इनसे अपेक्षा त्याग देना चाहिए!
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 51w

    आजादी के इस 75 वें सोपान पर भारत माता एवम् हमारे वीर क्रांतकारियों/जवानों को कोटि कोटि नमन ���������� एवम् समस्त भारतवर्ष को अशेष मंगल कामनाएं ������
    #independenceday #india_meri_jaan
    #independenceday2021

    Read More

    यह जो इतना प्यारा हमारा हिंदुस्तान नजर आता है
    इतिहास के पन्नों में वीरों का बलिदान नजर आता है!
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 52w



    जीत सुनिश्चित कर लूं मैं
    कर्म मेरा अर्जुन सा हो !

    मृत्यु सुनिश्चित हो फिर भी व्यूह तोड़ू
    साहस मेरा उस अभिमन्यु सा हो !!
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 53w

    छन्न - छन्न (part-3)

    3 बजने वाला था ....किसी भूत की पिक्चर में उसमें देख रखा था कि 2:00 से 3:00 के बीच भूतों की शक्ति अपार होती है ..जैसे ही घड़ी पर नज़र गई उसका डर और बढता जा रहा था..
    घड़ी की सुई धीरे-धीरे आगे बढ़ती जा रही थी और खिड़की से थोड़ी थोड़ी रोशनी आनी शुरू हो गई ..अब जाकर खुशबू की जान में जान आई ...पर फिर भी वह अभी उठने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी.

    ..4:30 बज चुके थे ...इधर मम्मी के अलार्म बजे... और फिर कुछ समय बाद वह खुशबू को जगाने उसके कमरे की तरफ बढ़ी .…जैसे ही दरवाजा खोला तो उन्होनें जो देखा , उससे वो दंग रह गई... खूसबू अपने बेड पर एक कोने में बैठी थी मानो एक छोटी सी , डरी सहमी सी बच्ची है ..…... पसीने से लथपथ चेहरे को देखकर वह दौड़ती हुई ख़ुशबू के पास जाती है ,और पूछती है ...कि क्या हुआ तू इतनी परेशान क्यों है और इतनी ठंड में तुम्हारे चेहरे पर ये पसीने कैसे?... खुशबू ने एक-एक बात बताएं और फिर मानो वह रोने ही वाली थी कि तभी......


    .... मा ने उसे अपने सीने से लगाते हुए कहा -एम सॉरी बेटा !तुम ये पायल खोल दो, मैंने कल शाम को तुम्हें ज़बरदस्ती ये पायल पहनने को कहा था... लड़कियों के पैर में पायल अच्छा लगता है पर तुम्हें पहना कर से से शायद मैंने बहुत बड़ी गलती की है....।।,लाओ इधर मैं खोलती हूं इसे अभी।
    तब जाकर ख़ुशबू को पता चलता है कि उसके ज़रा से हरकत पर वो chhnn chhnn chhnn chhnn की आवाज क्यों आने लगती थी.… उसके ज़रा सा हिलने पर पायल इसलिए बज रहा था क्योंकि यह उसी के पैरों में था....
    और फिर चेहरे पर थोड़ा सा शर्म, थोड़ा सा डर, थोड़ा सा गुस्सा लिए मुंह बिचकाते हुए उसने अपने मम्मा से कहा कि मैंने कहा था ना कि मुझे यह सब नहीं पसंद है ...आपने फिर भी मुझे पहनाया मुझे और मैं रात के 2:00 बजे से अभी तक जाग रही हूं ,ऊपर से डर से मेरी हालत पंचर हो रही थी।

    मां ने हंसते हुए उसके पैरों से पायल को निकाला और कहती हुई चली गई "ये लड़की पागल है ।"
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 53w

    छन्न - छन्न (part-2)

    रात क दो बजे थे ... खुशबू नींद में ही अपने सिरहाने अल्मारी पर रखे बॉटल की तरफ हाथ बढ़ा रही थी कि तभी उसे कोई आवाज़ सुनाई दी ..chañchnn channññ

    पहले तो समझ नहीं आया फिर जब दोबारा बॉटल की तरफ हाथ बधाई फिर से उसे अवाज़ सुनाई दी ..मानो पायल की झंकार धीरे धीरे उसके कानों में नृत्य करते हुए प्रवेश किए हो... इतना सुनने के बाद उसकी नींद खुलती है और वो सहम जाती ह . आज उसकी प्यास भी बिना पानी के ही जा चुकी थी.....घबराहट में वो कुछ बोल नहीं पा रही थी....बस अपने चारो तरफ देखे जा रही थी जब भी वो थोडी भी इधर उधर हिलती तो मानो कोई अपना नृत्य सुरु कर दे रहा था र पायल की मद्धम झंकार उसके कानों में गूंज उठती थी। .…. उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कोई उस पर निगरानी रख रहा हो... वो और सहमति गई अब वो इस हालत में भी नहीं थी कि वो मा को आवाज़ दे ...

    उसे लग रहा था सिर्फ थोड़ी बहुत इधर उधर होने से पायल बजने लगा रही है तो ...आवाज़ निकालने पर कही आज मेरी वर्षों की भूत देखने वाली इच्छा पूरी ना हो जाए..…. वक्त बीते जा रहा था और वह चुपचाप सहमी हुई वहीं पर सावधान मुद्रा में लेटे हुई थी.…..

    इधर जब भी खिड़की के पर्दे हिलडुल रहे थे तो मानो इसके सांसों की गति अचानक से तेज हो जाती थी….. पसीने से लथपथ ठीक से सांस भी लेने में उसे डर लग रहा था। ...जब भी सड़क पर कोई गाड़ी जाती-आती है या फिर किसी तरह की आवाज आती थी वह डर के मारे चुपचाप से सहम जाती थी और उसका चेहरा लाल हो जाता है....

    Continued..,,✍️✍️
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 53w

    छन्न - छन्न (part1)

    रात के 9:30 बज रहे थे, गांव में किसी के शादी के निमंत्रण पर पापा वहां गए थे ,,,,इस कारण मां ने भी घर पर खुशबू के पसन्द के आलू के परांठे बना दिया और बाजार से कुछ मिठाईयां भी मंगवा लिए..
    मा के काम में खुशबू ने भी जीतना हो सके हाथ बटाया.. उसके बाद मा अपनी छोटी बहन प्रभा के कॉल आने पर खुशबू को पढ़ने के लिए कहती है और ये भी कहती है कि बात करके दोनों खाना खाएंगे साथ ही।...खुशबू भी समझ चुकी थी कि अब इतनी जल्दी तो खाना मिलने वाला है नहीं ... इतनी जल्दी कहा होने वाली थी इस वार्तालाप की समाप्ति... आख़िर दो बहनों की बातें थीं । ये सब सोचकर खुशबू भी अपने नोट्स बनाने बैठ गई ...
    इधर खुशबू के कमरे में कलम और कागज के बीच अफ़ना - तफ़नी मची हुई थी... तो उधर मा भी कहा कम थी उन्होंने भी फोन पर ही कभी ठहाके ( मानो यारों की महफ़िल में हो) तो कभी गंभीर मुद्रा में (मानो किसी सीरियस बिज़नेस डील को लेकर ऑफिस मीटिंग् में मीटिंग हेड हों) अपने कमरे में अकेले ही महफ़िल जमा रखी थी ।
    पूरे एक घंटे के धुआंधार बातचीत के पश्चात वक्त से समझौता करते हुए दोनों ने कॉल डिसकनेक्ट करने का फैसला लिया तब जाकर किसी तरह मोबाईल को भी थोड़ी सांस लेने की फुर्सत मिली। मा कमरे में आयी तो देखा खुशबू पढ़ रही थी पर मा ने वक्त को देखते हुए कहा कि चलो पहले खाना खालो फिर पढ़ाई करना ...


    दोनों ने खाना खाए ...सारा चिली केचअप सिर्फ दो दिनों में ख़तम करने के लिए खुशबू को आलू पराठे के साथ-sath थोड़े बहुत डांट भी खानी पड़ी... मा अपनी रसोई के काम निपटाने लगी और खुशबू अपने लिए और मा के लिए पानी के बोतल भर कर उनके जगह पर रख लिए य तो मा को कभी कभी रात को प्यास लगती ह पर खुशबू को रात को पानी की बोतल उसके पास न मिले तो नींद में ही सारा घर नाप देती थी। मां अपने काम के बाद सोने चली गई जबकि खुशबू ने थोड़ी देर और पढ़ने का फैसला किया।।। चेप्टर कंपलीट हो जाने पर खुशबू अपने आदत क अनुसार मोब. में कुछ देर "प्रेमचन्द की निर्मला " किताब पढ़ी और फिर वही सो गई ।।।
    Continued...,,✍️


    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 54w

    Bachchi

    जरूरतें पूरी नहीं हुईं मेरी
    मैंने मेरे हीं ख़्वाहिशों को दफना दिया,
    हालातों से कुछ यूँ समझौता हुआ मेरा
    उम्र से पहले हीं 'बच्ची' को बड़ा बना दिया।

    खिलौने की किमत ऊँची थी
    मैंने 'चाहत कलम की है ' बता दिया,
    सपनों से कुछ यूँ इश्क़ हुआ मुझे
    मैंने किताबों से दिल लगा लिया।

    चाहत तो थी मुझे भी मासूम रहने की
    पर वक़्त ने मुझे समझदार बना दिया,
    नादानियाँ करने की वज़ह नहीं थी मेरे पास
    वक़्त ने मुझे बेवजह ही जिम्मेदार बना दिया।

    मेरे संघर्षों को देखकर अक्सर
    उसने आँखों से आँसू छलका दिया,
    'प्रेरणादायी कहानी लिखूँगी, माँ! '
    ये कहकर मैंने उसको हँसा दिया।

    जरूरतें पूरी नहीं हुईं मेरी
    मैंने मेरे हीं ख़्वाहिशों को दफना दिया,
    हालातों से कुछ यूँ समझौता हुआ मेरा
    उम्र से पहले हीं 'बच्ची' को बड़ा बना दिया।
    ©masoom_bachchi