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  • naajnaaj 71w

    काश! ख्वाबों के मरने से, ख्वाब ही मरते महज़

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    ख्वाब जो कछ सरेआम कत्ल हुए
    हकीकत झूल गयी थी बंद कमरे में
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 71w

    शिकायतें.....
    तुम से करे , खुद से या खुदा से

    उफ्फ! ये बे-पते की शिकायतें
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 71w

    रह- रह के आसमाँ में उठते रहे उजाले
    एक एक करके जलाये हमने ख्वाब सारे
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 71w

    अनकहे ढेरो शब्द जो कहे नहीं गये कभी
    कभी डर से , कभी हिचक से
    कभी दूरियों, परिस्थितियों की वजह से
    उन्हीं शब्दों की सजी हुई लाश है `कविताʼ
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 132w

    कुछ इस तरह उसने
    इश्क़ का काईदा बदल दिया
    शिकायतें वही रही
    और लहज़ा बदल दिया
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 140w

    ©Roshan Singh

  • naajnaaj 144w

    मेरे इश्क़ की बुलंदियाँ
    उसके प्यार की जमीं देखी है मैंने

    रुलाती है जिंदगी जब जब मुझे
    उसकी आँखों में नमी देखी है मैंने
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 146w

    कुछ और भी है अब हासिल करने को?
    इक तू, और 'तेरी' मैं
    काफी है इश्क़ मुकम्मिल करने को
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 146w

    रोज छूता है वो नये आयाम
    आखिर क्यूँ ना करूँ, मैं अपने इश्क़ पर गुमान

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    खुद को गिरवी रख दिया उन्होंने
    मेरी नीलामी की खबर जो मिली
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 152w

    रात ओढ़ती रही कालिमा
    कि चाँद का वजूद खिले
    चाँद मिटाता रहा खुद को
    कि रात का असर दिखे

    आखिर
    पूरनमासी के रोज
    रात का ख्वाब पूरा हुआ
    और अमावस को चाँद का
    ©naajnaaj