• ritusinghrajput 34w

    चाँद रोज़ उतरता है झील में
    मौत की ख़ातिर
    लहरें पूरी शब मौत का झूला झुलाती हैं
    उसे अपनी गोद में रख कर
    और सुबह तक फेंक देती है बाहर
    मर जाता है चाँद का एक हिस्सा
    मैं भी रोज़ जाती हूँ झील में
    तीन सीढ़ी नीचे उतर के बैठ जाती हूँ
    बहा देती हूँ आँखों से कुछ यादें
    आँखों से गिर कर वो डूब जाती हैं
    मौत हो जाती है उनकी
    सुबह लौट आती हूँ
    रोज़ मौतें होती हैं झील में
    कोई नहीं देखता
    किसी को लाशें नहीं मिलती
    मिलती है तो बस मुर्दे के शरीर की ठंडक
    झील के पानी में !

    ©ritusinghrajput