• soonam 43w

    ऐसा माना जाता है.. होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है.. इस दिन विष्णु भक्त प्रहलाद अपने पुजनीय पिता को छोड़ भगवान विष्णु की भक्ति और आराधना में लीन रहते थे.. जिससे क्रुद्ध हो हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका.. जिसे वरदान स्वरूप अग्नि उसका बाल भी बांका नहीं कर सकती.. उसे भक्त प्रहलाद को साथ लेकर बैठने को कहा.. लेकिन ठीक इसके विपरित होलिका जल कर राख हो गई और भक्त प्रहलाद को कुछ भी नहीं हुआ.. इसी के याद में हम होलिका दहन मनाते हैं क्योंकि इस दिन हिरण्यकश्यप की सबसे बड़ी बुरी शक्ति का नाश और भक्त प्रहलाद की भक्ति और अच्छाई की जीत हुई थी..!!

    देखो चल पड़े हैं सब
    अपनी परंपराओं को निभाने..
    अंदर सैकड़ों बुराईयों से भरे खुद
    और गए हैं होलिका दहन कराने..!!

    मान बहुत है इस रीत की
    सीख सब भूल चुके हैं..
    बुराईयों को बस छोड़ कर अपनी
    सब स्वाहा कर देते हैं सभी..!!

    क्या भला है क्या बुरा है
    यह किसी को याद नहीं..
    सवंत की अग्नि में सब
    पेड़, सामाग्रियां जल कर राख हुईं..!!

    रातभर भीड़-शोर लगा कर
    होलिका को है दहन सब करते..
    परंतु..
    होलिका पूछे एक सवाल बस
    जग से मिटा रहे हो मुझे
    अपने अंदर से मिटा पाओगे कभी..??
    इस दिखावे की दुनिया में तुम
    बुराईयों को छोड़..
    अच्छाईयों का साथ दे पाओगे कभी..??
    ©soonam


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    ©soonam