• happy81 63w

    #prayasss45
    @mittal_saab

    ये इतना बड़ा टॉपिक है की मुझे आधा कट करना पड़ा,

    ऐसे कई कारण हैं जिनके कारण किसी देश की सरकार कुछ क्षेत्रों के निजीकरण का निर्णय लेती है।

    इनमें से कुछ में सरकार का बोझ कम करना, वित्तीय घाटे का सामना करना, बेहतर सेवाएं प्रदान करना और समग्र ग्राहक अनुभव को बढ़ाना शामिल है। जबकि कुछ देशों ने निजीकरण से लाभ उठाया है, दूसरों को भारी असफलता मिली है। भारत ने एक मिश्रित परिणाम देखा है। हालांकि भारत में कुछ उद्योग एक अच्छा काम कर रहे हैं, जबकि निजीकरण के बाद अन्य लोगों ने सेवाओं की गुणवत्ता को डुबो दिया है और कीमतें बढ़ाई हैं।
    सरकारी अर्थशास्त्र पर निजीकरण का प्रभाव काफी हद तक सकारात्मक है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस रफ्तार से सरकार विभिन्न उद्योगों का सरकारीकरण कर रही थी, उस रफ्तार से उसका निजीकरण हो रहा है। हमारे देश में सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत कई उद्योग खराब प्रबंधन, मालिकों के अपर्याप्त ज्ञान और उचित संसाधनों की कमी के कारण बड़े नुकसान झेल रहे थे।
    , मेरी भूल चूको को माफ़ करे,, मैं चाहती हूँ हमारा देश विकासशील देश है,, जिसकी प्रगति के लिए हमे अन्य विकसित देशो की तरह निजीकरण को अपनाना चाहिए,, हर किसी के दो पहलू होते है इसकी नकरात्मकता के लिए सरकार कुछ ना कुछ ज़रूर करेगी क्युकी इसकी जरुरत बहुत ज्यादा है,, भाई साहब को बहुत बहुत बधाई उत्तम विषय देने के लिए... धन्यवाद.. ������

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    बात करते है निजीकरण निजीकरण क्या है ??.
    (Privatization), जिसे निजीकरण (Privatisation) भी कहा जाता है, इसका अर्थ अलग-अलग चीजों से हो सकता है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र से कुछ को निजी क्षेत्र में स्थानांतरित करना शामिल है,, आजकल बैंको में निजीकरण हो रहे है,, रेलवे में,, और बहुत जगह निजीकरण को बढ़वा मिल रहा है मैं इसके पक्ष में हूँ मैं जानती हूँ इसके फायदे और नुक्सान दोनों निजीकरण मूल रूप से निजी मालिकों के हाथों में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया है। शिक्षा के मामले में भी इसकी बहुत जरुरत है ,देशकी अरबो की जनसँख्या को शिक्षित करना सरकार के बस की बात नहीं,, अभिभावकों के निजी स्कलों में अपने बच्चों के भेजने के पीछे तीन वजहें हैं। पहली तो यह कि निजी स्कूल बेहतर शिक्षा मुहैया कराते है, दूसरी सस्ती और तीसरी बात यह कि ये बच्चों और उनके अभिभावकों के जिसकी मांग मौजूदा समय में दिनोंदिन बढ़ती जा रही ये क्रांति लाने का सबसे ज्यादा श्रेय जाना चाहिए इंटरनेट को! जबसे इंटरनेट आ गया हालांकि एक नेगेटिव बात ये भी है वो प्राइवेट संस्थान शिक्षा के बदले मोटी रकम भी वसूलते है अब गरीब कहाँ जाये हा स्कॉलरशिप मिल रही निजीकरण का प्रभाव कुछ मामलों में नकारात्मक रहा भारत में बैंकिंग क्षेत्र के निजीकरण के साथ, इस क्षेत्र को चलाने की शक्तितुलनात्मक रूप से कुशल हाथों में चली गई है। इससे देश में बैंकिंक्षेतकीस्थिति में सुधार हुआ है।
    निजीकरण का एक बड़ा सकारात्मक प्रभाव यह हुआ है कि इसने सरकार के ऋण को कम कर दिया है।नकरात्मक है
    निजी मालिक अपने कार्यों को पूरा करने के लिए विभिन्न माध्यमों को अपनाते हैं। वे रिश्वत, धोखाधड़ी और कई अन्य ऐसे बुरे व्यवहार करते हैं जो भ्रष्टाचार को जन्म देते हैं।
    ऐसे क्षेत्रों में, जहाँ निजी स्वामी की प्रतिस्पर्धा या एकाधिकार कम है, उपभोक्ताओं को सामान और सेवाएँ खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में धनराशि की आवश्यकता होती है। कीमतों में बढ़ोतरी है और ग्राहकों के पास भुगतान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है!
    ©happy81lovepreet