• tanmay5 12w

    लिखे जो खत कभी।

    लिखे जो खत कभी
    वो आज फिर से याद करता हूँ,
    उस मुस्कान को सोच कर
    आज फिर से मैं हँसता हूँ,
    उन आखों की गहराइयों में
    आज फिर से डूब जाता हूँ,
    उस चहरे की रोशनी में
    मैं अंधकार का नाश करता हूँ,
    लिखे जो खत कभी
    वो आज फिर से याद करता हूँ।
    ©tanmay5