• jee_tu 5w

    जैसे एक भटकी नदी को सागर मिल जाए
    जैसे तपते रेगिस्तान में घोर वर्षा हो जाए
    जैसे सालों से गरजते बादल की प्यास बुझ जाए
    आग में लिपटे जंगल में बरसात हो जाए

    जैसे सूखे पहाड़ पर ठंड में ओस
    पत्थर पर पानी पड़े और फूल खिल जाए
    जनम जनम के मुसाफिर को मिल जाए ठिकाना
    थक कर होंसला हारने का मन और मंज़िल दिख जाए
    बेवजह चलते राही को पहुंचने की वजह मिल जाए

    जैसे एक अधूरी कहानी से जूड़े खूबसूरत अफसाना
    जैसे मझदार में फंसी नौका को किनारा मिल जाए
    बिन सिरे की न खतम होती सूरंग
    और उस सुरंग के आगे एक रौशन दिया दिख जाए

    वैसे मुझे कभी तूं मिल जाए
    तूं मिल जाए


    ©jee_tu