• shayar_tera 38w

    वो अपने दर्द को बयां नहीं कर सकता,
    पर ऐसे मोह्हबत तो कोई निभा भी नहीं सकता।

    तेरी खुशियों के आगे कुछ देखा नहीं मैंने,
    पर दूर बैठ कर मिलने के सपने तुझे दिखा भी नहीं सकता।

    हक में कोई फैसला नहीं हुआ अभी तक,
    पर दूरियों को पल में ऐसे घटा भी नहीं सकता।

    सारे जज्बात रखे के रखे रह गए मेरे,
    पर अब ख़्याल बदल गया तो तुझे बता भी नहीं सकता।

    जानता हूँ तेरा हाल आजकल मुसल्सल बिगड़ रहा,
    पर हक़ीक़त में तेरे करीब मैं अभी आ भी नहीं सकता।


    ©shayar_tera