• ek_ehsas 52w

    मां का आंचल

    मां के असीम अंचल में
    समाये हैं अनेकानेक सतरंगी इन्द्रधनुष

    समाईं हैं इसमें
    खुली रात के सितारों की भांति
    अनेकों बेशकीमती यादें और
    अनगिनत सुनहरे किस्से

    वो भरी दुपहरी
    दोस्तों का बुलाना
    और हमारा खाना बीच ही छोड़
    भागना नंगे पांव

    उसका पहले करना वो झूठा गुस्सा
    फिर अपने ही हाथों से खाना खिला
    और आंचल से हमारा मुंह पोंछ
    मुस्कुराते हुए करना विदा

    यूं तो ये उसकी साड़ी का बस इक कोना है
    पर बसते हैं इसमें से ही ऐसे ही कईं
    मतवाले बेखबर बचपन

    बसती हैं इसमें वो प्यारी अंधेरी रातें
    जब लाईट चली जाती और
    जल उठती लालटेन की एक टिमटिमाती लौ
    करने को तैयार तिमिर से दो-दो हाथ

    साथ-साथ मापती बाल-कल्पना की परिकाष्ठा
    धरकर ढेरों रूप
    और डरते हुए हमारा सिमट जाना
    अपनी मां के इसी आंचल से

    वो जोशीले दिन
    जब हम सायकिल को यूं भगाते
    जैसे एक होड़ हो पवन से
    और दांव पर लगा हो
    सम्पूर्ण बाल दर्प

    और फिर अपने उत्सर्ग में मदांध हो
    गिरकर घर आना और
    मां का करना साफ, इसी आंचल से
    उन टूटे-फूटे घुटने और कोहनियों को

    वो हवा के अन्धडों में
    करना खूब पतंगबाजी
    कभी खुले मैदानों में
    तो कभी मोहल्ले की छतों से

    जब बरेली की डोर से पतंग नहीं
    मानों उड़ रहा हो उन्मुक्त एक बचपन
    जो माप लेना चाहता हो
    अपनी एक ही उड़ान में...पूरा आसमां

    और कभी जो धूल चली जाए
    तो उसका, आहिस्ता से फूंक मार
    इसी आंचल का फोहा बना
    रखना अपने लाल की आंखों पर

    या कभी भरे बाज़ार
    साथ खरीददारी करते हुए
    इसी आंचल का बन जाना
    एक GPS tracker उन नन्हें हाथों के लिए

    और कभी बन जाना
    झीनी पर शीतल छांव
    उसकी असीम ममता की
    जेठ की कड़कड़ाती धूप में

    मां तुम तो चली गईं
    पर छोड़ गईं अपने पीछे
    कभी ना खत्म होने वाली यादें
    इस इक आंचल कीं

    अनगिनत बेशुमार बातें
    तुम जैसी, बहुत प्यारी, बहुत अनमोल
    दिल के करीब और एहसासों में साथ
    पर असल में दूर, बहुत दूर ......

    Miss You Maa ...

    ~ सुमित