• smart_words 7w

    लिखते हैँ अज़ीज़,हबीब
    रकीब यहाँ सब ही सदा!!

    बढ़ाते हैँ करीब और करीब
    मुनासिब की हवा यहाँ!!

    कुछ के आंसू बटोरने हैँ,
    कुछ की कशिश हैँ मरहवा!!

    कुछ नज़्म लिखें तो गुम हैँ,
    कुछ गुम हैँ तभी नज़्मे हैँ यहाँ!!

    हमारे बाद भी हैँ पहले भी थे,
    हर कलम के स्याही मे सदा !!

    लगता हैँ पढ़कर की हमने लिखा हैँ,
    कुछ हम लिखते हैँ बस उनकी तरह!!

    MD IRFAN

    #lovelyreaders

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    मोहब्बत मुकम्मल हो,
    यह जरूरी तो नहीं,
    अधूरे ख्वाब अक्सर,
    सलीके सीखा जाती हैँ,

    इंसा जैसा भी हो तंदुरस्ती मे,
    मस्जिद मे कहाँ जाता हैँ!
    इंसा को अक्सर बीमारी मे,
    खुदा की याद आती हैँ!!

    IRFAN_SAYS