political_guruji

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Thoda sarcasam, Thoda Gyaan.. Sasta philosopher, mahnga insaan my posts may offend you �� 8095275035

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  • political_guruji 50w

    इस चिलचिलाती गर्मी में एक गिलास आम पन्ना उस स्वर्ग में बहती अमृतधारा के तुल्य है ❤️

  • political_guruji 50w

    केन्या द्वारा भेजे गए 12 टन सामान पर बहुत से लोग मज़ाक उड़ा रहे है।
    सोशल मीडिया पर केन्या को "भिखारी, भिखमंगा, गरीब" आदि आदि कहा जा रहा है। अब एक छोटा सा वाक़या सुनिए।

    आपने अमरीका का नाम सुना होगा, मैनहैटन का भी, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का भी और ओसामा बिन लादेन का भी।

    जो ज़्यादातर लोगों ने नहीं सुना होगा वो है 'इनोसाईन गाँव' जो पड़ता है केन्या और तंजानिया के बॉर्डर पर और यहाँ की लोकल जनजाति है 'मसाई'।

    अमेरिका पर हुए 9/11 के हमले की ख़बर मसाई लोगों तक पहुचने में कई महीने लग गए।

    ये ख़बर उन तक तब पहुँची जब उनके गाँव के पास के ही कस्बे में रहने वाली, स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी की मेडिकल स्टूडेंट किमेली नाओमा छुट्टियों में वापस केन्या आयी और वहाँ की लोकल जनजाति मसाई को 9/11 का आंखों देखा हाल सुनाया।
    सब दुख से रो पड़े।।।।

    कोई बिल्डिंग इतनी ऊंची हो सकती है कि वहाँ से गिरने पर जान चली जाए, झोपड़ी में रहने वाले मसाई लोगों के लिए ये बात अविश्वसनीय थी मगर फिर भी उन लोगों ने अमरीकियों के दुःख को महसूस किया और उसी मेडिकल स्टूडेंट के माध्यम से केन्या की राजधानी नैरोबी में अमेरिकी दूतावास के डिप्टी चीफ़ विलियम ब्रांगिक को एक पत्र भिजवाया जिसे पढ़ने के बाद विलियम ब्रांगिक ने पहले हवाई जहाज का सफर किया,
    उसके बाद कई मील तक टूटी फूटी सड़क पर कठिनाई का रास्ता पर करते हुए मसाई जनजाति के गाँव पहुँचे।

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    गाँव पहुँचने पर मसाई जनजाति के लोग इक्कट्ठा हुए और एक कतार में 14 गायें ले कर अमरीकी दूतावास के डिप्टी चीफ़ के पास पहुँचे।

    मसाईयों के एक बुज़ुर्ग ने गायों से बंधी रस्सी डिप्टी चीफ़ के हांथों पे पकड़ाते हुए एक तख़्ती की तरफ इशारा कर दिया। जानते हैं उस तख़्ती पर क्या लिखा था?

    लिखा था- "इस दुःख की घड़ी में अमरीका के लोगों की मदद के लिए हम ये गायें उन्हें दान कर रहे हैं"।

    जी हाँ, उस पत्र को पढ़ कर दुनियाँ के सबसे ताकतवर और समृद्धि देश का राजदूत सैकड़ो मील चल कर चौदह गायों का दान लेने आया था।

    गायों के ट्रांसपोर्ट की कठिनाई और कानूनी बाध्यता के कारण गायें तो नहीं जा पायीं मगर उनको बेंचकर एक मसाई आभूषण ख़रीद कर 9/11 मेमोरियल म्यूजियम में रखने की पेशकश की गई।

    जब ये बात अमरीका के आम नागरिकों तक पहुँची तो पता है क्या हुआ?
    उन्होंने आभूषण की जगह गाय लेने की ज़िद्द कर दी। ऑनलाइन पिटीशन साइन किये गए की उन्हें आभूषण नहीं गाय ही चाहिए,
    अधिकारियों को ईमेल लिखे गए,
    नेताओं से बात की गई और करोड़ों अमरीका वासियों ने मसाई जनजाति और केन्या के लोगों को इस अभूतपूर्व प्रेम के लिए कृतज्ञ भाव से धन्यवाद दिया, उनका अभिनंदन किया।

    12 टन अनाज को सहर्ष स्वीकार करिये।
    दान नहीं, दानी का हृदय देखिये, कंकड़ नहीं, कंकड़ उठा कर सेतु में लगाने वाली गिलहरी की श्रद्धा देखिये।

  • political_guruji 50w

    केन्या से 12 टन अनाज आया है!
    उनका दिल देखिए, भावना देखिए, क्या भेजा-कितना भेजा, ये सब ..छोटी बात है। उन्होंने
    इस बुरे समय में अपने सामर्थ्य अनुसार जो भी हो मदद का प्रयास किया
    याद रखिए यह उन्हीं सुदर्शन चक्र धारी श्री कृष्ण का देश है जो सुदामा के दो मुट्ठी चावल पर रीझ जाते है। जो उपहास उडा रहे है वो अपने गिरेबान में झांक कर देखें कि इस आपदा के समय उन्होंने देश को क्या दिया है ।
    वो बहुत गरीब देश है.. उसने जो मदद हमे दी है वो अपने देश की हैसियत को देखते कुछ भी नहीं है.. पर हमारे प्रधान मंत्री द्वारा इसे स्वीकर करना ये प्रदर्शित कर्ता है कि हम सभी का सम्मान करते हैं।❤️

    केन्या ❤️

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    .

  • political_guruji 50w

    And the parents reading this.. Yea do tell your kid's about Greta but remember don’t mention anything about Mia Khalifa. she/ He’d learn about her on his own when he grows up

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    Good Morning to everyone specially school going children with a message that education is more important than anything else for your future. You may become rich & famous without education but will remain uncouth idoit like Greta Thunberg forever

  • political_guruji 50w

    कितनी उदासी ऐसी होती है जिसके लिए कोई शब्द नहीं होते. उन दुखों को हम प्रार्थना की पोटली में बांध कर ईश्वर के दरवाज़े पर रख आते हैं. जैसे, एक माँ का अपने बच्चे को जन्म देना और कुछ ही पलों में उस बच्चे को माँ को छोड़ जाना.

    आह!!!! स्त्री माँ बन कर भी दुनिया की नज़रों में माँ नहीं बन पाई. मिसकैरेज़ या बच्चे का होना और फिर तुरंत इस दुनिया को छोड़ देना किसी भी दूसरे के लिए दुःख की बात होती होगी लेकिन उस माँ पर क्या बीतती होगी ये सिर्फ़ वही माँ समझ सकती है.

    अवसाद, दारुण पीड़ा, आँसू का नहीं आना, किसी दूसरे बच्चे को रोता देख उसकी छातियों से दूध का उतर आना. नहीं, कोई और नहीं समझ सकता है इस दुःख को.

    मैंने कब से वॉच-लिस्ट में डाल रखा था इसे आज न जाने क्यों देखने बैठ गया. Netflix की इस फ़िल्म Pieces of a Woman पर पूरी रात लिखता1 रहूँ फिर भी ज़ाहिर नहीं कर पाऊँगा कि इस वक़्त मैं क्या महसूस कर पा रहा हूँ. अगर देख रखें हैं तो कोई बात नहीं लेकिन नहीं देखें हैं तो इसे देखिए. शुरू में स्लो लग सकती है लेकिन बाद में किसी उदास नदी सी पूरी फ़िल्म आँखों में समा जाएगी. डिटेल से फिर कभी लिखूँगा. वैसे भी इस टॉपिक लिखा जाना चाहिए. उन माँओं के दुःख को अड्रेस करना चाहिए. हमें थोड़ा और सेन्सिटिव होना चाहिए. ख़ैर. फ़िल्म की पोर्टग्निस्ट एक जगह ये बोलती है, शायद कोई रिलेट कर पाए. कोई अपना दुःख याद कर किसी और को दुःख न दे क्या पता!

    “How can I give this pain to someone else? Someone who's already suffered? And I know she would not want that. At all. That is not why my daughter came into this world for the time that she did.”

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  • political_guruji 50w

    everyone is invited, its open for everyone..

    we all can know each other, we can discuss / debate over important or may be useless topics, do mushayra there.. ��

    @jigna___ @amateur_skm @happy81 @chahat_samrat @rani_shri @gunjit_jain @rahat_samrat @sanjay_kumr @saurabh_yadav

    tag everyone.. as maximum you can..

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    hellow everyone....!!!

    Attention please


    I'm thinking to have voice group chat / discussion with you all..

    there is a app '''Clubhouse'''' where we all can have a group discussion.. end number of people can join this.. any one can join as a speaker or listener,

    if you dont want to as speaker there then you can be just listener

    everyone be ready and create account, we all will setup a date and time when ever we all can be available.. let gather around the maximum.. (after registering yourself it take sometime to get ready your account)

    I'm putting my clubhouse link in Bio, you can download on apple / google play store also

    download and register now..

  • political_guruji 50w

    the fact shall always remain that men can pretend to be successful but women can't pretend to be thin

  • political_guruji 50w

    Good morning to everyone except those who don’t think Manish Sisodia is the most handsome man on this planet

  • political_guruji 50w

    At PETA

    Intern girl: We got a call someone has put colors on a pet dog

    Chief: ALL UP. Protest, file an FIR, put culprits in jail, I will teach these maadars a lesson

    Intern: Aaj mele doggy ka bday hai, you all are invited, mutton biryani, beef korma bana hai

    Chief: Girl you rock

  • political_guruji 50w

    लगभग साल पहले ये लिखा था बिहार की किसी खबर को पढ़ कर, आज फिर से ऐसा कुछ देखने को मिला तोह याद आगया, सांझा कर रहा हूँ आप से।

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    ब्याह हुआ नहीं कि बच्चे पैदा करो. ख़ानदान को आगे बढ़ाओ. जैसे बच्चा पैदा हुआ और पति का इंट्रेस्ट जाता रहा. साल में पहले जो दो-तीन बार छुट्टी ले कर घर आता था अब सिर्फ़ छठ में सिमट कर एक बार रह गया. उसी एक छुट्टी में फिर से बीवी प्रगनेंट हो गयी और ऐसे करके बेटे के इंतज़ार में तीन बेटी हुई और फिर एक बेटा.

    अब पति पैसे भेज देता है छुट्टी नहीं आता. छुट्टी आता भी है तो साथ में सोने की दिलचस्पी नहीं रही क्योंकि औरत का शरीर बेडौल हो गया है. छातियाँ लटक चुकी हैं. पेट अब बोरी जैसा हो चुका है. कहीं कुछ भी ऐसा नहीं है जो पति को लुभाए.

    ऊपर से सास का ताना कि ऐसी अभागी है कि मेरा बेटा घर छोड़ गया.

    क्या करे वो औरत? कौन सा जिम खुला है गाँव में? साड़ी और घूँघट में उम्र निकली जा रही है और बेटे को चाहिए सेक्सी-डॉल. कभी अपने साथ के कर दिल्ली-मुंबई नहीं गए लेकिन दिल्ली-मुंबई वाली जैसी बीवी चाहिए.

    करो चार बच्चे पैदा फिर पता चले कि शरीर कितना कमज़ोर हो जाता है. पीलाओ दूध और फिर छातियाँ अपनी जगह पर टिकी रह जाएँ तो कहना. इनको बच्चा पैदा करने वाली मशीन के साथ सेक्स के लिए भी पर्फ़ेक्ट फ़िगर चाहिए. फिर अगर इन बातों को लिख दो तो कहेंगे कि मित्तल तू तो फ़ेमिनिस्ट है इसलिए कुछ भी लिखता है.

    कितने दुःख जिनको लिखा जाना चाहिए और मैं लिखूँगा चाहे आप जो कहें!