• wordsporn 199w

    मुसाफिर सा हो गया हूँ,
    जिन्दगी के रास्तों पे,
    दूसरों को मंजिल पर पहुँचाते पहुँचाते,
    खुद की मंजिल को भूल सा गया हूँ।
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