• unpaired_heart 55w

    Kabhi fursat ho to.mil liya karo sapno mai sahi

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    सुनो मां
    जो आग लिये निकले धे घर से,
    वह लौ आज बुझाती दिखती हे
    रास्ते पर चलते कयी दफा कमजोर पङ जाता हू
    सड़क के किनारे ठहर कर सोच लेता हूँ
    कहीं गलत राह तो नही चल दिया फिर
    ओर यह लौ रोज बुझाती दिखती हैं मुझे।

    मां इस सफर पर काश तुम साथ चलती,
    दिखाता तुम्हे कितने रूखे दिल है लोगो के
    जो अकसर साथ सफर करने का वादा कर दिया करते हैं।
    दिन बचयन के थे , मां
    यह रात खत्म नही होती
    आज वह मायुसी का दिन है
    जब वह लौ बुझाती दिखती हैं मुझे।

    ©unpaired_heart