• _mann_j 88w

    Khwab se pare hai tera chehra....��

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    तलाश रहा था ख़ुद को हर गली-मोहल्ले में,
    इक दिन मुख़ातिब हुआँ मैं, यूँ तेरे चेहरे में!
    © मनोजसिंह परमार