• secondchild 103w

    आज

    आज अदृशय सी तबाही हर रोज़ है,
    पर 'हम सही हैं' , इसी में सबकी मौज है,
    सिर्फ सरहदों पर नहीं , आज हर पक्ष की अपनी फ़ौज है।
    खुद की कला पर शंका और अपने आगे एक नेता की खोज है,
    उदारवादी कमज़ोर ही है दोनों पक्षों में,
    और उग्रवादी बुलंद अफ़रोज़ हैं ।

    आज जो भी सोचूं मैं,
    कल की सोच कुछ और ही कहती है।
    किससे पूछूँ कि क्या है सही,
    सच की सियाही भी अब बाजार में बिकती है,
    एक रंग आजमां लूँ, पर एक से सच्चाई कहाँ दिखती है,
    हाँ पर उस सियाही से आज भी मन शांत होता है, जिससे मेरी माँ लिखती है।
    ©secondchild