palbhagya

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Reposts
  • palbhagya 29w

    Word Prompt:

    Write a 6 word short tale on Evoke

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    पुकारा बहुत मैंने अपने अहम को,
    जानें कहाँ खो गया मेरा वजूद

  • palbhagya 46w

    Word Prompt:

    Write a 6 word micro-tale on Balance

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    जिन्दगी को संतुलित करने चलें थे,
    हाथ अपनों का जब हम भीड़ में अकेले थे!

  • palbhagya 47w

    Word Prompt:

    Write a 8 word short tale on Overlook

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    देख कर भी अनदेखा कर दिया,
    समझ लिया हमने उसने अपना कह कर पराया कर दिया!

  • palbhagya 47w

    Word Prompt:

    Write a 8 word short tale on Expectation

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    चाह तो हम बहुत लेते हैं दूसरों से,
    मगर हम कितना देते हैं ये नहीं सोचते!

  • palbhagya 89w

    आज लिख रहें सभी मातृत्व दिवस पर कविता,
    अपने भाव की बहा रहें एक निर्मल पावन सरिता,

    सबने समर्पित किया अपना अपना एहसास,
    कुछ थे अपनी माताओं से दूर कुछ थे पास,

    जो थे अपनी मां के पास उन सा कोई खुश नसीब नहीं,
    जो थे दूर मां के आंचल के छांव तक जाने कोई तरकीब नहीं,

    घर के आंगन की तुलसी के दीपक जैसी होती है मां,
    मन्दिर की पावन घंटे की झनकार जैसी होती है मां

    लिखा तो उस पर जाता है जो शब्दों में बयां हो जाएं,
    मां के मातृत्व को शब्दों में कैसे पिरोया जाएं,

    बिन बोले जो सब समझ जाएं वहीं होती है मां,
    जब आप दुखी हो तो चेहरा पढ़ लेती है मां

    बेटी बहू पत्नी बहन है कितने रूप नारी के,
    जो सारे रिश्तों को बांध कर रखें वो होती है मां।

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    आज लिख रहें सभी मातृत्व दिवस पर कविता,
    अपने भाव की बहा रहें एक निर्मल पावन सरिता,

    सबने समर्पित किया अपना अपना एहसास,
    कुछ थे अपनी माताओं से दूर कुछ थे पास,

    जो थे अपनी मां के पास उन सा कोई खुश नसीब नहीं,
    जो थे दूर मां के आंचल के छांव तक जाने कोई तरकीब नहीं,

    घर के आंगन की तुलसी के दीपक जैसी होती है मां,
    मन्दिर की पावन घंटे की झनकार जैसी होती है मां

    लिखा तो उस पर जाता है जो शब्दों में बयां हो जाएं,
    मां के मातृत्व को शब्दों में कैसे पिरोया जाएं,

    बिन बोले जो सब समझ जाएं वहीं होती है मां,
    जब आप दुखी हो तो चेहरा पढ़ लेती है मां

    बेटी, बहू, पत्नी, बहन है कितने रूप नारी के,
    जो सारे रिश्तों को बांध कर रखें वो होती है मां।
    ©palbhagya

  • palbhagya 89w

    स्वच्छ निर्मल हरियाली में गुम हो जाऊं मैं ऐसे,
    न हो कोई फिक्र वहां पर बहती रही मैं पवन के जैसे,

    तृष्णा मेरी तृप्त हो जाएं स्वच्छ पावन शांत अरण्य में,
    मन मेरा गोते लगाए निर्मल सरोवर की तरंग में,

    मेरे विचार मुरली बन जाएं ख़्वाब मेरे किशन बनते जाएं,
    मैं रमती जाऊं उनमें वो मुझमें रमते जाएं,

    मैं चलूं विकास के पथ पर,
    मुझको मेरी मंजिल मिल जाएं।

    ©palbhagya
    #verdant @mirakee
    @mirakeeworld
    @writerstolli
    @writersnetwork

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    स्वच्छ निर्मल हरियाली में गुम हो जाऊं मैं ऐसे,
    न हो कोई फिक्र वहां पर बहती रही मैं पवन के जैसे,

    ©palbhagya

  • palbhagya 90w

    पहली दफा मैंने पैग़ाम भेजा,
    अपनी जुनून की कलम से,
    सपनों का कलाम भेजा।

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    पहली दफा मैंने पैग़ाम भेजा,
    अपनी जुनून की कलम से,
    हौसलों का कलाम भेजा।
    ©palbhagya

  • palbhagya 91w

    कई बार हम लोगों ने देखा होगा किसी पीपल वृक्ष के नीचे खंडित मूर्तियों को, बस मैं उन्हीं खंडित मूर्तियों की मनोदशा का वर्णन करने की कोशिश कर रही हूं आशा हैं आप सभी को पसंद आए।।

    अगर कुछ कमी रह गई हो तो आप सभी से विन्रम निवेदन हैं कि अपने सुझाव दे।��

    #devotional #life #thought #diary @mirakee
    @mirakeeworld @writerstolli @writersnetwork





    देखा होगा आपने भी पीपल वृक्ष के नीचे मुझे,
    मैं वहीं माटी की मूरत हूं जो शोभा थी कभी आपके घर की,

    हुई थोड़ी सी खंडित तो बाहर का रास्ता दिखा दिया,
    ये भूल गए मेरे आकर्षण का मोल कितना अच्छा अदा दिया,

    शिल्पकार ने मन चाहा वैसा आकार बना दिया,
    उस पर रंग चढ़ा कर माटी की कीमत को बढ़ा दिया,

    आज पड़ी हूं उसी खुले आसमान के नीचे,
    जैसी पहले थी आंधी-पानी ने मिल कर मुझे फिर से माटी में मिला दिया।

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    देखा होगा आपने भी पीपल वृक्ष के नीचे मुझे,
    मैं वहीं माटी की मूरत हूं जो शोभा थी कभी आपके घर की,

    हुई थोड़ी सी खंडित तो बाहर का रास्ता दिखा दिया,
    ये भूल गए मेरे आकर्षण का मोल कितना अच्छा अदा दिया,

    शिल्पकार ने मन चाहा वैसा आकार बना दिया,
    उस पर रंग चढ़ा कर माटी की कीमत को बढ़ा दिया,

    आज पड़ी हूं उसी खुले आसमान के नीचे,
    जैसी पहले थी आंधी-पानी ने मिल कर मुझे फिर से माटी में मिला दिया।
    ©palbhagya

  • palbhagya 91w

    दुख दर्द से बड़ा है या छोटा,
    पता चला जब दर्द दिल में उठा,
    दुख में आंसू बरसा करें,
    दर्द का एहसास न हुआ...??

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    दिल के दरवाजे पर दर्द की दस्तक हुई,
    तन के पिंजरे से रूह उड़ गई।
    ©palbhagya

  • palbhagya 92w

    आज जाने क्यों मन कुछ,
    खाली खाली सा लगने लगा,
    जब जो सोचा वो हुआ नहीं,
    अब वक़्त का पहरा छाने लगा,

    सागर सी गहरे सपनों में,
    हम आज क्यों खोने लगें,
    मन की उलझन को,
    उम्मीदों में पिरोने लगें,

    बन गई गले का हार,
    मेरी अभिलाषाओं की कलियां सभी,
    मुकुट सज जाएं गर सफलता का,
    बन जाऊं मैं रानी अपने मन की।।


    @mirakee @mirakeeworld
    @writerstolli @writersnetwork
    @hindiwriters
    #motivational #positive #diary #life
    #selfmotivation #thought

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    आज जाने क्यों मन कुछ,
    खाली खाली सा लगने लगा,
    जब जो सोचा वो हुआ नहीं,
    अब वक़्त का पहरा छाने लगा,

    सागर सी गहरे सपनों में,
    हम आज क्यों खोने लगें,
    मन की उलझन को,
    उम्मीदों में पिरोने लगें,

    बन गई गले का हार,
    मेरी अभिलाषाओं की कलियां सभी,
    मुकुट सज जाएं गर सफलता का,
    बन जाऊं मैं रानी अपने मन की।।
    ©palbhagya