• mamtapoet 24w

    #rachanaprati125
    @_do_lafj_, @anusugandh, @alkatripathi79

    @_do_lafj_जी का हार्दिक धन्यवाद,देरी से विषय चुनने के लिए क्षमा, आज का विषय है" डर ", डर जो हर मन में समाया रहता है, परसों दोपहर 3 बजे तक आपकी रचनाओं का इंतजार रहेगा।

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    पानी को छू लू और पिघल न जाऊँ
    तपिश भरी भीतर पर कहीं जम न जाऊँ।
    फूलों से भरा दामन ,
    काँटों का क्यों अहसास करायें
    पाया भी नहीं सब कुछ
    फ़िर क्या खोने का भाव जगाये।

    उलझन कह लू तो
    सुलझ भी जाऊं
    पीड़ा हो तन की तो
    गरल भी पी जाऊँ।
    न चाहूँ हर रग में बसेरा
    कँटीले झाड़ सी क्यों हर पथ पे समाई
    मेरा रूप वहीं जो रंग है तेरा
    रक्त न नस में पर,रक्तिम क्यों हर परछाई।

    चलूँ सीधी उल्टी चाल नजर आये
    मेमने की खाल में भेड़िये कहर बरपाए,
    डर को कितना दूर भगाउँ,
    डर का डर, पल पल फ़िर भी सताये।
    ©mamtapoet