• nikhilkhandare 26w

    **जीवित कमरा और खुमारी में तुम!**
    सिने में कुछ अरमान हो बचे कोई तो बताना,
    वरना हवा का लेनदेन तो मेरे कमरे की खिड़की भी करती है।

    सुनी बातों पर विचार करने की चेतना बची हो थोड़ी तो बताना,
    वरना बस सुनने का काम तो मेरे कमरे की दीवारें भी बखूबी करती है।

    दिल में बसी यादों को मिटाने का प्रयास भी कर रहे हो तो बताना,
    वरना चीजे संभाल कर रखने में मेरे कमरे में रखा टेबल भी माहिर है।

    खुली आंखों से कुछ देख भी पा रहे हो तो बताना,
    वरना ये जलने-बुझने का खेल तो मेरे कमरे की बत्ती भी खेलती है।

    गर रोना आए कभी तब आंख से आंसू बह जाए तो बताना,
    वरना मेरे कमरे में मटका भी अक्सर बाहर से नम ही रहता है।

    अगर चलती धड़कन महसूस कर भी लेते हो तो बताना,
    वरना बेवजह टीक-टिक तो मेरे कमरे में टंगी घड़ी दिनभर करती है।

    खामोशी में भी खुद से बातें कर भी लेते हो तो बताना,
    वरना मेरे कमरे का अंधेरा कोना भी सदियों से खामोश रहता है।

    बस छोटीसी चीज है जो तुम्हे मेरे कमरे से बहुत अलग बनाती है,
    मेरे कमरे में सिर्फ एक खिड़की है और तुम्हारी सोच को तो कोई दीवार ही नहीं।
    ©nik_heal_khandare