• aksilent 15w

    कश्ती ही बदलती रही सागर तो वही था
    हो कोई जनम अपना मुक़द्दर तो वही था

    सच है मैं बुलंदी पे रहा और वो नाकाम
    सच ये भी है हम दोनों में बेहतर तो वही था

    जो शह्र ने बख़्शा है फ़क़त एक मकाँ है
    हम गाँव में छोड़ आए जिसे घर तो वही था