• suryamprachands 9w

    ❤️

    वो अविरल काले, केश पाश
    वो तीर नयन, वो मधुर हास
    वो मौन अधर हैं, किंतु मुखर
    वो वाचाली दृग,...रम्य,प्रखर
    वो अधरों का,... उन्मुक्त मेल
    उनमें शब्दों का,...सूक्ष्म खेल
    इन सबमें ये चित्त उलझ कर कहीं खो गया
    हमको लगता प्रेम हो गया, हमको तुमसे प्रेम हो गया

    मन.....तुमसे बतियाना चाहे
    साथ बैठ कर.... खाना चाहे
    प्रेम इसे ही.....कहते शायद
    जग भर में है..बड़ी कवायद
    कुछ तो तुमसे,.कहना है पर
    अपनी हद में,...रहना है पर
    तुमको देखा सच कहता हूँ ये उच्छृंखल हृदय सो गया
    हमको लगता प्रेम हो गया, हमको तुमसे प्रेम हो गया

    © Suryam Mishra