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  • nawazish_nilesh 123w

    सवाल

    बात यही पर खत्म करें
    की अभी हिन्दू मुस्लिम और करें
    तुम अफवाहों में आ कर झगड पड़े
    मासूमों के घर पर बरस पड़े
    मासूम जिंदगियों का खून किया
    अभी और कितनो के पीछे पड़े??

    बात यही पर खत्म करें
    की विरोध समर्थन और करें ??
    ©nawazish_nilesh

  • nawazish_nilesh 123w

    ग़ज़ल

    जिन्दगी से भागे भागे जाते कैसे हो,
    इतना दर्द,ये बताओ खुशियां लाते कैसे हो।

    कोई काम भी करते हो की खाली ग़ज़लें गाते हो
    छोड़ो ये सब,अच्छा ये बताओ कमाते कैसे हो।

    इतनी खुशियां पा कर टूट से गए हो।
    अच्छा ये बताओ,खुद हस्ते हो उसे रुलाते कैसे हो।

    तुम्हे तीर चलाना भी आता है क्या, बताया नहीं
    सिखाना जरा,तीर एक निशाने चार लगाते कैसे हो।

    मन करता है कि कभी तुम्हारी कहानी भी सुनू
    पहले ये बताओ, इतने किस्से लाते कैसे हो।

    तुमने अभी कहा कि तुम्हे सियासत नहीं आती
    जरा ये बताओ, जिन्दगी से ऐसे खेल जाते कैसे हो।

    © नवाज़िश_निलेश

  • nawazish_nilesh 123w

    ग़ज़ल

    फूल खुश्बू के खिलते हैं अफ्साने में
    दर्द जिन्दगी के मिलते हैं बहाने में।

    हर मोड़ पे हमने फूल बिछाए रख्खे थे
    सदियां लगा दी आपने यहां आने में।

    आप जैसे लोग न ही मिले तो अच्छा है
    जमाने लगते है आप से बिछड़ जाने में।

    तुने कहा साथ रहना है, तो, देखते हैं
    कितने सक्षम हो मेरी हिंदी समझ पाने में।

    तुम अायी या हश्र साथ लाई हो,सह लेंगे,
    देखे है दुख हमने भी ,कई,जमाने मे ।

    दिनों के बाद मैंने घर को घर बनाया था
    तूने तनिक न सोचा मेरा आशियां जलाने में।

    © नवाज़िश_निलेश

  • nawazish_nilesh 123w

    ग़ज़ल

    ये ग़ज़लें, नज्म़ ये औ शायरी है
    मेरी नहीं ये तेरी डायरी है।

    इश्क़ में कितनो को हसाया - रुलाया है
    बहादुरी नहीं ये तेरी कायरी है।

    पागल सा फिरता है तेरी गलियों में एक वो भी
    लगता है बातिल का असर अब तक जारी है।

    तेरे पास कोई जादू है तो खुदा से डर
    क्योंकि उसका कहर सब पर भारी है।

    सुना है कि सरकार सच कि आई है इस बार
    पर मुझे तुझमें कोई बदलाव नजर नहीं आरी है।

    तुम्हे सच का सच से सच में वाकिफ़ करवाना है
    देखना अबकी ग़ज़ल में तुम्हारी बारी है।

    © नवाज़िश_निलेश

  • nawazish_nilesh 123w

    ग़ज़ल

    तेरे बातों से मै पर्दा कर रहा हूं
    मलाल है मै ऐसा कर रहा हूं।

    तुमने किया जो वादा ए फर्दा मुझसे
    मै आज भी उसको पूरा कर रहा हूं।

    प्यार को प्यार से हराते कैसे है
    इसी बात से खुद को संजीदा कर रहा हूं।


    तुझसे नफरत है इतनी की क्या बताएं
    तेरी बातों से खुद का किनारा कर रहा हूं।

    तेरे दिए हुए दर्द जो आज ग़ज़लें बनी है
    उन्हीं ग़ज़लों से खुद का गुजारा कर रहा हूं।

    तेरे दिखाएं सपने को जिन्दगी मान बैठा
    हर सपने का आज मै सफाया कर रहा हूं।

    © नवाज़िश_नीलेश

  • nawazish_nilesh 123w

    चाय

    उनको देखते ही लोग आय हाय करने लगे,
    हमारी तलब ही लाजवाब निकली
    साहब
    हम तो चाय चाय करने लगे।
    ©nawazish_nilesh

  • nawazish_nilesh 123w

    आज का सच

    मेरे जख्म पे मरहम लगाने आये हो
    या किसी बहाने फोटो खीचाने आये हो
    पाप मैंने जो किए है पिछले जन्म में
    तो तुम क्यों गंगा नहाने आये हो।
    ©nawazish_nilesh

  • nawazish_nilesh 124w

    ग़ज़ल

    चल फिर किसी का दिल जलाया जाय
    आज फिर किसी से दिल लगाया जाय।

    परंदो के लिए प्यार से शजर लगाया जाय
    मेरा घर काट के तेरा का घर बनाया जाय।

    तुझे बंदगी मान के तेरे दर पे आया जाय
    ब दस्तूर न रहे शहर अब यहीं से सर झुकाया जाय।

    तार तार हुए सपने को फिर से दिखाया जाय
    समझ नहीं पाता खुद को हसाया जाय
    या रुलाया जाय।

    तुम्हारी बातिल बातों पर ऐतबार किया जाय
    या तूने दिए जो अजाब उसपे मरहम लगाया जाय।

    यूं ऐसे हार मानने वालों में से नहीं है हम
    जिंदगी चल फिर से तुझे आजमाया जाय।

    © नवाज़िश_निलेश

  • nawazish_nilesh 124w

    कलम

    वो कह रहे थे कि
    इतनी पढ़ाई कर रहे हो
    कौन सी ताकत हासिल होगी
    हमने कहा कलम की
    और महफ़िल तालियों से गूंज उठी।
    ©nawazish_nilesh

  • nawazish_nilesh 124w

    जंगल

    हरा भरा जंगल था,
    उस जंगल में बहुत से पेड़ थे।
    उन पेड़ो को काटने के लिए,
    कुछ लोग आये है।
    वो पेड़ को काटे जा रहे हैं,
    पर पेड़ अपना दर्द सहे जा रहे है।
    अपना दर्द सहते सहते कह रहे है,
    की हम क्यूं नहीं अपना दर्द सहे,
    जो हमसे कट के निकल रहे हैं,
    वो भी तो हमारे ही समाज - जात और धर्म से है
    और इस तरह से वो पेड़ काटने वाले बहुमत पा जाते है और जीत जाते है।
    अंत में पूरा का पूरा जंगल एक वीरान - उजाड़ जगह हो जाता है।।
    © नवाज़िश_निलेश