• pratibhajadhav 13w

    वक्त के पीछे दौड़ते दौड़ते,
    हर लमहे को खुल के जीना ; हम अक्सर भूल जाते है!

    उलझे रहते है बस लफ्जों के तानों बानों में,
    पर खामोशी को समझ लेना ; हम अक्सर भूल जाते है!

    हर किसी की खामियाँ गिनवाते - गिनवाते,
    खुद को ही आईना दिखाना; हम अक्सर भूल जाते है!

    नफरत के अँधेरो में ही खोये-खोये रहते है,
    पर मुहब्बत के दिये जलाना; हम अक्सर भूल जाते है!

    मुखौटा पहन कर झुठी मुस्कानों का,
    सच में खुल कर हँसना ; हम अक्सर भूल जाते है!
    - प्रतिभा .

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    उलझे रहते है बस लफ्जों के तानों - बानों में,
    पर खामोशी को समझ लेना; हम अक्सर भूल जाते है!
    ©pratibhajadhav