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  • nikhilkhandare 9w

    **नई दुनियाॅं**

    तुम बन जाओ चांद समंदर का,
    मैं बन जाऊं नाव आसमान की,
    तुम बन जाना महबूबा मछलियों की,
    मैं सितारों को सैर कराऊंगा आसमान की।

    तुम बन जाओ चकाचौंध गांव की,
    मैं बन जाऊ बूढ़ी नानी शहर की,
    तुम गांव की हर बस्ती में शहर वाली रोशनी भर देना,
    मैं थकी आबादी को पारियों की कहानियां सुना दूंगा।

    तुम बन जाओ ताजगी पत्थरों की,
    मैं बन जाऊं कठोरता फूलों की,
    तुम पत्थरों को बता देना दर्द मुरझाने का,
    मैं फूलों को दिखा दूंगा गर्व मूरत बनने का।

    तुम बन जाओ चंचलता मौत की,
    मैं बन जाऊं सुना कफन जिंदगी का,
    तुम मौत को सुनाना जोख़िम जीवन जीने का,
    मैं ज़िंदगी को यथार्थ समझाऊंगा स्वर्ग का।
    ©nik_heal_khandare

  • nikhilkhandare 10w

    **जीवित कमरा और खुमारी में तुम!**
    सिने में कुछ अरमान हो बचे कोई तो बताना,
    वरना हवा का लेनदेन तो मेरे कमरे की खिड़की भी करती है।

    सुनी बातों पर विचार करने की चेतना बची हो थोड़ी तो बताना,
    वरना बस सुनने का काम तो मेरे कमरे की दीवारें भी बखूबी करती है।

    दिल में बसी यादों को मिटाने का प्रयास भी कर रहे हो तो बताना,
    वरना चीजे संभाल कर रखने में मेरे कमरे में रखा टेबल भी माहिर है।

    खुली आंखों से कुछ देख भी पा रहे हो तो बताना,
    वरना ये जलने-बुझने का खेल तो मेरे कमरे की बत्ती भी खेलती है।

    गर रोना आए कभी तब आंख से आंसू बह जाए तो बताना,
    वरना मेरे कमरे में मटका भी अक्सर बाहर से नम ही रहता है।

    अगर चलती धड़कन महसूस कर भी लेते हो तो बताना,
    वरना बेवजह टीक-टिक तो मेरे कमरे में टंगी घड़ी दिनभर करती है।

    खामोशी में भी खुद से बातें कर भी लेते हो तो बताना,
    वरना मेरे कमरे का अंधेरा कोना भी सदियों से खामोश रहता है।

    बस छोटीसी चीज है जो तुम्हे मेरे कमरे से बहुत अलग बनाती है,
    मेरे कमरे में सिर्फ एक खिड़की है और तुम्हारी सोच को तो कोई दीवार ही नहीं।
    ©nik_heal_khandare

  • nikhilkhandare 10w

    प्रिय वादा...

    प्रिय वादा, तुम्हे मैने जेब में जो रखा, तुमने मेरे दिल पर वार कर दिया,
    की तुमने सांस लेना तो तय किया पर आह भरने से इनकार कर दिया,

    की कलाई पर घड़ी तो तुमने नज़ाकत से बांध दी, उसमे चाबी भी भर दी, पर दिल से इंतजार करने हक तुमने, कठोरता से छिन लिया

    की हथेली तो मुझे सलामत दी,उसपर लकीरें भी कुरेद दी, पर जब उनकी किसी से जुड़ने की बारी आई तो तुमने, तकदीर को बीच में टोक दिया

    की किताब तो तुमने मुझे पकड़ा दी, भाषा भी मुझे समझा दी, मगर उसमे पड़ा पुराना गुलाब छूने से तुमने, उंगलियों को परहेज़ कर दिया

    की मेरे कदमों को तुमने मंदिर का रास्ता तो दिखा दिया पर जब दुवा में उसे मांगने की बारी आई तो जलते कपूर से तुमने, मेरा हाथ जला दिया

    की दिखे गर वो किसी चौराहे पर तो नजरों को तुमने नहीं रोका, मगर जब भर आई वही आंख तो पलको को तुमने, नहाने से मना कर दिया

    की उस ठहरे वक्त को तुमने बा-इज्जत बरी तो कर दिया मगर उसमे बने मासूम लम्हों को तुमने, फांसी पर लटका दिया

    प्रिय वादा,तुमसे थोड़ी वफाई जो निभाई, तुमने मुझे मंजर से हटा दिया,
    की ज़िंदगी काटना तो तुमने बड़े शौक़ से लिख दिया पर ज़िंदगी जीना तुमने, उसी बे-रहमी से मिटा दिया।
    @nik_heal_khandare

  • nikhilkhandare 11w

    Life won't gives you always what you want,
    But
    Sometimes you'll have to be satisfied with what's good for you.

    ©nikhilkhandare

  • nikhilkhandare 11w

    I know you are fickle,
    But it's not an attraction as well.

    ©nikhilkhandare

  • nikhilkhandare 12w

    प्रिय कमरा

    प्रिय कमरा, जब वो आए मुझसे मिलने तो उसे कुछ भी मत बताना,
    की कैसे मैं उसके इंतजार में अपनी रातें खुली आंखों से गुजार लेता हूं,
    की कैसे मैं उसकी चाह में हर पूनम की रात में खिड़की से चांद को भीतर बुला लेता हूं,
    की कैसे मैं उसकी याद में अपनी मीठे पानी की प्यास अक्सर खारे अश्कों से मिटा लेता हु ,
    की कैसे उसकी महक का नशा जहन से उतरने ना पाए इस चाहत में फूलदान को तन्हा खाली छोड़ देता हु,
    की कैसे उसकी बालों को हवा में लहराने की पसंद के चलते मैं ठीक पंखे के नीचे की कुर्सी आज भी खाली छोड़ देता हु,
    की कैसे मैं उसके आने की आस में खुले दरवाजे पर रात भर नज़रे टिकाए आंखे नम कर लेता हु,
    की कैसे मैं उसका दीवार की दूसरी ओर होने की आशंका में दीवारों की दरारों से झांक लेता हूं,
    की कैसे मैं उसकी किताब पढ़ने की आदत से वाकिब मेरी हर किताब टेबल पर बुकमार्क लगाकर छोड़ देता हु,
    की कैसे मैं उसकी रात में आने की आदत से दीवार पर लटकी तस्वीर पर चमकता सूरज भी ढक देता हूं,
    की कैसे उसके पायल की छन्-छन् मुझे दूर से सुनाई दे इस हसरत में मैं घड़ी की टिक-टिक का शोर दबोच लेता हु,
    की कैसे उसके जल्दी आने की बेसब्री में उस घड़ी के कांटो को उंगलियों से जल्दी जल्दी घुमा लेता हूं,
    प्रिय कमरा जब वो आए मुझसे मिलने उसे बिलकुल मत बताना की,
    मैं आज भी उसको ख़्वाब में मेरा समझकर सुबह तक अक्सर दिल को बहला लेता हूं।

    ©nikhilkhandare

  • nikhilkhandare 12w

    It's not easy to live without you
    But
    Air desperate to become breath

    ©nikhilkhandare

  • nikhilkhandare 12w

    अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए
    जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए

    जिस की ख़ुश्बू से महक जाए पड़ोसी का भी घर
    फूल इस क़िस्म का हर सम्त खिलाया जाए

    आग बहती है यहाँ गंगा में झेलम में भी
    कोई बतलाए कहाँ जा के नहाया जाए

    प्यार का ख़ून हुआ क्यूँ ये समझने के लिए
    हर अँधेरे को उजाले में बुलाया जाए

    मेरे दुख-दर्द का तुझ पर हो असर कुछ ऐसा
    मैं रहूँ भूका तो तुझ से भी न खाया जाए

    जिस्म दो हो के भी दिल एक हों अपने ऐसे
    मेरा आँसू तेरी पलकों से उठाया जाए

    गीत अनमन है ग़ज़ल चुप है रुबाई है दुखी
    ऐसे माहौल में 'नीरज' को बुलाया जाए

    - गोपालदास नीरज

  • nikhilkhandare 12w

    When Im out of ideas,
    First sip of piping hot tea always pour some freezing thoughts into vacuum of my heart.
    And last sip of luke warm tea of another cup draw a full stop after last sentence of the poem.

    ©nikhilkhandare

  • nikhilkhandare 13w

    Comfort will find you only when you lose it!

    ©nikhilkhandare