• om_shanti 17w

    माँ

    क्या से क्या हो गया मैं माँ!
    आबाद होने निकला था घर से
    कितना बर्बाद हो गया न माँ!

    पास आकर बस गले लगा लो मुझे,
    आँचल में अपने फिर से छुपा लो न माँ!

    कब से तो भाग रहा हूँ मैं उलझन में,
    थोड़ी देर गोद मे सुला लो न माँ!

    चिल्ला चिल्ला कर कह दी तकलीफें बाजार में,
    बस तुम आंखों को पढ़कर सब सुलझा दो न माँ!

    अकेले,अब ये चाँद भी गिन नही पाता हूँ मैं,
    तुम तो इन तारो को गिनवा देती थी न माँ!

    सुबह की बटर ब्रेड से ऊब गया हूँ मैं,
    रात की रोटी में चिन्नी लगा कर खिला दो न माँ!

    बस जल्दी आकर गले लगा लो न माँ,
    बिना सुने कुछ मेरा हाल बता दो माँ!

    आँचल में अपने छुपा लो न माँ,
    गोद मे अपने सुला लो न माँ!
    ©anxious_soul