• ps_originals 29w

    दर्द हद से गुज़र रहा है मैं चीख भी नही पा रहा हूँ
    कहने को हूँ जिंदा मगर अंदर से मरता जा रहा हूँ...

    वक़्त भी खिलाफ है अपने भी साथ नही,
    पिंजरे में कैद एक परिंदे सा फड़फड़ा रहा हूँ...

    मन बेचैन है रूह भी चीख पुकार रही है,
    क्या गुनाह किया किस गुनाह की सजा पा रहा हूँ...

    दौलत से ही सब रिश्ते नाते अपने बनते है तो,
    फिर किसलिये रिश्तों के ढोंग निभाये जा रहा हूँ...

    अपना कह देने भर से कोई अपना नही हो जाता,
    अपने ही कातिल है मेरे खाबों के अपनो के हाथों ही जलाया जा रहा हूँ...

    #SeMiWriteups
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