physics_wali_writer

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ek din meri kitaab chhapegi aur log tumhe pdhenge�� physics lecturer���� insta id:-physics_wali_writer

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  • physics_wali_writer 6w

    बेपरवाही से हमने भी आज जीकर देखा,
    उसकी आँखों का नीम नशा पीकर देखा।

    नज़रे चुराकर भी वो सब कुछ कह जाती ,
    इस दफा हमनें भी होठों को सी कर देखा।

    कभी डरते थे नाज़ुक दिल के टूट जाने से ,
    आज तेरा हर ख़्वाब टुकड़ों में बिखर कर देखा।

    हम धड़कन पर बेशक काबू कर लेते मगर,
    जाते जाते क्यूँ तुमने इस क़दर मुड़कर देखा ।

    सहम जाता था ये मासूम दिल तुम्हें खोने से,
    तुम गैर हो प्यार से इसको कह्कर देखा।
    Ranu ranka
    ©physics_wali_writer

  • physics_wali_writer 9w

    लोगों को अक्सर शिकायतें रहती है
    कि वो खुलकर नहीं हँसता
    या हंसते हुए तस्वीर नहीं लेता अपनी ।
    बाहरी दुनिया के लोग,
    जिन्होंने उसे करीब से नही जाना
    उनका मानना है कि शायद वो हंसते हुए
    अच्छा नहीं लगता होगा ।
    मैं भी उनमें से एक होती
    गर हमारा मिलना ख्वाब में ना हुआ होता ।
    मेरा सामना उससे हकीकत से
    ज्यादा ख्वाबों में हुआ है ,
    जहां वो खूब बातें करता है,हँसता है ।
    तो जिन लोगों ने भी नहीं देखा
    उसे खुलकर हंसते हुए,
    उन्हें बताना चाहूंगी
    कि जो उसे देखकर बढती है धड़कने तुम्हारी,
    उसके मुस्कुराने पर कुछ पल के लिए रुक जाती है वो ।
    तुम कुछ और देखना ही नही चाहोगे उस
    मंजर के सिवा ।
    उसकी मुस्कान को देखने के लिए
    तुम्हें दिल को आंखों में उतारना होगा ।
    बेशक तुम अब तक उसकी मासूमियत के कायल रहे हो
    मगर जब ये मासूमियत मिलती है उसकी मुस्कान के रंग में
    तब दुनियां का हर रंग फीका लगने लगेगा तुम्हें ।
    उसकी आँखों की चमक
    किसी भी शहर की चकाचौंध से दूर तुम्हें
    अपना आशियाना लगेगा ।

    यकीनन तुम्हें हर उस शख्स से रंज होगा
    जो उसे मुस्कुराते हुए देखता होगा ।
    ❤️

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    जब वो मुस्कुराता है ।
    ©physics_wali_writer

  • physics_wali_writer 10w

    जमादी -nonliving things

    #Mirakeeworld #love #life #poetry #writingcommunity

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    हूनर है उसमें जमादी जिंदा करने का,
    मुझे उसकी तस्वीरों का हिस्सा है बनना।
    ©physics_wali_writer

  • physics_wali_writer 10w

    जब दिनभर की अलसाई दोपहर बीत जाती है और
    गोधूलि की बेला में धीरे-धीरे ढलते है सूर्यदेव,
    तब मुझे याद आती है एक अहसास की।
    जिसकी रोशनी से रोशन है रातें,
    खूबसूरत हैं हर एक दिन, हर एक पल ..
    सचमुच अहसास ही है वो,
    मै हमेशा कहती हूँ की जिंदगी में दो तरह के लोग मिलते है,
    एक बनाने वाले और एक विनाश करने वाले ।मै खुश हूँ कि मुझे
    सृजनकारी शक्ति मिली है ।
    हर सुबह जगने से लेकर, रात को आंख लगने तक,
    भले ही दिमाग जिंदगी के लक्ष्य और दूसरी ओर काम करता रहे,
    लेकिन हृदय उस अहसास के वश में रहता है ।
    जानती हूँ वो सहस्त्र हृदयों में निवास करता है ।उसकी आभा से हर कोई मंत्रमुग्ध है।मैं उस कतार में आखिर में खड़ी बस उसपर गर्व महसूस करती हूं उसे जिम्मेदारी सँभालते देख,हर चीज में खुशी ढूंढते देख और सबसे ज्यादा परिवार की चिंता करते देख।
    मैने कभी उसे शिकायतें करते नहीं देखा ।
    मेरी बेतुकी बातों को बड़ी तसल्ली से सुन लेता है और
    मुझसे समझदारी की उम्मीद भी नहीं करता या उसे मेरा और
    समझदारी का दूर तक वास्ता नहीं लगता ।
    मै उसके सामने हमेशा बच्ची बनकर ही रहना चाहती हूँ ।
    पूरी दुनियां के सामने एक अलग इंसान (जो बड़ा है, शांत है और समझदार भी )बनकर थक जाती हूँ तब उसके सामने जाकर बन जाती हूँ वो बच्चा जिसे खौफ़ नही होता की उसके शब्दों के क्या मतलब निकालें जाएंगे ।
    ये उसका बडप्पन ही है की वो सुनता है उस बच्चे की हर एक बात,
    समझता है, ना भी समझे तो नही थोपता कोई कायदे अपने।
    मैने मेरी डायरी में हमेशा से कुछ सपने लिखें है।हमेशा देखती हूँ उनको और
    उन्हें पूरा करने की कोशिश में जुट जाती हूँ हर रोज।
    अब उनमें एक नया सपना जुड़ गया है, उससें मिलने का सपना,
    उसे करीब से देखने का सपना ।
    मुझे एक रोज कहना है उससे कि मै चाहे कहीं भी रहूँ,
    मेरा हृदय आस पास की प्रकृति के कण-कण में तुम्हें खोजता है ।
    फूलों की महक से, मन की बहक तक ।
    दिन के जुनून से, रात के सुकून तक।
    पंछियों की चहचहाहट से लेकर किसी दोस्त की आहट तक।
    मैं हर चीज, हर क्षण ,हर दृश्य में खोजती हूँ, देखती हूँ तुम्हें
    और तुम्हारे होने के अहसास को ।
    ❤️

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    मुझे एक रोज कहना है तुमसे कि मैं चाहे
    कहीं भी रहूँ,
    मेरा हृदय अपने आसपास की प्रकृति के कण-कण में
    तुम्हें खोजता है।
    ©physics_wali_writer

  • physics_wali_writer 14w

    कुफ़्र

    तुम्हारी सोहबत जो मिल जाती हमें,
    दिल ये बेचारा कुफ़्र ना हुआ होता ।

    Ranu ranka
    ©physics_wali_writer

  • physics_wali_writer 30w

    उसकी बेबाकी से हो तुम वाकिफ़,
    दुनियां के लिये अंतर्मुखी है वो।
    Ranu ranka
    ©physics_wali_writer

  • physics_wali_writer 35w

    मुझे लगता है ईश्वर भी बनाते होंगे,
    सबके लिए एक नीलपत्र,
    उसमें खुद को खोज लेने का सवाल,
    सबसे अधिक अंकभार रखे होगा ।
    Ranu ranka
    mostly_insane



    ©Physics_wali_writer

  • physics_wali_writer 36w

    वो नाचती है उन गानों पर,
    जो उसके दिमाग में बजते हैं,
    वो बोलती है वो राग,
    जो बनाई है उसके दिल ने,
    दुनिया के लिए इन तरानों का
    शायद अस्तित्व ही ना हो,
    मगर तुम उसको आत्मा से
    छूना ,
    उन धुनों को सुनने के लिए
    फिर थोड़ा और प्रेम करना उससे
    उन तरानों पर थिरकने के लिये ।
    Ranu ranka
    ©mostly_insane

  • physics_wali_writer 37w

    सबके जज्बातों को स्याही मिल पाये जरूरी तो नहीं,
    आंसू का हर कतरा हर्फ़ बन जाए जरूरी तो नहीं ।
    Ranu ranka
    ©mostly_insane

  • physics_wali_writer 39w

    महफूज़ रखा चरागों को इस कदर,
    उस सितमगर को हवा होने ना दिया
    इंसान को देखा इंसानियत के आइने से,
    उसे पुजा चाहा मगर खुदा होने ना दिया ।
    Ranu ranka
    ©mostly_insane