misskadambari

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दिल की क़लम से दिल के ख़याल लिख रही हूँ .. हर दिन एक नया सपना बून रही हूँ..🙂

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  • misskadambari 63w

    रिश्ते की नज़ाकत
    #writersnetwork #writercommunity #pod

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    कभी कभी रिश्तों में
    साथ रहना नहीं
    बात करना ज़रूरी होता है।

    ©misskadambari

  • misskadambari 73w

    नज़र आना

    दर्द बहरे दिल सिसकियाँ ले रही हूँ मैं
    क्या ये तुमको नज़र आता है ?
    आज फिर दिल दिमाग़ से रो रही हूँ मैं
    क्या ये तुमको नज़र आता है?
    दिल ने तुमको बहुत पहले चुन लिया था
    हर दर्द हर ख़ुशी तेरे नाम कर रही हूँ मैं
    क्या ये तुमको नज़र आता है?
    हर वक्त जो मैं ही समझती हूँ
    इतना दर्द जो छिपा के रखती हूँ
    क्या ये तुमको नज़र आता है?
    ©misskadambari

  • misskadambari 75w

    प्यार की राह में

    हम इतना चल चुके हैं की,
    अब दिल बस थमने को कहता है।
    प्यार की राह में,
    इतना भटक चुके हैं की,
    अब दिल बस एक जगह,
    ना चाहते हुए,
    रुक जाने को कहता है।

    ©misskadambari

  • misskadambari 76w

    The night

    The night holds
    so many thoughts which cannot
    be unearthed by anyone
    else solely just by
    YOU.

    ©misskadambari

  • misskadambari 76w

    अनजान रास्तों पे लोगों से मिलना
    यूँही एक दूसरे से नज़रें टकराना
    उन रास्तों पे मुसाफ़िर बन जाना
    फिर से अकेले ही चलते रहना
    अगली सुबह वही मुस्कुराहट रखना
    अपने ग़म को छुपा कर मुस्कुराना
    ज़िंदगी का यही खेल और हर इंसान का खेलना।
    ©misskadambari

  • misskadambari 77w

    पन्ना

    अपनी आधि अधूरी कहानी लिखदी थी कुछ पन्नो में,
    बचपन से जब दुखी होती,
    सब गुमार निकाल देती उन्न पन्नो में,
    सबकुछ होने के बाद भी कुछ कमी थी,
    अक्सर उस हँसी के पीछे छुप जाया करती थी,
    जानते सब थे,
    पर पहचानते बस कुछ ख़ास थे,
    आज भी धूँड रही हूँ उस लड़की को,
    जो अपनी हँसी से हंसाती थी सबको,
    आज भी अधूरी है कहानी उसकी,
    उन्ही कुछ पुराने पन्नो में।।
    ©misskadambari

  • misskadambari 77w

    सच्च

    तेरा मेरा सच्च कोई नहीं जनता..
    तुझे मुझे कोई नहीं पहचानता..
    हर किसी ने कहा के तुम एकदूसरे के लिए नहीं..
    पर कमबख़्त दिल इन चीजों को नहीं मानता।
    आज भी उसी मोड़ पे भटक रहे हैं..
    दिल के हाथों मजबूर हो रहे हैं..
    ख़ुदा जाने क्या लिखा इस क़िस्मत में..
    जो अब भी उसी के लिए तड़प रहे हैं।


    ©misskadambari

  • misskadambari 77w

    इत्तेफ़ाक

    मैं मिला था तुझसे यूँही कहीं.
    फिर प्यार भी होगाया उसी वक्त वहीं.
    इत्तेफ़ाक पे इत्तेफ़ाक होते रहे हसीन.
    फिर मुलाक़ातें बेख़ौफ़ होती रहीं.
    बेपाक प्यार करने का जज़्बा हर किसी में नहीं.
    काश बता सकता दिल खोल के .. चाहत आज भी है यहीं.
    एक बार फिर होजाए इत्तेफ़ाक हसीन.
    और मिल जाऊँ तुझसे यूँही कहीं.
    ©misskadambari