• mamtapoet 42w

    तितलियों सी होती हैं यादें
    मन को कभी उपवन में रमा ले जाती हैं
    जब मन चाहें छूने को
    तो फ़ुर् से उड़ जाती हैं।

    कोई एक रंग नहीं यादों का
    दुःख की यादें बड़ी स्याह रंग की होती हैं
    खुशी की हो याद कोई रंगी समा कर जाती हैं।

    मेरे अश्रु का कतरा कतरा
    याद उन्हें करे मेरे मितरा
    भीड़ में भी तन्हा कर जाये
    जब याद मुझे उनकी आये।

    बड़ी रोबिलि थी उनकी आवाज
    आज भी गूंजती है मेरे आस पास
    नजरों को वो स्नेहिल चेहरा नही दिखता
    बड़े पापा सिर पर आपका वो हाथ नहीं रहता।

    जीवन दीप जला,
    खूब पुरा तेल,
    जोत थी जितनी
    उतनी ही बाती जली।

    बड़े सार सम्हाल के रखा हृदय कुसुम को
    आई एक आंधी उड़ा ले गयी वो तुमको
    सब है साथ बस आप नहीं
    जिस्म नहीं है बस रूह हैं यही।

    यादों का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता
    अजीब रवायतें हैं रब तेरी भी
    महसूस सदा जो होते है
    नजरों को दिखाई नहीं देते हैं।।
    ©mamtapoet