• tanish_ji 55w

    18-07-21 (5:51PM)

    Read More

    तूने जब आखरी दफा मुझे सीने से लगाया था
    कुछ पल के लिए मैंने दुनिया को भुलाया था
    जैसे जैसे तूने ख़ुद से दूर भगाया था
    ख़ुशियाँ छिन गईं थी एक मातम सा छाया था
    हज़ारों की भीड़ मे भी तन्हा खुदको पाया था
    कितने सपने टूटे थे....कितनी आसाओं का गला दबाया था
    हंस भी लिया होगा तू अपने दोस्त के साथ....मुझे तो आँसू भर आँखों मे रोना भी ना आया था
    ©tanish_ji