• vaibhav007 21w

    अंत में मंजिले उसकी थी, रस्ता भी उसका ही था।
    केवल एक मै अकेला था, बाकी सारा काफ़िला उसका था।
    साथ चलने की सोच भी तो उसकी थी,
    पर रास्ते बदलने का फैसला, वो फैसला भी उसका था।

    सोचता हूँ की आज मै ही क्यूँ अकेला खड़ा हूँ?
    लोग तो उसके थे ही, पर क्या वो खुदा?
    वो खुदा भी उसका था?

    ~अन्शुमान

    Read More

    मैने वहाँ भी तुम्हे माँगा,
    जहां लोग अपनी खुशियाँ मांग रहे थे।

    कभी आना मेरे शहर,
    मंदिरों मे बांधे हुए धागे दिखाऊंगा।
    ©vaibhav007