noopur07

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  • noopur07 2w

    क्या तुम्हें पता है..
    हमेशा से एक ख्वाहिश थी कि,
    पहाड़ हो, नदी हो,
    और ......
    किनारे पर एक छोटे से कॉटेज की टैरिस पर बैठे हम तुम..
    दो चाय के प्यालों के साथ घंटो बाते करे..
    आज पहाड़ के पास मैं हूं, किनारे एक नदी भी है जिसका शोर कानों में हलचल मचा रहा हैं।
    चाय भी हमने ऑर्डर कर ली है।
    बस..... तुम साथ नही हो....
    बाते भी बहुत है मेरे पास.. बस बात करने वाला कोई नहीं है।
    तो बैठे है पहाड़ों पर सुकून तलाश में बस अब तुम साथ नही हो।
    ©noopur07

  • noopur07 7w

    जब आप भरोसा करते हो, बस वही गलती करते हो,
    क्यू कि भरोसा और उम्मीद सिर्फ टूटने के लिए बनी है।
    ©noopur07

  • noopur07 7w

    जिन लोगो को आप दिल के करीब जगह देते है ,.
    वही लोग अक्सर तकलीफ भी बेवजह देते है।
    ©noopur07

  • noopur07 9w

    गुड़िया....

    कल की हसीन बारिश के बाद, ये सड़के मानो बाहें फैला कर खड़ी है।
    इस मिट्टी को सोंधी खुशबू एक नई ताजगी बिखेर रही है।
    और अचानक से नज़रे वहां रुकी जहां रोज रुकती थी,
    जिन नजरो की चमक हर सुबह मुझे जीने का हौसला देती थी।
    हर रोज हमारी सिग्नल पर 30 sec की मुलाकात हुआ करती थी,
    पर वो पूरे दिन का हिसाब मांग लिया करती थी।
    और आखिर में उसका ये कहना कि... कल फिर मिलेंगे दीदी.. मानो मेरी दिनचर्या का एक हिस्सा था।
    पर आज उन नजरो में थोड़ी मायूसी और खामोशी थी।
    जिसे देखकर मैं थोड़ा हैरान सी थी।
    तो आज वो 30 sec का दायरा टूट गया था,
    मेरे सवालों का पिटारा हाथों से मानो छूट गया था।
    उसके नन्हें होठ अपना दर्द बयां कर रहे थे,
    उसके मिट्टी के खिलौने मिट्टी में मिल रहे थे।
    वो जिन खिलौने को खरीदकर नही बल्कि, बेचकर खुश हुआ करती थी,
    उन्हें कल रात की तेज बारिश अपने साथ बहा ले गई थी।
    जो बारिश सुहानी और ताजगी से भरी थी,
    कभी सोचा न था कि किसी के लिए डरावनी भी हो सकती थी।
    जो खिलौने हमारी बातो का जरिया हुआ करते थे...जैसे– तुम्हारे गुड्डे की गुड़िया कहा हैं? या फिर इसकी नाक थोड़ी टेढ़ी मेढ़ी सी हैं।
    मानो इन बातो का सिलसला थम सा गया था,
    मानो उसके हाथ से सब निकल सा गया था।
    मैंने उस से पूछा.... और तुम्हारा स्कूल?..“पापा ने किताबो के पैसों से नए खिलौने बनाने का सामान खरीद लिया है, और मेरा स्कूल कुछ दिन के लिए बंद कर दिया है।
    मैं शांत और चुपचाप खड़ी थी...बस उसे एक टक देख रही थी..
    कि अचानक से उसकी बुझती आंखो में एक उम्मीद की चमक सी दिखी..उसके होठों में दबी हुई एक मुस्कान सी दिखी।
    वो बोली...“ दीदी... तुम देखना इस बार और सुंदर खिलौने बनायेगे और जब पैसे आयेगे तो नई किताबें भी खरीदेगे”..
    और तब आप मुझे सामने वाले पार्क में थोड़ी देर पढ़ाएगी न??
    आज एक सवाल मन में कौंध गया कि जिन तकलीफों की हम बात करते है...और हर जाते है?? क्या सच में हार माननी चाहिए??
    उसके इन उम्मीदों भरे सवाल जवाब ने मुझे उलझन में डाल दिया.. मैं निशब्द सी खड़ी बस इतना ही कह सकी....
    “ जरूर गुड़िया"

    .
    ©noopur07

  • noopur07 10w

    तुम हर रोज याद आते हो मुझे...
    कभी सुबह की चाय के साथ, तो कभी सूरज की किरणों के साथ..
    कभी कभी तो जैसे बुलाते हो..और कहते हो कि हाथ जोर से थामना...
    हाथ कहीं छूट न जाए , रिश्ते की डोर कही टूट न जाए...
    तुम रोज आज भी कहते हो मुझसे कि मुझसे अजीज कोई नही है तुम्हारा..
    तुम थामते हो मेरा हाथ और कहते हो कि कोई नही है मुझसे प्यारा..
    तुम सब बताते हो कि कैसे तुम्हें मेरी हर बात याद है..
    कैसे हम आज भी ताउम्र के लिए साथ है..
    तुम आज भी बहुत याद आते हो मुझे...
    तुम हजारों वादे करते हो...मुझे न सताने के , रूठू मैं तो मानने के..
    तुम सब करते हो... पर सिर्फ ख्वाबों में....
    सब कुछ निभाते हो पर सिर्फ ख्वाबों में..
    नींद टूटी तो जो मंजर था वो कुछ और था...
    ये जो कहानी थी वो मेरे सपनो का दौर था ।
    क्यू कि हकीकत में तो तुम आज भी हर लम्हा याद आते हो.....मुझे
    ©noopur07

  • noopur07 13w

    सुना था कि ...
    जिन रिश्तों को निभा न सको उन्हें खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ देना चाहिए।
    पर हकीकत में ये आपने कर दिखाया है।
    इन चंद लाइनों को अपने रिश्ते में अजमाया है।
    कभी वक्त नहीं है... ये कहकर ,
    तो कभी थोड़ा इंतजार कर लो...ये कहकर
    हर दफा आपने वही खूबसूरत मोड़ बनाया है।
    ©noopur07

  • noopur07 13w

    आखिर क्यूं?? ये भी न पूछ सके आखिर में...
    कुछ इस तरह अपनाकर , अलविदा कहा था उसने।
    ©noopur07

  • noopur07 13w

    हर शख्स सिर्फ अपने हिसाब से आपको चाहता है,
    थोड़ा सा अपने दिल की, की तो ... अलविदा कह दिया ।
    ©noopur07

  • noopur07 14w

    अलमारी का कुछ अस्त व्यस्त सामान देख रही थी....
    कि अचानक से नजर उस दराज पे गई , जो शायद कई बरस से बंद है.....
    वो यादें जिन्हे भूलने की नाकाम कोशिश हर रोज करती हूं,
    वो उम्मीदें जिनके टूटते ही हर रोज मैं भी टूटा करती हु।
    वो पुरानी अच्छी यादें जो आज खौफनाक मंजर सी लगती है,
    वो एल्बम....जिनमे कुछ तस्वीरे कैद हुआ करती है।
    अब वो तस्वीरे सिर्फ अरमानों के कत्ल की निशानी है,
    हर तस्वीर बहुत करीब से देखा , फिर से मेरी आंखों में पानी है।
    चंद पन्ने पलटे ही थे, कि दिल भर आया हैं।
    आपके धोखे ने अपना असर बखूबी दिखाया है।
    उन तस्वीरों को उसी दराज में फिर से कैद कर दिया,
    जिन कड़वी यादों को आज तक है मैने जिया।
    उस अलमारी को बंद कर.. उस दर्द को भी दबा लिया।
    सबके सामने आकर एक बार फिर मैने मुस्कुरा दिया।
    ©noopur07

  • noopur07 14w

    कुछ तुम समझ लेंना , कुछ हम समझ लेंगे ,
    बस साथ उम्र बिताने के लिए इतना काफी है।
    तुम साथ देना , हम हाथ थाम लेगे,
    बस साथ चलने के लिए इतना काफी है।
    तुम नजरे उठाना , हम नज़रे झुका लेगे,
    इज़हार करने के लिए इतना काफ़ी है।
    अगर टूटू कभी तो प्यार का स्पर्श देना
    अगर छूटू कभी तो इंतजार कर लेना,
    मुझे अपना बनाने के लिए बस इतना काफी है।
    मेरी नादानी पर मुस्कुरा लेना,हम ख़ामोशी को समझ लेगे,
    तुम चुपके से हाथ पकड़ लेना, हम वादा उम्र भर का कर लेगे
    खुश रहने के लिए , बस इतना काफ़ी है।
    हम चाय कभी बना देगे, तुम साथ शाम बिता लेना,
    अगर नाराज हो जाऊ मैं, तुम फौरन गले लगा लेना।
    रूठी मैं को मनाने के लिए, बस इतना काफी है।
    ये मेरी उम्मीदों का पिटारा है, जो पन्नो पे आ बिखरा है,
    अगर ना हो पाए ये भी तुमसे, तो नज़रे मुझसे चुरा लेना,
    मोड़ लेना रास्ता अपना, मेरी गली तुम न आना।
    अकेले चलने के लिए , बस इतना काफी है।
    ©noopur07