mawari_nimay

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A smile creator �� Heart touching poet ❤ Motivational friend

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  • mawari_nimay 44w

    Shame on society

    "डराकर तो रखना ही होगा" कदम बाहर रख लेगी जी,
    "लड़कों के बराबर है तो क्या " बदनामी तो कर देगी जी।

    बेटी होना गुनाह नहीं मगर ज्यादा तो नहीं पढ़ाएंगे इसे,
    खुद ज्यादा समझदार हुई तो हमें ताक में धर देगी जी ।

    लड़की की जगह तो  पैरों में रही फिर कैसे सिर चढ़ाएं,
    काँधे पर जो चढ़ गई तो सर ही कलम कर देगी जी।

    रिश्ता जल्दी करना या देर से करो हमें क्या फर्क़ पड़ेगा,
    "लड़की तो त्याग की मूरत है" सब न्यौछावर कर देगी जी।

    "अरे! पुरुष प्रधान समाज है साहब, कोई देवी थोड़ी है बेटी"
    जो हमें स्वीकार होगा वो  तो बिन बोले सब कर देगी जी।

    शर्त नहीं है कोई बस बिक जाए अच्छे दाम पर ये आफत,
    निकम्मा हुआ तो क्या लड़का खुद कमाकर घर भर देगी जी।

    माँ पर ज्यादा गई है, घर में शांति पाठ करा लेना आप भी,
    बाकी तो एक तमाचा काफी है जो मांगोगे कर देगी जी।

    "निमय" जल्दी करो शुभ मुहूर्त निकला जा रहा सौदे का"
    नासमझ है तब तक निपटें पता लगा तो बवंडर कर देगी जी।
    ©mawari_nimay

  • mawari_nimay 44w

    A SONG

    तुम आओगे, तुम आओगे मेरी साँसों के सहारे,
    जान बन जाओगे, बन जाओगे हमसफर हमारे
    तुम आओगे, तुम आओगे.......

    पलकों पर बिठाकर ले जाएंगें तुमको,
    जुल्म-ओ - सितम से बचाएंगे तुमको,
    खामोश ये हवाएँ पता देगी हमारा,
    धड़कनो में केवल नाम है तुम्हारा,
    मैं बहता रहा हूँ दरिया सा तुम हो मेरे किनारे,
    तुम आओगे..हाँ आओगे मेरी साँसों के सहारे ....

    तुम इत्र सा महकते मेरे ओ हुजूर !
    महकाओगे हमें भी शायद जरूर !
    नैनों की सौदागरी में बिक चुके हैं हम
    बेमौल ही खरीदा है तुमने-ओ- सनम
    तुमसे ही होंगी अब तो इस जिंदगी में बहारें,
    तुम आओगे..हाँ आओगे मेरी साँसों के सहारे ....
    ©mawari_nimay

  • mawari_nimay 44w

    दाग बहुत हैं मुझमें लेकिन
    दिखा-दिखा कर हँसना भी तो है,
    मरने की लाखों वजहें दी लेकिन
    एक बहाना ले जीना भी तो है...
    ©mawari_nimay

  • mawari_nimay 44w

    सजदा किया था परवाने ने
    कभी बगिया में एक फूल को चुनकर...
    बगिया की एक कली ने कह दिया,
    तुझे नेस्तनाबूद कर दूँगी, बागबां आये तो सही !
    ©mawari_nimay

  • mawari_nimay 45w

    नदिया को चाह होती है
    समन्दर में मिल जाने की....
    और कमबख्त, ये नामुराद रेत का मरुस्थल
    पूरे पानी को निगल जाता है
    ©mawari_nimay

  • mawari_nimay 45w

    कभी साँसे खत्म हो जाती है,
    मुक़म्मल इश्क़ की दास्तान कहने में...
    और लोग उसको हरबोला समझ हर सुबह
    गवाली पर निकल जाते हैं
    ©mawari_nimay

  • mawari_nimay 45w

    अंतर्चेतना

    है ज्वाला सी धधकती दृग में प्रतिकार की ,
    अब कहाँ जगह बची मानो किसी उपकार की,
    प्रतिशोध मानो रोम-रोम में स्वप्रस्फुटित हो रहा,
    सांसें सारी लग रही है मानो अभी अंगार सी.....

    शून्य हुई है चेतना गरल मानो पी लिया,
    पाखण्ड के इस व्यूह में मानो अधिक ही जी लिया,
    अम्बर आंसू रो रहा दिशाएं सब मौन है,
    जो निरंतर सुलगा रहा पूछता हूँ वह कौन है?
    बिसात बिछाए हैं शकुनि तो परिणाम संग्राम है,
    अज्ञात बैठा है धनुर्धर न जाने कौन किसका राम है?
    क्षण-क्षण में कौंधती है कटाक्ष वाली बिजलियाँ,
    फूल सब मुरझा चुके है लाचार है अब तितलियाँ,
    रक्त उतरा है आँखों में और जरूरत हुई तलवार की ,
    है ज्वाला सी धधकती दृग में प्रतिकार की.....

    न बची है वेदना न रुदन का है भाव कोई ,
    आक्रोश है या क्रोध है पर चाहता हूँ बदलाव कोई,
    दोगलेपन और धृष्टता का बस समूल नाश हो,
    खंजर लिए बैठे हैं जो बस उनका पर्दाफाश हो,
    है मार्तण्ड से विनती अब की शोले तो कहीं बरपाओ ज़रा
    है बादलो से विनती अब की बिजलियाँ तो कहीं गिराओ ज़रा,
    वर्ना भुजाएं फड़कती हुई फिर वार खड़ग सा कर जाएंगी,
    अन्तर में उठी आँधियों को कोई सीमायें न रोक पाएंगी,
    तितर- बितर करने को फिर जलजला ही आएगा,
    रौद्र तांडव देखकर फिर काल घबरा जाएगा,
    एक निस्सहाय की हँसी लौटाने को जरूरत है कुछ के संहार की,
    है ज्वाला सी धधकती दृग में प्रतिकार की.....
    ***************************************

    सर्वाधिकार सुरक्षित-
    नेमीचंद मावरी "निमय"
    ©mawari_nimay

  • mawari_nimay 97w

    शायरी

    तेरे नग़मों की बारिशें दिल की इस बंजर जमीं पे
    प्यार की फसलें बो गई,
    तेरी जुल्फों के साये में, आँखें शम्मा सी जल उठी,
    और रात चाँदनी हो गई ,
    जितनी दफ़ा तू दूर जाए, उतनी दफा मुझको सताये,
    अब आदत सी हो गई।
    ©mawari_nimay

  • mawari_nimay 102w

    एक शायरी

    मजहब कहाँ पूछती ये मोहब्बत यारों,
    तभी तो बेखौफ वो बाहों में सो जाती है,
    अगर कभी झगड़ा भी हुआ तो क्या,
    बड़ी ही जल्दी सुलह भी हो ही जाती है।
    ©mawari_nimay

  • mawari_nimay 102w

    हर हाल में जीओ

    अगर जीने की जिद्द है तो हर हाल में जिओ,
    अगर जीने का का जुनूँ है तो तंगहाल में भी जीओ,
    बारिश में भी जीओ, तूफ़ानों में भी जीओ,
    नदिया की धारा बन जीओ, समंदर की लहरें बन जीओ,
    मौत के हर बहाने से भी बहाना बना कर जीओ,
    डर के हर साये को भी डराकर जीओ,
    हर लम्हे में खुशियों के तराने गाकर जीओ,
    रोते हुए चेहरे पर झूठी मुस्कान लाकर ही जीओ,
    मगर जीने का मकसद है तो हर हाल में जीओ,
    निराशाओं में भी आशाओं के दीप जलाकर जीओ,
    दुःख में अपनों को भी आजमाकर जीओ,
    फिर भी अगर खौफ तुम्हारे दर पर दस्तक दे रहा हो,
    तो खौफ को सिरहाने लगाकर जीओ।
    आसमां की ऊँचाई जितनी सिफारिशें करो भले जिंदगी से,
    जितना भी जीओ जिंदगी से दिल लगाकर जीओ।
    ©mawari_nimay