• shayar_tera 36w

    क्या भरोसा रह गया होगा उसे मुझपर,
    मैं यूँही बातें बना रहा दिन-रात आजकल।

    सच बोलते हुए तो कितने वक़्त निकल गए,
    मैं कैसे कह दूँ किन हालातों से गुजरा रहा आजकल।

    इंतजार करते हुए ही आँखें लग जाती हैं,
    मैं तो ढंग से सो तक नहीं रहा आजकल।

    ज़रा अपने पक्के इरादे तो बता दो मुझको,
    मैं शहर बदलने का सोच रहा आजकल।


    ©shayar_tera