• garima_myra_elsa 157w

    नजाने कौनसी लकीर में बस्ते हो तुम,
    आज भी इन कापते हुए हाथो में
    कुछ पंक्ति है हमारे मुर्झाय हुए से प्यार की
    जो मैंने आज भी खिलाकर रखी है
    पर यार मेरे वो चुभती बहुत है
    ©garima_myra