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Reposts
  • musaafir__ 110w

    तलब

    तलब-तलब की बात है साहेब,
    किसी को इश्क की तो किसी को चाय की।।

  • musaafir__ 111w

    ❤️

    काम छोटा सा है साहब,
    कमबख्त चाय ने मशहूर कर रखा है।। ❤️

    -टपरीवाला

  • musaafir__ 112w



    बुखार-ए-इश्क में हो?
    दवा-ए-चाय हो जाए? ❤️

  • musaafir__ 113w

    तुम

    तुम्हें देखता हूँ तो मुस्कुरा देता हूँ, और लोग पूछते हैं
    "मैं खुश क्यों हूँ?" ❤️

  • musaafir__ 114w

    सुकून

    चीनी थोड़ी ज़्यादा, पत्तियाँ थोड़ी कम
    बारिश के मौसम में थोड़ी सी धूप, चाय, और तुम।। ❤️

  • musaafir__ 115w

    सुकून

    कभी फीकी कभी ज़्यादा मीठी हो जाए,
    सुकून का दूसरा नाम "अदरक वाली चाय" ।। ❤️
    ©musaafir__

  • musaafir__ 115w



    बे-मौसम बारिश में अदरक वाली चाय बना कर देखा है साहब,
    बंजर ज़मीन को "महफिल-ए-चाय" बनने में वक्त नहीं लगता।। ❤️
    ©musaafir__

  • musaafir__ 115w

    चाय

    रिशतों को कुछ इस तरह सम्भाला है जनाब,
    लोग यूहीं "महफिल-ए-चाय" के लिए मौसम नहीं देखते। ❤️
    ©musaafir__

  • musaafir__ 115w

    स्वाद

    यूहीं नहीं लिखता इस चाय के खातिर इतना कुछ जनाब,
    मोहब्बत में टूटे हुओं को फिर मोहब्बत में गिरते देखा है मैनें।। ❤️
    ©musaafir__

  • musaafir__ 115w



    हर घूँट में कहानियाँ छुपाई है साहब।
    ये चाय से मोहब्बत यूहीं नहीं हुई है।। ❤️
    ©musaafir__